फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   etawah,etawah news,krashi

पचनद क्षेत्र में विलुप्त होने की कगार पर जमुना पारी बकरी

Sun, 12 Jul 2020 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2020 11:18 PM IST
विज्ञापन
etawah,etawah news,krashi
जमुनापारी बकरी के साथ पशुपालक। - फोटो : ETAWHA
इटावा। पचनद क्षेत्र में किसानों की आमदनी का प्रमुख स्रोत विश्व प्रसिद्ध जमुनापारी बकरी विलुप्त होने की कगार पर हैं। वर्ष 1984 में पहली बार पशुपालन विभाग ने गणना कराई तब बकरियों की संख्या 82 हजार थी। अब यह संख्या छह हजार रह गई है।
विज्ञापन

यमुना, चम्बल, क्वारी, सिन्धु एवं पहुज नदियों के बीच किसानों के मुख्य आय का साधन कृषि के साथ-साथ पशुपालन रहा है। इसमें जमुनापारी बकरी एवं भदावरी भैंस किसान सबसे ज्यादा पालते थे। इन पांच नदियों के जंगलों में जौरीफिलौरा (विलायती बबूल) बड़े पैमाने पर उग आए हैं। जमुना पारी बकरी के भोजन वाले वृक्ष देशी बबूल, रेऊज, छेकुर, कैरी, जंगल जलेबी, बेरी, जंगली करौधा जैसे पेड़ विलुप्त हो गए हैं। इस कारण जमुनापारी बकरियों का जंगलों से चारा ही समाप्त हो गया। धीरे-धीरे पशुपालकों ने इस प्रजाति को पालना ही बंद कर दिया। जमुनापारी बकरियों की निरंतर कम संख्या होती देख प्रदेश सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी। जमुनापारी बकरियाें का मुख्य रूप से रूस एवं नेपाल में निर्यात किया जाता था। दक्षिण भारत में भी बड़ी संख्या मे जमुना पारी बकरियां सरकारी खरीद के माध्यम से भेजी जाती थीं। निर्यात पर रोक लग जाने से बकरी पालन में किसानों ने रुचि नहीं ली।
विज्ञापन

जमुनापारी बकरी अन्य प्रजातियों की तुलना में दोगुनी वजन की होती हैं। साथ-साथ एक से दो लीटर तक दूध प्रतिदिन देती हैं। बकरी का दूध डेंगू और क्षय रोग में औषधि का काम करता है। प्रदेश के सेवानिवृत्त निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार डॉ.रामबाबू ने जमुना पारी बकरी के दूध को तेजी से प्लेटलेट्स बढ़ाने वाला एवं कई रोगों में उपयोगी बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed