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कोहरे ने थामी ट्रेनों की चाल
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 11 Dec 2015 12:08 AM IST
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ठंड की दस्तक के साथ कोहरे के कहर ने ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दी है। ट्रेनें कोहरे से किस कदर प्रभावित हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को अधिक देरी के कारण गोमती एक्सप्रेस रद्द कर दी गई। शताब्दी समेत दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें 04 से 11 घंटे तक विलंब से चलीं।
ट्रेनों की लेट लतीफी से यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ट्रेन लेट होने पर कड़ाके की ठंड में यात्री रात प्लेटफार्म पर गुजार रहे हैं। रात की कई ट्रेनें सुबह तक भी न आने व गोमती एक्सप्रेस के रद्द कर दिए जाने से यात्रियों असमंजस की स्थिति में रहे कि वह अपनी यात्रा किस तरह से पूरी करें।
उधर बहुत से यात्री घंटों बाद भी ट्रेन आने की आस लगाए बैठे रहे। सुबह कानपुर से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस भी कोहरे की मार से नहीं बच सकी और चार घंटे देरी से दिल्ली के लिए रवाना हुई। वहीं स्वर्ण शताब्दी के पहियों को भी कोहरे ने जंग लगा दी और हमेशा समय से चलने वाली यह ट्रेन भी डेढ़ घंटे देरी से स्टेशन पर पहुंची।
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ट्रेनों की लेट लतीफी ने यात्रियों को रूलाकर रख दिया है। गुरुवार को इटावा रेलवे स्टेशन पर कोई भी ट्रेन अपने समय पर स्टेशन नहीं पहुंची। को चार घंटे देरी से चल रही थी तो कोई 11 घंटे। ऐसे में यात्रियों के सामने यह समस्या है कि वह आखिर ट्रेन का इंतजार कितनी देर तक करें।
कई यात्रियों के सामने स्थित यह आ पहुंचती है कि वह जिस समय तक ट्रेन से यात्रा कर घर वापस आने का प्रयास करता है तब तक वह अपनी यात्रा शुरू ही नहीं कर पाता। मजबूरन उन्हें बैरंग घर वापस लौटना पड़ रहा है।
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ट्रेनों की लेट लतीफी से यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ट्रेन लेट होने पर कड़ाके की ठंड में यात्री रात प्लेटफार्म पर गुजार रहे हैं। रात की कई ट्रेनें सुबह तक भी न आने व गोमती एक्सप्रेस के रद्द कर दिए जाने से यात्रियों असमंजस की स्थिति में रहे कि वह अपनी यात्रा किस तरह से पूरी करें।
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उधर बहुत से यात्री घंटों बाद भी ट्रेन आने की आस लगाए बैठे रहे। सुबह कानपुर से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस भी कोहरे की मार से नहीं बच सकी और चार घंटे देरी से दिल्ली के लिए रवाना हुई। वहीं स्वर्ण शताब्दी के पहियों को भी कोहरे ने जंग लगा दी और हमेशा समय से चलने वाली यह ट्रेन भी डेढ़ घंटे देरी से स्टेशन पर पहुंची।
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ट्रेनों की लेट लतीफी ने यात्रियों को रूलाकर रख दिया है। गुरुवार को इटावा रेलवे स्टेशन पर कोई भी ट्रेन अपने समय पर स्टेशन नहीं पहुंची। को चार घंटे देरी से चल रही थी तो कोई 11 घंटे। ऐसे में यात्रियों के सामने यह समस्या है कि वह आखिर ट्रेन का इंतजार कितनी देर तक करें।
कई यात्रियों के सामने स्थित यह आ पहुंचती है कि वह जिस समय तक ट्रेन से यात्रा कर घर वापस आने का प्रयास करता है तब तक वह अपनी यात्रा शुरू ही नहीं कर पाता। मजबूरन उन्हें बैरंग घर वापस लौटना पड़ रहा है।