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इटावा पर नहीं हुई ‘प्रभु’ की कृपा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:39 AM IST
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु के बजट में जिले के बाशिंदों के हाथ कुछ नहीं लगा। ‘प्रभु’ के दरबार से झोली खाली रहने से लोग मायूस हुए। गुरुवार को सुबह जैसे ही सदन में बजट पेश करने की कार्यवाई शुरू हुई, लोग घरों में टीवी से चिपक कर बैठ गए।
सभी को टकटकी लगाए थे कि अबकी रेल बजट में उनके जिले की रेलवे से जुड़ी समस्याएं जरूर सुलटेगी। लेकिन पूरा बजट सुनने पर कहीं भी इटावा का नाम न आने से जिले के लोग निराश दिखाई दिए। वहीं स्टेशन के कुलियों ने भी बजट में उनकी उपेक्षा किए जाने की बात कही है।
रेल मंत्री के बजट से अगर कोई खुश है तो वह महिलाएं और बुजुर्ग, जिनके लिए ट्रेन में कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। वहीं बजट में किसी प्रकार का यात्रा किराया न बढ़ाए जाने से लोगों को कुछ राहत मिली है और जनपद को कुछ न मिलने से मिले जख्मों पर मलहम लगा है।
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रेल बजट में इटावा जंक्सन के विकास के लिए कोई योजना न मिलने से लोग मान रहे हैं कि अब लाइनपार क्षेत्र में टिकट विंडो व अन्य सुविधाएं दूर की कौड़ी हो चुकी हैं। इसी प्रकार से रामनगर फाटक का अंडर ब्रिज और फर्रूखाबाद फाटक का ओवरब्रिज भी लोगों के लिए सपना बन चुका है।
रेल बजट को जहां भाजपाई बुनियादी और जनता का बजट बता रहे हैं तो वहीं सपा इसको निराशाजनक बजट बता रही है। वहीं कांग्रेस ने सुरेश प्रभु के बजट को शब्दों के जाल का भ्रमित करने वाला बजट बताया है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव का कहना है कि रेलमंत्री का रेल बजट सिर्फ वादों का पिटारा है आगे 2020 तक रेल के अच्छे दिन आने की बात कहकर रेल मंत्री ने सिर्फ अपना राजनैतिक रास्ता साफ कर लिया है।
सबका साथ सबका विकास नारा पूरी तरह से खोखला साबित हुआ है और कारपोरेट घरानों को विकास होता दिखाई दे रहा है। सपा जिलाध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री अशोक यादव का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार के रेल बजट से जनता को सिर्फ निराशा ही मिली है।
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सभी को टकटकी लगाए थे कि अबकी रेल बजट में उनके जिले की रेलवे से जुड़ी समस्याएं जरूर सुलटेगी। लेकिन पूरा बजट सुनने पर कहीं भी इटावा का नाम न आने से जिले के लोग निराश दिखाई दिए। वहीं स्टेशन के कुलियों ने भी बजट में उनकी उपेक्षा किए जाने की बात कही है।
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रेल मंत्री के बजट से अगर कोई खुश है तो वह महिलाएं और बुजुर्ग, जिनके लिए ट्रेन में कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। वहीं बजट में किसी प्रकार का यात्रा किराया न बढ़ाए जाने से लोगों को कुछ राहत मिली है और जनपद को कुछ न मिलने से मिले जख्मों पर मलहम लगा है।
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रेल बजट में इटावा जंक्सन के विकास के लिए कोई योजना न मिलने से लोग मान रहे हैं कि अब लाइनपार क्षेत्र में टिकट विंडो व अन्य सुविधाएं दूर की कौड़ी हो चुकी हैं। इसी प्रकार से रामनगर फाटक का अंडर ब्रिज और फर्रूखाबाद फाटक का ओवरब्रिज भी लोगों के लिए सपना बन चुका है।
रेल बजट को जहां भाजपाई बुनियादी और जनता का बजट बता रहे हैं तो वहीं सपा इसको निराशाजनक बजट बता रही है। वहीं कांग्रेस ने सुरेश प्रभु के बजट को शब्दों के जाल का भ्रमित करने वाला बजट बताया है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव का कहना है कि रेलमंत्री का रेल बजट सिर्फ वादों का पिटारा है आगे 2020 तक रेल के अच्छे दिन आने की बात कहकर रेल मंत्री ने सिर्फ अपना राजनैतिक रास्ता साफ कर लिया है।
सबका साथ सबका विकास नारा पूरी तरह से खोखला साबित हुआ है और कारपोरेट घरानों को विकास होता दिखाई दे रहा है। सपा जिलाध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री अशोक यादव का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार के रेल बजट से जनता को सिर्फ निराशा ही मिली है।