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Etawah News: किसानों को बड़ी राहत... फिर जांची जाएगी मिट्टी की सेहत
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इटावा। तीन साल से बंद मृदा परीक्षण योजना फिर शुरू हो गई है। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मिट्टी की सेहत का हाल जानने के बाद किसान उर्वरकों का उपयोग करेंगे। योजना के तहत प्राथमिक तौर पर 16 गांवों को चिह्नित किया गया है।
सरकार की ओर से मिट्टी की जांच कराने की योजना कोराना काल में करीब तीन साल पहले बंद कर दी गई थी। इससे किसान बिना मृदा परीक्षण के ही फसलें उगा रहे थे। मिट्टी का हाल पता न होने से वह ज्यादा उर्वरकों का प्रयोग कर रहे थे। इससे उनकी जेब पर बोझ पड़ने के साथ ही फसलों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका रहती थी। विशेष परिस्थिति में किसान 12 तत्वों की जांच कराने के लिए 102 रुपये का भुगतान करते थे।
अब फिर सरकार ने मृदा परीक्षण योजना शुरू कर दी है। 16 गांवों से 13,384 नमूने लेकर जांच कराई जाएगी। नमूने लेने का काम शुरू भी कर दिया गया है। टीमें गांव में जा रही हैं।
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जिले की मिट्टी में जिंक की कमी
जिले की मिट्टी में जिंक (जस्ता) की कमी है। जिंक की आदर्श मात्रा 1.2 पीपीएम होती है। यह स्थिति पहले हुई जांचों में कहीं पर भी नहीं मिली थी। कई जगह .6 पीपीएम तक मात्रा पाई गई थी। जिंक की कमी से पौधे की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। .8 पीपीएम से ऊपर जिंक की मात्रा होने पर मृदा स्वस्थ मानी जाती है।
सरकार ने फिर से योजना शुरू कर दी है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। अभी गांवों की संख्या कम है। आगे योजना के तहत गांवों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। - आरएन सिंह, उपनिदेशक, कृषि
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सरकार की ओर से मिट्टी की जांच कराने की योजना कोराना काल में करीब तीन साल पहले बंद कर दी गई थी। इससे किसान बिना मृदा परीक्षण के ही फसलें उगा रहे थे। मिट्टी का हाल पता न होने से वह ज्यादा उर्वरकों का प्रयोग कर रहे थे। इससे उनकी जेब पर बोझ पड़ने के साथ ही फसलों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका रहती थी। विशेष परिस्थिति में किसान 12 तत्वों की जांच कराने के लिए 102 रुपये का भुगतान करते थे।
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अब फिर सरकार ने मृदा परीक्षण योजना शुरू कर दी है। 16 गांवों से 13,384 नमूने लेकर जांच कराई जाएगी। नमूने लेने का काम शुरू भी कर दिया गया है। टीमें गांव में जा रही हैं।
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जिले की मिट्टी में जिंक की कमी
जिले की मिट्टी में जिंक (जस्ता) की कमी है। जिंक की आदर्श मात्रा 1.2 पीपीएम होती है। यह स्थिति पहले हुई जांचों में कहीं पर भी नहीं मिली थी। कई जगह .6 पीपीएम तक मात्रा पाई गई थी। जिंक की कमी से पौधे की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। .8 पीपीएम से ऊपर जिंक की मात्रा होने पर मृदा स्वस्थ मानी जाती है।
सरकार ने फिर से योजना शुरू कर दी है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। अभी गांवों की संख्या कम है। आगे योजना के तहत गांवों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। - आरएन सिंह, उपनिदेशक, कृषि