{"_id":"6ab16f87ab7b3a9a9007a1da","slug":"compensation-for-inhabited-land-at-agricultural-rates-court-sets-aside-arbitrators-award-etawah-news-c-216-1-etw1002-150070-2026-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: आबादी की जमीन का कृषि दर पर मुआवजा, कोर्ट ने आर्बिट्रेटर का अवॉर्ड किया रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: आबादी की जमीन का कृषि दर पर मुआवजा, कोर्ट ने आर्बिट्रेटर का अवॉर्ड किया रद्द
विज्ञापन
इटावा। अपर जनपद न्यायाधीश ने आबादी की जमीन का कृषि दर से मुआवजा देने वाले आर्बिट्रेटर के अवॉर्ड को रद्द कर दिया। यह निर्णय जसवंतनगर तहसील के कुरसैना गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत भूमि के मामले में आया है।
कुरसैना निवासी कामता प्रसाद की 400 वर्गमीटर भूमि का छठवां हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 के आगरा-इटावा बाईपास सेक्शन के लिए अधिग्रहीत हुआ था। कामता प्रसाद का कहना था कि उनकी भूमि पर मकान और पशुओं को रखने की व्यवस्था थी। आसपास दुकानें, बैंक, पेट्रोल पंप, बाजार और मंडी समिति भी थीं। भूमि आवासीय होने के कारण मुआवजा भी आवासीय दर से मिलना चाहिए। वहीं, एनएचएआई ने कहा था कि अधिग्रहीत भूमि में आवासीय गतिविधियां नहीं थीं। भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया जा रहा था। इसी आधार पर कृषि भूमि की दर से मुआवजा निर्धारित किया गया था। न्यायालय ने रिकॉर्ड के परीक्षण में पाया कि अधिग्रहण से पहले ही गाटा संख्या 428 आबादी के रूप में दर्ज थी। एनएचएआई ने तीन अक्तूबर 2018 को कामता प्रसाद को 3,13,835 रुपये का भुगतान भी किया था।
न्यायालय ने कहा कि अधिग्रहीत भूमि के मौके पर उपयोग और स्थिति के आधार पर ही मुआवजा तय होना चाहिए। आर्बिट्रेटर की पत्रावली में भूमि के आबादी होने संबंधी राजस्व अभिलेख मौजूद थे। इसके बावजूद आर्बिट्रेटर ने माना कि इस संबंध में कोई साक्ष्य दाखिल नहीं हुआ। न्यायालय ने इसे रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्य के विपरीत पाया।
विज्ञापन
इसी आधार पर न्यायालय ने 29 मई 2018 के सक्षम प्राधिकारी के फैसले को स्थिर रहने योग्य नहीं माना। 15 दिसंबर 2021 के आर्बिट्रेटर के आदेश को भी अदालत ने रद्द कर दिया। अदालत ने आर्बिट्रेटर के अवॉर्ड में विधिक त्रुटि और अनियमितता पाई। अपर जनपद न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने यह निर्णय 18 सितंबर को सुनाया।
विज्ञापन
कुरसैना निवासी कामता प्रसाद की 400 वर्गमीटर भूमि का छठवां हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 के आगरा-इटावा बाईपास सेक्शन के लिए अधिग्रहीत हुआ था। कामता प्रसाद का कहना था कि उनकी भूमि पर मकान और पशुओं को रखने की व्यवस्था थी। आसपास दुकानें, बैंक, पेट्रोल पंप, बाजार और मंडी समिति भी थीं। भूमि आवासीय होने के कारण मुआवजा भी आवासीय दर से मिलना चाहिए। वहीं, एनएचएआई ने कहा था कि अधिग्रहीत भूमि में आवासीय गतिविधियां नहीं थीं। भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया जा रहा था। इसी आधार पर कृषि भूमि की दर से मुआवजा निर्धारित किया गया था। न्यायालय ने रिकॉर्ड के परीक्षण में पाया कि अधिग्रहण से पहले ही गाटा संख्या 428 आबादी के रूप में दर्ज थी। एनएचएआई ने तीन अक्तूबर 2018 को कामता प्रसाद को 3,13,835 रुपये का भुगतान भी किया था।
विज्ञापन
न्यायालय ने कहा कि अधिग्रहीत भूमि के मौके पर उपयोग और स्थिति के आधार पर ही मुआवजा तय होना चाहिए। आर्बिट्रेटर की पत्रावली में भूमि के आबादी होने संबंधी राजस्व अभिलेख मौजूद थे। इसके बावजूद आर्बिट्रेटर ने माना कि इस संबंध में कोई साक्ष्य दाखिल नहीं हुआ। न्यायालय ने इसे रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्य के विपरीत पाया।
विज्ञापन
इसी आधार पर न्यायालय ने 29 मई 2018 के सक्षम प्राधिकारी के फैसले को स्थिर रहने योग्य नहीं माना। 15 दिसंबर 2021 के आर्बिट्रेटर के आदेश को भी अदालत ने रद्द कर दिया। अदालत ने आर्बिट्रेटर के अवॉर्ड में विधिक त्रुटि और अनियमितता पाई। अपर जनपद न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने यह निर्णय 18 सितंबर को सुनाया।