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इटावा में अपहरण के बाद हत्या के मामने में चार को अजीवन कारावास
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इटावा। आठ साल पहले युवक का अपहरण कर हत्या करने के मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों को दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषियों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भोगना पडे़गा।
विशेष लोक अभियोजक रमाकांत चतुर्वेदी ने बताया कि निवाड़ीखुर्द गांव के ब्रह्मदत्त ने 13 जून 2014 को बकेवर थाने में तहरीर दी थी। इसमें बताया कि बेटा हरविद उर्फ राजू 10 जून 2014 की शाम को खाना खाने के बाद घर से गांव के बाहर दुकान पर तंबाकू लेने गया था। वहां से राजू को गांव के संतोष तिवारी, प्रदीप, दीपेंद्र, किशन प्रताप सिंह, दिनेश और दीपेंद्र सिंह बोलेरो गाड़ी में डालकर ले गए। 14 जून को ब्रह्मदत्त को समाचारपत्रों के जरिये अछल्दा थाना (औरैया) क्षेत्र के गांव रूरूआ के पास युवक का शव मिलने की जानकारी हुई। मोर्चरी में जाकर उन्होंने शव की शिनाख्त बेटे राजू के रूप में की थी। पुलिस ने उक्त छह लोगों पर अपहरण, हत्या, शव गायब करने और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना में साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने दीपेंद्र और दीपेंद्र सिंह के नाम मुकदमे से हटा दिए। साक्ष्य मिलने पर दीपेंद्र सिंह उर्फ दीपू का नाम मुकदमे में शामिल कर लिया गया। पुलिस पांच आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश कुमार प्रशांत एससी-एसटी की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी दिनेश की मौत हो गई। कोर्ट ने संतोष, प्रदीप, किशन प्रताप सिंह व दीपेंद्र सिंह उर्फ दीपू को साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया। सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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विशेष लोक अभियोजक रमाकांत चतुर्वेदी ने बताया कि निवाड़ीखुर्द गांव के ब्रह्मदत्त ने 13 जून 2014 को बकेवर थाने में तहरीर दी थी। इसमें बताया कि बेटा हरविद उर्फ राजू 10 जून 2014 की शाम को खाना खाने के बाद घर से गांव के बाहर दुकान पर तंबाकू लेने गया था। वहां से राजू को गांव के संतोष तिवारी, प्रदीप, दीपेंद्र, किशन प्रताप सिंह, दिनेश और दीपेंद्र सिंह बोलेरो गाड़ी में डालकर ले गए। 14 जून को ब्रह्मदत्त को समाचारपत्रों के जरिये अछल्दा थाना (औरैया) क्षेत्र के गांव रूरूआ के पास युवक का शव मिलने की जानकारी हुई। मोर्चरी में जाकर उन्होंने शव की शिनाख्त बेटे राजू के रूप में की थी। पुलिस ने उक्त छह लोगों पर अपहरण, हत्या, शव गायब करने और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना में साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने दीपेंद्र और दीपेंद्र सिंह के नाम मुकदमे से हटा दिए। साक्ष्य मिलने पर दीपेंद्र सिंह उर्फ दीपू का नाम मुकदमे में शामिल कर लिया गया। पुलिस पांच आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश कुमार प्रशांत एससी-एसटी की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी दिनेश की मौत हो गई। कोर्ट ने संतोष, प्रदीप, किशन प्रताप सिंह व दीपेंद्र सिंह उर्फ दीपू को साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया। सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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