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जनक विलाप देख नम हुईं आंखें
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Sun, 18 Oct 2015 12:03 AM IST
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श्री रामलीला समिति नई मंडी के तत्वावधान में नवीन मंडी परिसर में चल रहे रामलीला के मंचन में धनुष भंग की लीला का मंचन किया गया। धनुष भंग से पूर्व राजा जनक द्वारा किए गए विलाप को देख उपस्थित दर्शकों की आंखें भी नम हो आई।
रामलीला मंचन का शुभारंभ जेके हॉस्पीटल के निदेशक डा. मनोज यादव ने भगवान राम की आरती उतारकर किया। लीला मंचन में विश्वामित्र के आदेशानुसार राम लक्ष्मण ने संध्या वंदन किया। इसके बाद रावण बाणासुर संवाद हुआ। जब सीता स्वयंवर में कोई भी राजा शिवजी के धनुष केे हिला भी नहीं सका तो राजा जनक दुखी हो उठे।
जनक ने वीर विहीन नहीं मैं जानी कहकर जिस तरीके से विलाप किया उसे देखकर दर्शकों की आंखे नम हो आई। हालांकि जनक की बात सुनकर लक्ष्मण को क्रोध आ गया। विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम ने धनुष भंग किया।
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धनुष के भंग होने की आवाज सुनकर क्रोधित परशुराम प्रकट हुए और उनका लक्ष्मण से पूरी रात तक संवाद चला जिसे देख दर्शक भाव विभोर हो उठे।
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रामलीला मंचन का शुभारंभ जेके हॉस्पीटल के निदेशक डा. मनोज यादव ने भगवान राम की आरती उतारकर किया। लीला मंचन में विश्वामित्र के आदेशानुसार राम लक्ष्मण ने संध्या वंदन किया। इसके बाद रावण बाणासुर संवाद हुआ। जब सीता स्वयंवर में कोई भी राजा शिवजी के धनुष केे हिला भी नहीं सका तो राजा जनक दुखी हो उठे।
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जनक ने वीर विहीन नहीं मैं जानी कहकर जिस तरीके से विलाप किया उसे देखकर दर्शकों की आंखे नम हो आई। हालांकि जनक की बात सुनकर लक्ष्मण को क्रोध आ गया। विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम ने धनुष भंग किया।
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धनुष के भंग होने की आवाज सुनकर क्रोधित परशुराम प्रकट हुए और उनका लक्ष्मण से पूरी रात तक संवाद चला जिसे देख दर्शक भाव विभोर हो उठे।