{"_id":"5fc7d1d78ebc3e5fa3002451","slug":"health-etawah-etawah-news-etawha-news-knp5976316137","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार घंटे के ऑपरेशन के बाद ब्रेन से ट्यूमर निकाल दी जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार घंटे के ऑपरेशन के बाद ब्रेन से ट्यूमर निकाल दी जिंदगी
विज्ञापन
सैफई (इटावा)। मेडिकल यूनिवर्सिटी में चार घंटे की माइक्रो न्यूरो सर्जरी से युवक के ब्रेन से ट्यूमर निकाला गया है। ऑपरेशन करने वाले कुलपति न्यूरो डॉ. राजकुमार ने बताया कि मरीज अब स्वस्थ है और उसे जल्द छुट्टी दे दी जाएगी।
कुशीनगर के पदरी पिरापति निवासी दिग्विजय कुशवाहा (37) पिछले दो महीने से सिरदर्द एवं उल्टी की शिकायत से परेशान थे। जांच में पता चला कि उनके सिर में दायी तरफ सेरिबेलोपॉन्टाइन ट्यूमर है। इस कारण ब्रेन की नसों पर दबाव पड़ रहा है। मरीज को लखनऊ से सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय रेफर किया गया। डॉ. राजकुमार ने बताया कि यह ऑपरेशन बहुत ही जटिल होता है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान भी जा सकती है। डॉ. राजकुमार ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन के लिए उन्होंने माइक्रो न्यूरो तकनीक को चुना। 25 नवंबर को ऑपरेशन किया गया। चार घंटे के ऑपरेशन के बाद ट्यूमर बाहर निकाला गया।
प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव ने बताया कि इस तरह के जटिल ऑपरेशन देश के गिन-चुने न्यूरो सर्जन ही करते हैं। डॉ. राजकुमार के नेतृत्व में ऐसी सफल सर्जरी कई बार यहां की चुकी है। ऑपरेशन में डॉ. राजकुमार के साथ न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अहमद अंसारी, ऐनेस्थिसिया विभाग के डॉ. जय, डॉ. अतीक, डॉ. फहीम एवं डॉ. हनुमान भी शामिल रहे।
विज्ञापन
डॉ. राजकुमार ने बताया कि यह विशालकाय ट्यूमर स्कल बेस की नसों से शुरू होता है। फिर बढ़ता चला जाता है। ऑपरेशन को माइक्रोस्कोप एवं कई माइक्रो इंस्ट्रूमेंट्स की सहायता से किया गया। आपरेशन के दौरान ब्रेन स्टेम इंजरी, लंबे समय की बेहोशी, लकवा, दौरे एवं जान का खतरा होता है। उन्होंने बताया कि मरीज आपरेशन के बाद पूरी तरह स्वस्थ है तथा जल्दी ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
कुशीनगर के पदरी पिरापति निवासी दिग्विजय कुशवाहा (37) पिछले दो महीने से सिरदर्द एवं उल्टी की शिकायत से परेशान थे। जांच में पता चला कि उनके सिर में दायी तरफ सेरिबेलोपॉन्टाइन ट्यूमर है। इस कारण ब्रेन की नसों पर दबाव पड़ रहा है। मरीज को लखनऊ से सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय रेफर किया गया। डॉ. राजकुमार ने बताया कि यह ऑपरेशन बहुत ही जटिल होता है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान भी जा सकती है। डॉ. राजकुमार ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन के लिए उन्होंने माइक्रो न्यूरो तकनीक को चुना। 25 नवंबर को ऑपरेशन किया गया। चार घंटे के ऑपरेशन के बाद ट्यूमर बाहर निकाला गया।
विज्ञापन
प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव ने बताया कि इस तरह के जटिल ऑपरेशन देश के गिन-चुने न्यूरो सर्जन ही करते हैं। डॉ. राजकुमार के नेतृत्व में ऐसी सफल सर्जरी कई बार यहां की चुकी है। ऑपरेशन में डॉ. राजकुमार के साथ न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अहमद अंसारी, ऐनेस्थिसिया विभाग के डॉ. जय, डॉ. अतीक, डॉ. फहीम एवं डॉ. हनुमान भी शामिल रहे।
विज्ञापन
डॉ. राजकुमार ने बताया कि यह विशालकाय ट्यूमर स्कल बेस की नसों से शुरू होता है। फिर बढ़ता चला जाता है। ऑपरेशन को माइक्रोस्कोप एवं कई माइक्रो इंस्ट्रूमेंट्स की सहायता से किया गया। आपरेशन के दौरान ब्रेन स्टेम इंजरी, लंबे समय की बेहोशी, लकवा, दौरे एवं जान का खतरा होता है। उन्होंने बताया कि मरीज आपरेशन के बाद पूरी तरह स्वस्थ है तथा जल्दी ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।