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जिले में नहीं है बीमा कंपनी का दफ्तर

Sun, 05 Apr 2015 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Sun, 05 Apr 2015 11:54 PM IST
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in District no office of insurance company

अमर उजाला के पब्लिक कॉल में रविवार को करीब 50 से ज्यादा किसानों ने इसी तरह की समस्या बताई। दरअसल यह समस्या सिर्फ जिले के 50 लोगों की ही नहीं है। फसल का बीमा कराने के बाद कैसे मुआवजा मिलेगा, कब मिलेगा, सर्वे कब होगा। इन सवालों का जवाब देने के लिए बीमा कंपनी की ओर से कोई व्यवस्था ही नहीं की गई है।

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किसान कभी एसडीएम के पास जाकर दुखड़ा रोता है तो कभी बैंक के अफसर के अफसर के आगे गिड़गिड़ाता है। टकासा जवाब मिलता है...बीमा कंपनी वालों से पूछो। बेचारा किसान अब कहां जाए बीमा कंपनी वाले दुर्लभ प्राणी जो ठहरे।
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जिले से फसल बीमा के रूप में लाखों रुपये प्रीमियम वसूलने वाली एचडीएफसी एरगो बीमा कंपनी का यहां कोई दफ्तर तक नहीं है।

न ही कंपनी का कोई अधिकारी यहां आता जाता है। कोई प्रतिनिधि नियुक्त कर रखा है। उसकी मर्जी हुई तो आला अफसरों की मीटिंग में कभी कभार दर्शन दे दिए वरना कोई पूछे जांचने वाला नहीं।  किसानों की समस्या को देखते हुए एचडीएफसी एरगो बीमा कंपनी के लखनऊ कार्यालयमें जिले के इंचार्ज सुमित सत्येन के फोन किया।
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उनके रवैये से साफ जाहिर हो गया कि किसानों की समस्या के प्रति वे कितने संजीदा हैं। किसानों की बीमा राशि कब तक, कैसे आदि सवाल पूछे तो आधा घंटा बाद फोन करने को कहा। आधा घंटा बाद फोन किया गया तो रिसीव ही नहीं किया। अब ढाई सौ किमी दूर बैठकर कोई किसी की समस्या कैसे सुन सकता है।

हालांकि उप कृषि निदेशक एसके सिंह फसल बीमा के नोडल अधिकारी हैं। उनका कहना है कि कंपनी का कोई कार्यालय यहां नहीं है, लेकिन बीमा संबंधी शिकायतें वे स्वयं सुनते हैं और फसल बीमा का काम बैंकों से होता है।


केस-1-औरैया जिले के ककरेया निवासी संतोष कुमार ने बताया कि सहकारी समिति से खाद लेने पर केसीसी से बीमा हो जाता है। आंधी-पानी में फसल बर्बाद हो गई, लेकिन अभी तक बीमा के लिए किसी ने सर्वे तक नहीं किया।

केस-2-बिधूना निवासी अविनाश सिंह ने बताया कि उसकी आठ बीघा खेती बर्बाद हो गई है। लेखपाल ने सिर्फ चने के नुकसान का ही सर्वे किया है। अभी तक कुछ मुआवजा नहीं मिला है। केसीसी होने के बाद भी बीमा कंपनियां कुछ नहीं कर रही हैं।

केस-3-बिधूना निवासी शैलेश कुमार ने बताया कि उनकी काफी फसल बर्बाद हो गई है। सहकारी समिति से खाद ली थी। केसीसी से खाद लेते ही फसल का बीमा हो जाता है। इसके लिए तहसील में एसडीएम को प्रार्थना पत्र भी दिया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

केस-4-चकरनगर के संतोष यादव ने बताया कि उनकी काफी फसल बर्बाद हुई है। मुआवजा नहीं मिला है। लेखपाल ने भी सर्वे नहीं किया है। उनके पास बैंक आफ बड़ौदा का केसीसी है। बैंक ने भी फसल बीमा की धनराशि देने से इंकार कर दिया है।

बिना केसीसी के बीमा कराने वाला कोई किसान नहीं
उप कृषि निदेशक एसके सिंह के मुताबिक जिले में दो लाख किसान हैं। इसमें ज्यादातर के पास केसीसी है। चूंकि केसीसी तीन वर्ष के लिए मान्य होता है। ऐसे में कई किसान इसे रिन्यू नहीं कराते हैं। वर्तमान में करीब एक लाख लोगों के केसीसी मान्य होंगे। एलडीएम आरबी मौर्या ने बताया कि खरीफ फसल में 2496 किसान बीमा आच्छादित थे। रबी फसल में 7249 किसान ने फसल बीमा कराया है। जिले में बगैर केसीसी के किसी किसान ने फसल बीमा नहीं कराया है।

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