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अब निजी एंबुलेंस वाले नहीं वसूल पाएंगे मनमाना किया
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इटावा। अब निजी एंबुलेंस संचालक कोरोना संक्रमित मरीजों से मनमाना किराया नहीं वसूल पाएंगे। अब इन मरीजों को लाने-ले जाने के लिए परिवहन विभाग ने शुल्क तय कर दिया है। इसके तहत टाइप टू रोड एंबुलेंस के पहले 10 किलोमीटर के लिए एक हजार रुपये किराया तय किया गया है।
कोरोना काल में निजी एंबुलेंस के चालकों ने तीमारदारों से मनमाना किराया वसूल किया था। इसकी शिकायतें प्रशासन से प्रदेश सरकार तक पहुंचीं। इस पर शासन ने एंबुलेंस चालकों की मनमानी रोकने का फैसला लिया। एआरटीओ बृजेश कुमार ने बताया कि मोटरयान अधिनियम के तहत एंबुलेंस को परमिट की आवश्यकता से मुक्त रखा गया है। ऐसे में एंबुलेंस के परमिट जारी नहीं किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश मोटरयान कराधान नियमावली के तहत एंबुलेंस को कर से मुक्त रखा गया है। इससे साफ है कि एंबुलेंस का प्रयोग व्यावसायिक न होकर अन्य रूप से मरीज या घायल के परिवहन के लिए किया जाता है। यह एक तरह की समाजसेवा है।
एंबुलेंस की किराये की दरों पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर अधिसूचना जारी की जाती है। वर्तमान कोरोना महामारी के समय लोगों को उचित दरों पर एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए प्रदेश के प्रमुख सचिव (परिवहन प्राधिकरण) राजेश कुमार सिंह ने निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अलग-अलग तरह की एंबुलेंस का किराया तय किया गया है।
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एंबुलेंस का प्रकार व निर्धारित किराया दरें
टाइप-ए रोड एंबुलेंस मेडिकल फर्स्ट रिस्पांडर
- प्रथम 10 किलोमीटर के लिए 500 रुपये। 10 किलोमीटर के बाद 10 रुपये प्रति किलोमीटर
टाइप-टू रोड एंबुलेंस पेशेंट ट्रांसपोर्ट एंबुलेंस मारुति ओमनी, टाटा मैजिक, मारुति ईको आदि
- प्रथम 10 किलोमीटर के लिए 1000 रुपये व 10 किलोमीटर के बाद प्रति किलोमीटर 20 रुपये
टाइप-थ्री रोड एंबुलेंस बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस
पहले 10 किलोमीटर के लिए 1500 रुपये निर्धारित किया गया है।
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कोरोना काल में निजी एंबुलेंस के चालकों ने तीमारदारों से मनमाना किराया वसूल किया था। इसकी शिकायतें प्रशासन से प्रदेश सरकार तक पहुंचीं। इस पर शासन ने एंबुलेंस चालकों की मनमानी रोकने का फैसला लिया। एआरटीओ बृजेश कुमार ने बताया कि मोटरयान अधिनियम के तहत एंबुलेंस को परमिट की आवश्यकता से मुक्त रखा गया है। ऐसे में एंबुलेंस के परमिट जारी नहीं किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश मोटरयान कराधान नियमावली के तहत एंबुलेंस को कर से मुक्त रखा गया है। इससे साफ है कि एंबुलेंस का प्रयोग व्यावसायिक न होकर अन्य रूप से मरीज या घायल के परिवहन के लिए किया जाता है। यह एक तरह की समाजसेवा है।
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एंबुलेंस की किराये की दरों पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर अधिसूचना जारी की जाती है। वर्तमान कोरोना महामारी के समय लोगों को उचित दरों पर एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए प्रदेश के प्रमुख सचिव (परिवहन प्राधिकरण) राजेश कुमार सिंह ने निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अलग-अलग तरह की एंबुलेंस का किराया तय किया गया है।
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टाइप-ए रोड एंबुलेंस मेडिकल फर्स्ट रिस्पांडर
- प्रथम 10 किलोमीटर के लिए 500 रुपये। 10 किलोमीटर के बाद 10 रुपये प्रति किलोमीटर
टाइप-टू रोड एंबुलेंस पेशेंट ट्रांसपोर्ट एंबुलेंस मारुति ओमनी, टाटा मैजिक, मारुति ईको आदि
- प्रथम 10 किलोमीटर के लिए 1000 रुपये व 10 किलोमीटर के बाद प्रति किलोमीटर 20 रुपये
टाइप-थ्री रोड एंबुलेंस बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस
पहले 10 किलोमीटर के लिए 1500 रुपये निर्धारित किया गया है।