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गजरथ यात्रा से हुआ पंचकल्याणक महोत्सव का समापन
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इटावा। गणाचार्य विराग सागर महाराज, आचार्य प्रमुख सागर महाराज एवं मेडिटेशन गुरु मुनि विहसंत सागर महाराज की प्रेरणा से आयोजित हुए पंचकल्याणक महोत्सव का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन सुबह मोक्ष कल्याणक की क्रिया विधि व दोपहर में गजरथ फेरी शुरू हुई।
हाथी पर सवार इंद्रगण जैन ध्वज पताका लेकर चल रहे थे। विशेष रथ पर श्रीजी को लिए सौधर्म इंद्र तरुण जैन सवार थे। अनूप जैन व अभिषेक जैन श्रीजी को लेकर चल रहे थे। अयोध्या नगरी की परिक्रमा करने के बाद गणाचार्य विराग सागर, आचार्य प्रमुख सागर, मुनि विहसंत सागर समेत समस्त साधुगण गाजे-बाजे के साथ लालपुरा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने के साथ ही महामहोत्सव का समापन हो गया। गजरथ यात्रा पंचकल्याणक महामहोत्सव की आन-बान शान माना जाता है।
महामहोत्सव की अंतिम बेला पर गणाचार्य विराग सागर महाराज ने कहा समवशरण में जिनेंद्र प्रभु की दिव्यध्वनि उनकी आयु 84 लाख वर्ष पूर्व के लगभग एक माह शेष रहने तक अनवरत भव्य जीवों के कल्याण के लिए रही। भगवान ऋषदेव कैलाश पर्वत जिसे हम अष्टापद के नाम से भी जानते हैं, उस पर्वत पर भगवान योग शुरू कर देते हैं। संयोग केवली अवस्था में भगवान जीव विपाकी, पुदगल विपाकी, क्षेत्र विपाकी व भव विपाकी इन चार कर्मों की 63 प्रकृति का क्षय करते हैं। इस प्रकार भगवान को निर्वाण मोक्ष प्राप्ति के बाद सारी सभा में मोक्ष कल्याणक की अपार खुशियों का माहौल छा गया।
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प्रमुख सागर का मनाया आचार्य पदारोहण दिवस
सोमवार को इटावा गौरव आचार्य प्रमुख सागर महाराज का द्वितीय आचार्य पदारोहण महोत्सव मनाया गया। क्षुल्लिका प्रीती श्री एवं क्षुल्लिका परीक्षा श्री माता ने आचार्यों की मंगलमय गुरु पूजन कराई। आचार्यों का पाद प्रक्षालन का सौभाग्य श्री नवग्रह दिगंबर जैन मंदिर समिति कुनैरा को व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य मेडिकल संचालक को प्राप्त हुआ। आचार्य प्रमुख सागर ने सभी भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
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हाथी पर सवार इंद्रगण जैन ध्वज पताका लेकर चल रहे थे। विशेष रथ पर श्रीजी को लिए सौधर्म इंद्र तरुण जैन सवार थे। अनूप जैन व अभिषेक जैन श्रीजी को लेकर चल रहे थे। अयोध्या नगरी की परिक्रमा करने के बाद गणाचार्य विराग सागर, आचार्य प्रमुख सागर, मुनि विहसंत सागर समेत समस्त साधुगण गाजे-बाजे के साथ लालपुरा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने के साथ ही महामहोत्सव का समापन हो गया। गजरथ यात्रा पंचकल्याणक महामहोत्सव की आन-बान शान माना जाता है।
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महामहोत्सव की अंतिम बेला पर गणाचार्य विराग सागर महाराज ने कहा समवशरण में जिनेंद्र प्रभु की दिव्यध्वनि उनकी आयु 84 लाख वर्ष पूर्व के लगभग एक माह शेष रहने तक अनवरत भव्य जीवों के कल्याण के लिए रही। भगवान ऋषदेव कैलाश पर्वत जिसे हम अष्टापद के नाम से भी जानते हैं, उस पर्वत पर भगवान योग शुरू कर देते हैं। संयोग केवली अवस्था में भगवान जीव विपाकी, पुदगल विपाकी, क्षेत्र विपाकी व भव विपाकी इन चार कर्मों की 63 प्रकृति का क्षय करते हैं। इस प्रकार भगवान को निर्वाण मोक्ष प्राप्ति के बाद सारी सभा में मोक्ष कल्याणक की अपार खुशियों का माहौल छा गया।
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प्रमुख सागर का मनाया आचार्य पदारोहण दिवस
सोमवार को इटावा गौरव आचार्य प्रमुख सागर महाराज का द्वितीय आचार्य पदारोहण महोत्सव मनाया गया। क्षुल्लिका प्रीती श्री एवं क्षुल्लिका परीक्षा श्री माता ने आचार्यों की मंगलमय गुरु पूजन कराई। आचार्यों का पाद प्रक्षालन का सौभाग्य श्री नवग्रह दिगंबर जैन मंदिर समिति कुनैरा को व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य मेडिकल संचालक को प्राप्त हुआ। आचार्य प्रमुख सागर ने सभी भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।