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पराली को जलायें नहीं, गोशाला पहुंचाने पर मिलेगा भाड़ा
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उरैंग में किसान गोष्ठी को संबोधित करते जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह
- फोटो : ETAWAH
बकेवर। महेवा ब्लाक की ग्राम पंचायत उरैंग में जिला कृषि अधिकारी ने शनिवार को क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ बैठक कर पराली न जलाने की कसम दिलाई। किसानों को धान के अवशेष को खेत में ही नष्ट करने की सलाह दी।
शनिवार को न्याय पंचायत उरैंग में कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने कई गांवों के किसानों के साथ गोष्ठी की। जिसमें कहा कि किसान धान की पराली अवशेष को किसी भी कीमत पर खेत में न जलाएं।
कृषि यंत्रों के साथ पराली का कैसे प्रबंधन करना है इस बात पर भी उन्होंने जानकारी दी। किसानों से कहा कि जो किसान धान की फसल हार्वेस्टर से कटवाते हैं।
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वह यह सुनिश्चित कर लें कि उस हार्वेस्टर में एसएमएस मशीन जरूर लगी हो। बिना एसएमएस लगे हार्वेस्टर से धान न कटवाएं। इसके अलावा अगर कोई किसान अपनी धान के अवशेष को पराली को गोशाला तक पहुंचाता है तो उसे लदान पारिश्रमिक मिलेगा।
ढुलाई भाड़ा का भुगतान 14वें वित्त से ग्राम पंचायत से कराया जाएगा। इसके अलावा यदि कोई किसान चाहता है कि धान के अवशेष की पराली को अपने खेत में गलाना चाहते है तो खेत में रख किनारे पर ही गड्ढा खोदकर पराली को उसमें डाल दें।
कृषि विभाग से बी कंपोजर मिलता है। जिसे वह लेकर उसको केमिकल बनाकर उसमें डाल दें। जिससे वह जल्दी सड़ जाएगा। गोष्ठी में एडीओ कृषि राजेश चौबे, न्याय पंचायत प्रभारी देवदत्त, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जयवीर सिंह सहित एक सैकड़ा से अधिक किसान मौजूद रहे।
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शनिवार को न्याय पंचायत उरैंग में कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने कई गांवों के किसानों के साथ गोष्ठी की। जिसमें कहा कि किसान धान की पराली अवशेष को किसी भी कीमत पर खेत में न जलाएं।
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कृषि यंत्रों के साथ पराली का कैसे प्रबंधन करना है इस बात पर भी उन्होंने जानकारी दी। किसानों से कहा कि जो किसान धान की फसल हार्वेस्टर से कटवाते हैं।
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वह यह सुनिश्चित कर लें कि उस हार्वेस्टर में एसएमएस मशीन जरूर लगी हो। बिना एसएमएस लगे हार्वेस्टर से धान न कटवाएं। इसके अलावा अगर कोई किसान अपनी धान के अवशेष को पराली को गोशाला तक पहुंचाता है तो उसे लदान पारिश्रमिक मिलेगा।
ढुलाई भाड़ा का भुगतान 14वें वित्त से ग्राम पंचायत से कराया जाएगा। इसके अलावा यदि कोई किसान चाहता है कि धान के अवशेष की पराली को अपने खेत में गलाना चाहते है तो खेत में रख किनारे पर ही गड्ढा खोदकर पराली को उसमें डाल दें।
कृषि विभाग से बी कंपोजर मिलता है। जिसे वह लेकर उसको केमिकल बनाकर उसमें डाल दें। जिससे वह जल्दी सड़ जाएगा। गोष्ठी में एडीओ कृषि राजेश चौबे, न्याय पंचायत प्रभारी देवदत्त, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जयवीर सिंह सहित एक सैकड़ा से अधिक किसान मौजूद रहे।

गोष्ठी में भाग लेते किसान- फोटो : ETAWAH