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अपात्र ने समाजवादी पेंशन ली तो होगी वसूली
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Fri, 27 Feb 2015 01:11 AM IST
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समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने कहा कि यदि कोई चार मंजिला मकान का स्वामी है और समाजवादी पेंशन प्राप्त कर रहे हैं तो पेंशन धनराशि की वसूली की जाएगी। उन्होंने पेंशनरों को यह भरोसा दिया कि मार्च तक उनके खाते में पेंशन पहुंच जाएगी।
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पेंशन से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए बृहस्पतिवार को समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने जिले का दौरा किया। उन्होंने पेंशन योजनाओं से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक की। बाद में पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।
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उन्होंने कहा कि हरेक पेंशनर के खाते में धनराशि पहुंच जाए, वह इसकी पहल करने आए हैं। उनका मकसद है कि पेंशन की रकम बैंक के सस्पेंस अकाउंट में न पड़ी रहे। पीएफएमएस सर्वर से बैंक खातों में पेंशन भेजने में जो दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है।
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मसलन बैंकों के नाम गलत फीड थे, उन्हें ठीक किया जा रहा है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि मार्च तक हर पेंशनर के खाते में रकम पहुंच जाएगी। समाजवादी पेंशन पर उन्होंने कहा कि अपात्र लोगों ने अगर पेंशन का लाभ लिया तो उसकी रिकवरी की जाएगी।
श्री कुमार ने कहा कि विगत वर्षों में जो धनराशि पेंशनर के खाते में कभी पहुंचती नहीं थी, उसकी खामी अब सामने आ रही है। अकाउंट नंबर के गलत होने पर वह पैसा बैंक के सस्पेंस खाते में पड़ा रहता था। बैंक भी 8-10 महीने बाद एक ड्राफ्ट बनाकर भेज देता था।
लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में उस रकम को कोई पूछने वाला नहीं होता था। फ्री फ्लोटिंग वाली इस रकम का लोग जैसे चाहे वैसा इस्तेमाल कर लेते रहे हैं। पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट स्कीम) सर्वर से यह बात संज्ञान में आ रही है कि किस व्यक्ति का किस वजह से पेंशन नहीं पहुंचती थी।
किसी के केवाईसी नार्म्स पूरे नहीं हैं तो किसी का बैंक खाता बंद हो चुका है। ऐसी परेशानियों को अब दूर किया जा रहा है। यही नहीं पेंशनरों से मोबाइल नंबर भी लिए जा रहे हैं, जिससे खाते में पेंशन पहुंचने पर उन्हें एसएमएस के जरिए सूचना भेजी जा सकेगी। पेंशन भी अब हर महीने मिला करेगी।
छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को उचित बताते हुए प्रमुख सचिव ने बताया कि अभी तक यह देखने में आया है कि स्टूडेंट के आवेदन में गलत बैंक खाता संख्या दर्ज की जाती रही। मसलन छात्रवृत्ति तो अशोक यादव के नाम भेजी गई लेकिन खाता संचालक अशोक मिश्रा निकले।
अब यह सब चीजें पकड़ में आ रही है। इसलिए अब इसमें डेटा क्लीनिंग हो रहा है। हालांकि बड़े पैमाने पर इस कार्य को पूरा करने के लिए इस साल कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। उन्होनें बताया कि इस साल दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 66 लाख ऑन लाइन आवेदन किए गए। जिसमें से 54 लाख आवेदनों को संस्थाओं ने फारवर्ड किया।
पिछले साल 50 लाख आवेदन प्रिंटआउट निकाल कर जमा हुए थे। जिसमें से 44 लाख फारवर्ड हुए थे। इस साल जो 54 लाख आवेदनों की अलग अलग स्क्रूटनिंग कराई गई तो एक इनकम सर्टीफिकेट नंबर पर 50-50 स्टूडेंट्स पाए गए।
आवेदन करने वालों में ऐसे छात्र भी रहे जिन्होंने गत वर्ष 11वीं का फार्म नहीं भरा था। वह इस साल सीधे 12वीं का भर रहे हैं। यह कहां से संभव है। इसी तरह फर्स्ट ईयर के छात्र को सेंकेड ईयर में जाना चाहिए थे। लेकिन वह सब गायब हैं।
अब जब सब चीजें सिस्टम से हो रही हैं तो इस ऑन लाइन आवेदन प्रक्रिया में पकड़ में आ रही हैं।
प्रमुख सचिव ने कहा कि एक ही संस्था एक ही कोर्स के लिए पिछले साल तक ओबीसी, एससी व अल्पसंख्यक से अलग अलग फीस लेती रही।
उन्होंने सवाल किया कि क्या यह संभव है। इन्हीं गड़बड़ियाें को पकड़कर ठीक किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आश्रम पद्यति स्कूलों की गड़बड़ियों पर भी अगले साल से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस दौरान डीएम नितिन बंसल, सीडीओ डा. अशोक चंद्र, एडीएम ज्ञानेंद्र सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी एनपी गुप्ता, जिला पिछड़ावर्ग कल्याण अधिकारी रजनीश पांडेय आदि अधिकारी मौजूद रहे।