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जनसेवा केंद्र कैसे खुले, आईडी मिल गई पर पासवर्ड नहीं मिला
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इटावा। जिले में ई गवर्नेंस की महत्वपूर्ण सरकारी योजना तकनीकी खामी की भेंट चढ़ती जा रही है।
नवंबर में प्रदेेश सरकार ने ई डिस्ट्रिक परियोजना 3.0 लागू की थी। इसके अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पंचायत और वार्डवार दो-दो जनसेवा केंद्र संचालित किए जाने हैं। अभी एक-एक है। जिले में 471 ग्राम पंचायतें तथा नगर निकायों के 124 वार्ड हैं। दो-दो केंद्रों के हिसाब से कुल 1190 जनसेवा केंद्र संचालित किए जाने हैं। इनमें पूर्व से चल रहे 595 जनसेवा केंद्रों का नवीनीकरण और इतने ही नए केंद्र खोले जाने थे। राज्य सरकार ने
सीएमएस और सीएससी ई गवर्नेंस को सेवा प्रदाता कंपनी नियुक्त किया है। इसमें से सीएमएस ने अपने पुराने केंद्रों को नवीनीकृत कर दिया है। नए केंद्र सीएससी के खुलने हैं। नवंबर से अब तक 80 केंद्रों को ही अनुमोदन मिल सका है। परंतु अभी तक कई केंद्र शुरू नहीं हो सके हैं। जनसेवा केंद्रों की आईडी तो आ चुकी है लेकिन पासवर्ड नहीं आया है। ऐसे में बाकी स्थानों पर जनसेवा केंद्रों के शुरू होने में अभी वक्त लगेगा।
क्या है प्रक्रिया
जनसेवा केंद्र खोलने के लिए आनलाइन आवेदन करना होता है। दस्तावेज जमा करने पर लेखपाल से सत्यापन होता है। सत्यापन के बाद सेवा प्रदाता कंपनी जनसेवा केंद्र के संचालक को एक आईडी और पासवर्ड जारी करती है।
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बोले आवेदक
हैंवरा निवासी राजीव यादव ने बताया कि नवंबर के महीने में उनकी आईडी जारी हो गई परंतु अभी तक पासवर्ड का इंतजार कर रहे हैं। कई बार संपर्क किया परंतु पासवर्ड अभी तक नहीं मिला। शहर के मोहल्ला अकालगंज निवासी शिवा का कहना है कि पासवर्ड न आने से वह काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कंप्यूटर सहित पूरा सेटअप लगा लिया है। आईडी तो आ गई पर पासवर्ड नहीं मिला है।
जिम्मेदार बोले
ई-डिस्ट्रिक मैनेजर अजय प्रताप सिंह का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया में समय लग जाता है। रही बात आईडी पासवर्ड की तो नई सेवा प्रदाता कंपनी में कुछ तकनीकी दिक्कत है। कंपनी के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करा दिया गया है।
जनसेवा केंद्र में ये काम होते हैं
आय, जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए जनसेवा केंद्रों के माध्यम से आवेदन करना होता है। इसका उद्देश्य है कि ग्रामीण जनता को हर काम के लिए जिला या तहसील मुख्यालय के चक्कर ने काटने पड़ें। राज्य सरकार की कुल 104 योजनाओं का लाभ जनसेवा केंद्रों के माध्यम से दिया जाता है।
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नवंबर में प्रदेेश सरकार ने ई डिस्ट्रिक परियोजना 3.0 लागू की थी। इसके अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पंचायत और वार्डवार दो-दो जनसेवा केंद्र संचालित किए जाने हैं। अभी एक-एक है। जिले में 471 ग्राम पंचायतें तथा नगर निकायों के 124 वार्ड हैं। दो-दो केंद्रों के हिसाब से कुल 1190 जनसेवा केंद्र संचालित किए जाने हैं। इनमें पूर्व से चल रहे 595 जनसेवा केंद्रों का नवीनीकरण और इतने ही नए केंद्र खोले जाने थे। राज्य सरकार ने
सीएमएस और सीएससी ई गवर्नेंस को सेवा प्रदाता कंपनी नियुक्त किया है। इसमें से सीएमएस ने अपने पुराने केंद्रों को नवीनीकृत कर दिया है। नए केंद्र सीएससी के खुलने हैं। नवंबर से अब तक 80 केंद्रों को ही अनुमोदन मिल सका है। परंतु अभी तक कई केंद्र शुरू नहीं हो सके हैं। जनसेवा केंद्रों की आईडी तो आ चुकी है लेकिन पासवर्ड नहीं आया है। ऐसे में बाकी स्थानों पर जनसेवा केंद्रों के शुरू होने में अभी वक्त लगेगा।
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क्या है प्रक्रिया
जनसेवा केंद्र खोलने के लिए आनलाइन आवेदन करना होता है। दस्तावेज जमा करने पर लेखपाल से सत्यापन होता है। सत्यापन के बाद सेवा प्रदाता कंपनी जनसेवा केंद्र के संचालक को एक आईडी और पासवर्ड जारी करती है।
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बोले आवेदक
हैंवरा निवासी राजीव यादव ने बताया कि नवंबर के महीने में उनकी आईडी जारी हो गई परंतु अभी तक पासवर्ड का इंतजार कर रहे हैं। कई बार संपर्क किया परंतु पासवर्ड अभी तक नहीं मिला। शहर के मोहल्ला अकालगंज निवासी शिवा का कहना है कि पासवर्ड न आने से वह काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कंप्यूटर सहित पूरा सेटअप लगा लिया है। आईडी तो आ गई पर पासवर्ड नहीं मिला है।
जिम्मेदार बोले
ई-डिस्ट्रिक मैनेजर अजय प्रताप सिंह का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया में समय लग जाता है। रही बात आईडी पासवर्ड की तो नई सेवा प्रदाता कंपनी में कुछ तकनीकी दिक्कत है। कंपनी के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करा दिया गया है।
जनसेवा केंद्र में ये काम होते हैं
आय, जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए जनसेवा केंद्रों के माध्यम से आवेदन करना होता है। इसका उद्देश्य है कि ग्रामीण जनता को हर काम के लिए जिला या तहसील मुख्यालय के चक्कर ने काटने पड़ें। राज्य सरकार की कुल 104 योजनाओं का लाभ जनसेवा केंद्रों के माध्यम से दिया जाता है।