{"_id":"1b01af8be14cba8d8b3bcac707cb4e5e","slug":"lions-added-hurriedly-replaced-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आनन-फानन बदला गया शेरों का जोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आनन-फानन बदला गया शेरों का जोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लायन सफारी प्रशासन क ो जैसे ही पता चला कि पटौदी व जैसिका दोनों अभी भी बबेसिया की चपेट में हैं, उन्हें तुरंत कुबेर और कुंवारी से अलग करने का फरमान जारी कर दिया गया।
शेर कुबेर और शेरनी कुंवारी में भी बबेसिया बीमारी की आशंका से लायन सफारी प्रशासन में खलबली मची है। अधिकारी मान रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो उन पर शासन की गाज गिरनी तय है। इसी से अधिकारियों ने शेरों का इलाज कर चुके देश भर के डाक्टरों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। अधिकारी इस जुगत में हैं कि बात बिगड़ने से पहले ही मामले को किसी तरह साध लिया जाए।
शाम को कीपरों की मदद से बबेसिया ग्रस्त जोड़े को अन्य शेरों से दूर कर दिया गया। अब एक ओर पटौदी और जैसिका को इलाज दिए जाने के लिए डाक्टरों से सलाह ली जा रही है, दूसरी ओर कुबेर और कुंवारी के ब्लड सैंपल लेकर उसे आईवीआरआई भेजने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
छुआछूत का रोग है बबेसिया
वेटनरी डाक्टरों के अनुसार बबेसिया छुआछूत की बीमारी है और एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से पहुंच जाती है। बबेसिया का संक्रमण किलनी और किलौरी से फैलता है। बबेसिया के संक्रमण से ग्रस्त पशु के संपर्क में यदि काई दूसरा पशु आता है तो उसको बबेसिया का संक्रमण होने की आशंका अधिक रहती है।
इसके पीछे कारण यह है कि बबेसिया से संक्रमित किलनी और किलौरी जरा से संपर्क होने पर ही दूसरे पशु के बालों में प्रवेश कर जाती हैं और जैसे ही पशु के खून से संपर्क साधती हैं, पशु में बबेसिया के वायरस छोड़ देती हैं। इससे दूसरा पशु भी तुरंत बबेसिया क ी चपेट में आ जाता है।
खतरनाक है एंटी बबेसिया दवा
वेटनरी विशेषज्ञों के अनुसार जानवरों में होने वाली बबेसिया की बीमारी मलेरिया की तरह है। मलेरिया मच्छरों के काटने से होता है और बबेसिया जानवरों में पाए जाने वाले किलनी ओर किलौरी के काटने से फैलता है। ठीक इसी प्रकार से बबेसिया की दवा एंटी बवेसिया भी मलेरिया की दवा की तरह खतरनाक है और जानवरों को एक नियंत्रित डोज ही दी जाती है। सफारी में बीमार पटौदी व जैसिका को 10 दिन पूर्व ही एंटी बबेसिया का तीन दिन का कोर्स दिया गया है। ऐसे में अब उन्हें फिर से यह दवाई देना भी खतरनाक है। यही कारण है कि लायन सफारी प्रशासन परेशान है कि अब शेरों को क्या इलाज दिया जाए।
विज्ञापन
शेर कुबेर और शेरनी कुंवारी में भी बबेसिया बीमारी की आशंका से लायन सफारी प्रशासन में खलबली मची है। अधिकारी मान रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो उन पर शासन की गाज गिरनी तय है। इसी से अधिकारियों ने शेरों का इलाज कर चुके देश भर के डाक्टरों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। अधिकारी इस जुगत में हैं कि बात बिगड़ने से पहले ही मामले को किसी तरह साध लिया जाए।
विज्ञापन
शाम को कीपरों की मदद से बबेसिया ग्रस्त जोड़े को अन्य शेरों से दूर कर दिया गया। अब एक ओर पटौदी और जैसिका को इलाज दिए जाने के लिए डाक्टरों से सलाह ली जा रही है, दूसरी ओर कुबेर और कुंवारी के ब्लड सैंपल लेकर उसे आईवीआरआई भेजने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
छुआछूत का रोग है बबेसिया
वेटनरी डाक्टरों के अनुसार बबेसिया छुआछूत की बीमारी है और एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से पहुंच जाती है। बबेसिया का संक्रमण किलनी और किलौरी से फैलता है। बबेसिया के संक्रमण से ग्रस्त पशु के संपर्क में यदि काई दूसरा पशु आता है तो उसको बबेसिया का संक्रमण होने की आशंका अधिक रहती है।
इसके पीछे कारण यह है कि बबेसिया से संक्रमित किलनी और किलौरी जरा से संपर्क होने पर ही दूसरे पशु के बालों में प्रवेश कर जाती हैं और जैसे ही पशु के खून से संपर्क साधती हैं, पशु में बबेसिया के वायरस छोड़ देती हैं। इससे दूसरा पशु भी तुरंत बबेसिया क ी चपेट में आ जाता है।
खतरनाक है एंटी बबेसिया दवा
वेटनरी विशेषज्ञों के अनुसार जानवरों में होने वाली बबेसिया की बीमारी मलेरिया की तरह है। मलेरिया मच्छरों के काटने से होता है और बबेसिया जानवरों में पाए जाने वाले किलनी ओर किलौरी के काटने से फैलता है। ठीक इसी प्रकार से बबेसिया की दवा एंटी बवेसिया भी मलेरिया की दवा की तरह खतरनाक है और जानवरों को एक नियंत्रित डोज ही दी जाती है। सफारी में बीमार पटौदी व जैसिका को 10 दिन पूर्व ही एंटी बबेसिया का तीन दिन का कोर्स दिया गया है। ऐसे में अब उन्हें फिर से यह दवाई देना भी खतरनाक है। यही कारण है कि लायन सफारी प्रशासन परेशान है कि अब शेरों को क्या इलाज दिया जाए।