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हाईस्कूल की परीक्षाएं रद्द, 4134 छात्र बिना परीक्षा के होंगे पास
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ोटो संख्या 36- कैलाश यादव
- फोटो : ETAWHA
इटावा। कोरोना ने हाईस्कूल की परीक्षाओं को डस ही लिया। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सीबीएसई ने वर्ष 2021 की हाईस्कूल की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को फिलहाल आगे बढ़ा दिया है। साल भर से परीक्षा की तैयारियों में लगे छात्र-छात्राओं को इस फैसले से थोड़ी निराशा और आशंका जरूर हुई है।
हाईस्कूल की परीक्षाओं को तो रद्द कर दिया गया, परंतु इस फैसले से प्रभावित छात्र-छात्राओं को नंबर किस आधार पर दिए जाएंगे इसको लेकर संशय बना हुआ है। छात्रों का कहना है कि अंकों का निर्धारण सही तरीके से किया जाना चाहिए। कुछ प्रधानाचार्य इस फैसले से सहमत नजर आए, जबकि कुछ प्रधानाचार्य असहमत हैं।
जिले में सीबीएसई से संबद्ध लगभग 34 विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में हाईस्कूल में 4134 और इंटरमीडिएट में 3032 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल होने वाले थे। इस फैसले सबसे ज्यादा असर हाईस्कूल के 4134 छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। इन छात्रों को बगैर परीक्षा में शामिल किए ही पास किया जाएगा।
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वहीं इंटर की परीक्षाएं अब मई से आगे बढ़ाई जाएंगी। सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर और संत विवेकानंद आवासीय स्कूल के निदेशक डॉ. आनंद ने बताया कि छात्र-छात्राओं के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार ने स्वागत योग्य कदम उठाया है। कोविड का संक्रमण जिस तरीके से फैल रहा है। उसको देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। बच्चे घर पर ही रहकर पढ़ाई करें और सुरक्षित रहें।
थियोसोफिकल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनूप मिश्रा ने कहा कि सीबीएसई ने कक्षा 10 की परीक्षा निरस्त करने के स्थान पर कक्षा 12 की परीक्षा की तरह आगे बढ़ाना उचित रहता। बिना परीक्षा के छात्र-छात्राओं को विद्यालयों के आंतरिक/प्री-बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर उन्हें उत्तीर्ण करने में पारदर्शिता नहीं रहेगी। छात्र-छात्राओं की प्रतिभा का सही मूल्यांकन भी नहीं हो पाएगा। छात्र-छात्राओ के साथ न्याय भी नहीं हो पाएगा।
पान कुंवर इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक कैलाश चंद्र यादव ने कहा कि छात्रों में बोर्ड परीक्षा को न दे पाने की निराशा है। वहीं वर्ष भर विद्यालय की परीक्षाओं के आधार पर प्रोन्नति पाने का अवसर भी प्राप्त होगा। परीक्षार्थी अपनी तैयारी परीक्षा को पास करने के हिसाब से न करते हुए विषय के ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनवरत जारी रखें ।
थियोसोफिकल कॉलेज के कक्षा 10 के छात्र प्रिंस का कहना है कि पहली बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अनुभव अलग ही होता है, लेकिन केंद्र सरकार ने हाईस्कूल की परीक्षाएं रद्द कर दीं। इससे उन्हें निराशा हुई है।
कक्षा 10 की छात्रा स्वप्निल ने कहा कि जब चुनाव हो सकते हैं तो विद्यालय क्यों नहीं खुल सकते। सरकार परीक्षाओं को आगे बढ़ा देती तो यह ज्यादा अच्छा होता। सरकार का कदम उचित नहीं है।
सेंट मेरी के छात्र संस्कार का कहना है कि परीक्षाएं निरस्त करना ठीक है, लेकिन छात्रों के अंकों का निर्धारण सही ढंग से होना चाहिए। इसी कालेज के छात्र अमन किंद्रा का कहना है कि बोर्ड परीक्षा न दे पाने का मलाल तो रहेगा ही। अब अंकों को लेकर स्पष्ट नीति बनानी होगी।
संत विवेकानंद कालेज के कक्षा 12 के छात्र शुभम नेगी ने कहा कि परीक्षाएं आगे बढ़ने से छात्रों को अपनी तैयारी का एक और मौका मिल रहा है। अभी जो कमियां रह गई है उनमें सुधार करने का पर्याप्त अवसर है। यह कदम ठीक ही है।
