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Etawah News: बारिश से किसानों की सैकड़ों क्विंटल मक्का बर्बाद

Sun, 23 Jul 2023 12:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा Updated Sun, 23 Jul 2023 12:19 AM IST
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Hundreds of quintals of farmers' maize wasted due to rain
संवाद न्यूज एजेंसी
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बकेवर। लगातार हो रही बारिश जहां धान की फसल के लिए किसानों को लाभकारी है। वहीं जायद की फसल मक्का लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रही है। किसानों की मक्का की फसल हर रोज हो रही बारिश के कारण उठ नहीं पा रही है।

बारिश के कारण किसानों को उनकी मक्का की उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसान बारिश के चलते मक्का को सड़कों पर डालकर सुखाकर रखने के लिए परेशान है। खेतों में पानी भरा हुआ है। इसके कारण मक्का का कटना काफी महंगा किसानों को पड़ रहा है। जनपद में तकरीबन दो हजार हेक्टेयर में किसानों ने जायद की फसल के रूप में मक्का की फसल हुई थी, लेकिन इस साल शुरुआती दौर से ही बारिश शुरू हो जाने के कारण किसानों को अपनी मक्का की फसल उठाने में समस्या हो रही है। किसानों का कहना है कि मक्का खेतों से कटवा नहीं पा रहे है और जो कटवा रहे हैं। उस मक्का के खराब होने की स्थिति बन रही है। इसके कारणों से सुखाना पड़ रहा है मक्का सुखाने के लिए किसान चार-चार पांच-पांच दिन हाईवे के किनारे सर्विस रोड पर व अन्य संपर्क मार्गों पर डालकर उसे सुखा रहे हैं। कुछ अन्य मार्गों पर पक्के स्थान पर डालकर सुखाते हैं।
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दिनभर में कई बार बारिश आ जाने से किसानों को अचानक ही मक्का फैलाना वा उठाना पड़ रहा है। इसके कारण उन्हें काफी मजदूरी देनी पड़ रही है। ग्राम लुधियाना निवासी किसान विजय सिंह बताते हैं कि उनकी आठ बीघा मक्का उन्होंने साझे में की थी। इसको दो बार में उठाई मक्का कटवा कर गीली होने के कारण से सुखाने के लिए किसी पक्की जगह पर डाल रहे हैं। पानी आने के कारण बार-बार वह भींग जाती है। चार दिन से एक स्थान पर डेरा डालकर मक्का को सुखा रहे हैं।
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फोटो 09:::::भोले दिवाकर। संवाद



ग्राम कुड़रिया निवासी किसान भोले दिवाकर बताते हैं कि 10 बीघा मक्का की फसल की है। इसको सुखाने के बार बार खुली जगह में फैलाकर सुखाते हैं। बारिश ने समेटने पड़ती है। फिर फैलाते हैं। परिवार के साथ पांच दिन-रात उसी स्थान पर डेरा डाला है। मंडी बेचने ले गए तो 12 सौ रुपये के भाव बताया फिर बाद में गीली होने के चलते बिकी नहीं सुखाने लाए पंद्रह सौ रुपये भाड़ा के और खर्च हो गए।





फोटो 10::::::राजू शुक्ला। संवाद


ग्राम बसैयाहार निवासी राजीव शुक्ला बताते हैं कि उनकी दस बीघा मक्का की फसल थी। इसको कटवाने के बाद इधर उधर कहीं सड़क आदि पर डालकर सुखाया मंडी ले जाने पर आठ सौ रुपये क्विंटल का भाव बताते हैं। ऐसी स्थिति में मक्का की फसल में इस बार अधिक लागत के चलते नुकसान काफी हो रहा है।
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