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घुड़का रोग के संक्रमण का खतरा बढ़ा

Tue, 14 Dec 2021 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:09 AM IST
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Increased risk of infection with venereal disease
बकेवर । सर्दी बढ़ने के साथ ही गाय-भैंस में निमोनिया के साथ संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। इन दिनों ये पशु घुड़का बीमारी से भी ग्रसित हो रहे हैं। इस बीमारी से पशुओं के गले में तकलीफ होने के साथ सांस लेने में दिक्कत पैदा होती है। इसका सही से इलाज न हो पाने पर पशुओं की मौत तक हो जाती है। पशुओं मे इन बीमारियों के बढ़ने से पशु पालक चिंतित है। पशु चिकित्सक का कहना है कि पशुपालक थोड़ा ध्यान दें तो वे अपने पशुओं को इन बीमारियों से बचाया सकते हैं।
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दिसंबर माह का प्रथम पखवाड़ा बीतने के साथ ही सुबह और शाम के समय सर्दी भी अपना तेवर दिखाने लगी है । सर्दी के शुरुआती दौर मे ही दुधारू और अन्य पालतू पशु हलाकान है । सर्दी की वजह से यह बेजुबान पालतू पशु निमोनिया जैसी बीमारी का शिकार होने लगे है । कही कही पशु घुड़का और मुंह पका बीमारी का शिकार हो रहे।
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बकेवर पशु चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ सोमेश निगम का कहना है कि सर्दी के दिनों में पशुपालक गाय-भैंस व दूसरे जानवरों को बचाने के लिए पशुशाला में घासफूस और पुआल फैला देते हैं। यह उपाय ठीक है मगर इसमें दिक्कत यह आती है कि पशुपालक बहुत समय तक घासफूस व पुआल बदलते नहीं है। पशु उसे गीला
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और गंदा करता रहता है। सर्दी में गीली घासफूस और पुआल से जानवर को निमोनिया होने का खतरा रहता है। साथ ही डायरिया की बीमारी भी बढ़ जाती है। पशुओं को इस बीमारी से बचाने के लिए पशुशाला और रात में पशु बांधने वाले स्थान में जल्द से जल्द घासफूस और पुआल को बदलते रहना चाहिए।

पशुधन प्रसार अधिकारी अनिलवीर सिंह चौहान का कहना है कि सर्दी बढ़ने के साथ ही कुत्तों में पार्वो वायरस फैलने लगता है। इस वायरस से ग्रसित होने वाले कुत्तों में चकत्ते पड़ने के साथ ही दाने पड़ने लगते हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद कुत्तों के मुंह से खून आना शुरू हो जाता है। इससे बचाव के लिए ढाई से छह महीने तक कुत्तों में इसकी नियमित वैक्सीन लगानी चाहिए।
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