इसी कालेज के यालिम सरगम हेराल्ड का कहना है कि कोविड के बढ़ते संक्रमण को लेकर परीक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा था। ऐसी स्थिति में सरकार का कदम सही है।
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हाईस्कूल की परीक्षाओं को तो रद्द कर दिया गया, परंतु इस फैसले से प्रभावित छात्र-छात्राओं को नंबर किस आधार पर दिए जाएंगे इसको लेकर संशय बना हुआ है। छात्रों का कहना है कि अंकों का निर्धारण सही तरीके से किया जाना चाहिए। कुछ प्रधानाचार्य इस फैसले से सहमत नजर आए, जबकि कुछ प्रधानाचार्य असहमत हैं।
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जिले में सीबीएसई से संबद्ध लगभग 34 विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में हाईस्कूल में 4134 और इंटरमीडिएट में 3032 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल होने वाले थे। इस फैसले सबसे ज्यादा असर हाईस्कूल के 4134 छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। इन छात्रों को बगैर परीक्षा में शामिल किए ही पास किया जाएगा।
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वहीं इंटर की परीक्षाएं अब मई से आगे बढ़ाई जाएंगी। सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर और संत विवेकानंद आवासीय स्कूल के निदेशक डॉ. आनंद ने बताया कि छात्र-छात्राओं के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार ने स्वागत योग्य कदम उठाया है। कोविड का संक्रमण जिस तरीके से फैल रहा है। उसको देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। बच्चे घर पर ही रहकर पढ़ाई करें और सुरक्षित रहें।
थियोसोफिकल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनूप मिश्रा ने कहा कि सीबीएसई ने कक्षा 10 की परीक्षा निरस्त करने के स्थान पर कक्षा 12 की परीक्षा की तरह आगे बढ़ाना उचित रहता। बिना परीक्षा के छात्र-छात्राओं को विद्यालयों के आंतरिक/प्री-बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर उन्हें उत्तीर्ण करने में पारदर्शिता नहीं रहेगी। छात्र-छात्राओं की प्रतिभा का सही मूल्यांकन भी नहीं हो पाएगा। छात्र-छात्राओ के साथ न्याय भी नहीं हो पाएगा।
पान कुंवर इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक कैलाश चंद्र यादव ने कहा कि छात्रों में बोर्ड परीक्षा को न दे पाने की निराशा है। वहीं वर्ष भर विद्यालय की परीक्षाओं के आधार पर प्रोन्नति पाने का अवसर भी प्राप्त होगा। परीक्षार्थी अपनी तैयारी परीक्षा को पास करने के हिसाब से न करते हुए विषय के ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनवरत जारी रखें ।
थियोसोफिकल कॉलेज के कक्षा 10 के छात्र प्रिंस का कहना है कि पहली बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अनुभव अलग ही होता है, लेकिन केंद्र सरकार ने हाईस्कूल की परीक्षाएं रद्द कर दीं। इससे उन्हें निराशा हुई है।
कक्षा 10 की छात्रा स्वप्निल ने कहा कि जब चुनाव हो सकते हैं तो विद्यालय क्यों नहीं खुल सकते। सरकार परीक्षाओं को आगे बढ़ा देती तो यह ज्यादा अच्छा होता। सरकार का कदम उचित नहीं है।
सेंट मेरी के छात्र संस्कार का कहना है कि परीक्षाएं निरस्त करना ठीक है, लेकिन छात्रों के अंकों का निर्धारण सही ढंग से होना चाहिए। इसी कालेज के छात्र अमन किंद्रा का कहना है कि बोर्ड परीक्षा न दे पाने का मलाल तो रहेगा ही। अब अंकों को लेकर स्पष्ट नीति बनानी होगी।
संत विवेकानंद कालेज के कक्षा 12 के छात्र शुभम नेगी ने कहा कि परीक्षाएं आगे बढ़ने से छात्रों को अपनी तैयारी का एक और मौका मिल रहा है। अभी जो कमियां रह गई है उनमें सुधार करने का पर्याप्त अवसर है। यह कदम ठीक ही है।
इसी कालेज के यालिम सरगम हेराल्ड का कहना है कि कोविड के बढ़ते संक्रमण को लेकर परीक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा था। ऐसी स्थिति में सरकार का कदम सही है।

फोटो संख्या 37- अनूप मिश्रा- फोटो : ETAWHA

फोटो संख्या 38-प्रिंस- फोटो : ETAWHA

फोटो संख्या 39- स्वप्निल- फोटो : ETAWHA