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Etawah News: महंगे उर्वरक नहीं गोबर की खाद से खींच लाईं हरियाली
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फोटो 04 :: चना के खेत में खरपतवार को साफ करती महिला किसान। स्रोत-स्वयं
इटावा। खेती-किसानी में भी महिलाएं पुरुषों को पछाड़ रही हैं। जनपद के महेवा ब्लॉक के ग्राम आनेपुरा निवासी महिला किसान ममता देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर पारंपरिक ढर्रे से हटकर वैज्ञानिक और जैविक तरीके से खेती की जाए तो बंजर में भी हरियाली लाई जा सकती है। ममता देवी ने महंगे उर्वरकों के बजाय सिर्फ गोबर की खाद से ही अपने खेत को हरा-भरा कर रखा है। उनकी इस उपलब्धि के लिए जिलास्तर पर बाजरा पैदावार में प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है।
किसान ममता देवी ने बताया कि उन्होंने इस बार 10 बीघा खेत में बाजरे की फसल की थी। आमतौर पर किसान रसायनों और महंगे उर्वरकों पर भारी खर्च करते हैं लेकिन ममता ने कम लागत-अधिक मुनाफे का मंत्र अपनाया। उन्होंने ब्लॉक से बाजरे का बीज लिया और कृषि विभाग की देखरेख में रासायनिक खाद के बजाय पूरी तरह से गोबर की खाद का उपयोग किया।
इससे न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ी, बल्कि लागत में भी कमी आई। यानी 10 हजार के निवेश पर उन्हें 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ जो जिले के अन्य महिला किसानों के लिए एक मिसाल बन गया है। ममता देवी की सफलता केवल बाजरे तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष उन्होंने चना, खीरा और अन्य सब्जियों की खेती में भी बेहतर प्रबंधन दिखाकर बंपर पैदावार हासिल की थी।
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सरकार की ओर से मोटे अनाज के लिए लगातार किसानों को जागरूक किया जा रहा है। पुरुष किसानों के साथ ही महिला किसानों ने भी मोटे अनाज की खेती करनी शुरू कर दी है जो अच्छा प्रयास है। आनेपुरा की महिला किसान ने बाजरा की अच्छी पैदावार की है। इससे अन्य किसानों को भी सीखने की जरूरत है।
आरएन सिंह, उपकृषि निदेशक
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किसान ममता देवी ने बताया कि उन्होंने इस बार 10 बीघा खेत में बाजरे की फसल की थी। आमतौर पर किसान रसायनों और महंगे उर्वरकों पर भारी खर्च करते हैं लेकिन ममता ने कम लागत-अधिक मुनाफे का मंत्र अपनाया। उन्होंने ब्लॉक से बाजरे का बीज लिया और कृषि विभाग की देखरेख में रासायनिक खाद के बजाय पूरी तरह से गोबर की खाद का उपयोग किया।
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इससे न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ी, बल्कि लागत में भी कमी आई। यानी 10 हजार के निवेश पर उन्हें 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ जो जिले के अन्य महिला किसानों के लिए एक मिसाल बन गया है। ममता देवी की सफलता केवल बाजरे तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष उन्होंने चना, खीरा और अन्य सब्जियों की खेती में भी बेहतर प्रबंधन दिखाकर बंपर पैदावार हासिल की थी।
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सरकार की ओर से मोटे अनाज के लिए लगातार किसानों को जागरूक किया जा रहा है। पुरुष किसानों के साथ ही महिला किसानों ने भी मोटे अनाज की खेती करनी शुरू कर दी है जो अच्छा प्रयास है। आनेपुरा की महिला किसान ने बाजरा की अच्छी पैदावार की है। इससे अन्य किसानों को भी सीखने की जरूरत है।
आरएन सिंह, उपकृषि निदेशक