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कीटनाशक दवाएं भी पक्षियों की मौत का कारण
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ऊसराहार (इटावा)। सरईनावर झील के पास पक्षियों की मौत के मामले की मंगलवार को जांच करने एसडीएम ताखा सत्यप्रकाश पहुंचे। आशंका जताई जा रही है कि सिंघाड़ा की खेती करने वाले किसानों ने पानी में कीटनाशक दवाएं मिलाई हैं। जिन पक्षियों की मौत हुई है, उन्होंने इन्हीं का सेवन किया होगा। झील मे मृत पाए गए पक्षियों में सात को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
मंगलवार को सरसईनावर झील का उपजिलाधिकारी ताखा सत्यप्रकाश ने निरीक्षण किया। कुछ ग्रामीणों ने झील के आसपास सिंघाड़े की खेती करने वाले किसानों द्वारा कीटनाशक दवाएं मिलाने की बात भी कही। बताया जाता है देश और विदेश से आने वाले पक्षी झील के आसपास खेतों में भी विचरण करने चले जाते हैं। हो सकता है इन्हीं खेतों में कीटनाशक दवाएं डाली गईं हों, जिन्हें खाकर पक्षी बेहोश होकर मर गए हों। एसडीएम ने खेती करने वाले किसानों को कीटनाशक दवाएं न डालने की चेतावनी दी। कहा जिन किसानों ने खेतों में सिंघाडे़ की फसल की है। वह खेते पर स्वयं मौजूद रहकर रखवाली करें। झील से आने वाले पक्षियों को वापस झील में भेज दें।
झील के निरीक्षण करने के दौरान बगल के ही खेतों में तालाब बनाकर सिंघाड़े की खेती देख एसडीएम का माथा ठनक गया। उन्होंने कहा कि आखिर झील क्षेत्र मे पट्टे किस आधार पर कर दिए गए हैं। मौके पर मौजूद जनहित कल्याण समिति के अध्यक्ष तिलक सिंह शाक्य ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट का साफ आदेश है। यदि झील के आसपास पट्टे किए गए तो उन्हें निरस्त कर दिया जाए। सरसईनावर झील मे सौ बीघा से अधिक जमीन पर फर्जी पट्टे हैं। इसकी वह शिकायत भी कर चुके हैं। लगातार अवैध कब्जों के चलते झील सिकुड़ती जा रही है। एसडीएम ने पत्रावली तलब कर जांच का आश्वासन दिया है।
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सोमवार को भारी संख्या में मृत मिले पक्षियों में सात का पोस्टमार्टम कराया गया है। वन विभाग के रेंजर प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि बुधवार को रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके बाद ही मौत का कारण ज्ञात होगा। झील के आसपास सिंघाडे़ की खेती करने वाले ही अपने तालाबों मे कीटनाशक दवाएं डालते हैं। पक्षी सिंघाड़े खाने के शौकीन होते हैं। अनुमान यह भी है कि शायद उन पक्षियों ने कीटनाशक दवाओं से युक्त सिंघाड़े खा लिए हों, जिससे उनकी मौत हो गई हो।
इस समय भारी संख्या में विदेशी पक्षियों का सरसईनावर में आगमन हो गया है। उनकी चहलकदमी से पूरे झील में पक्षी कलरव कर रहे हैं। झील का पानी भी सही लग रहा है। आसपास में की खेती करने वाले किसानों को खेतों पर रहकर रखवाली करने के निर्देश दिए हैं। ताकि सिंघाडे़ के तालाबों में जाने से पक्षियों को रोका जा सके।
सत्यप्रकाश, ताखा, एसडीएम
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मंगलवार को सरसईनावर झील का उपजिलाधिकारी ताखा सत्यप्रकाश ने निरीक्षण किया। कुछ ग्रामीणों ने झील के आसपास सिंघाड़े की खेती करने वाले किसानों द्वारा कीटनाशक दवाएं मिलाने की बात भी कही। बताया जाता है देश और विदेश से आने वाले पक्षी झील के आसपास खेतों में भी विचरण करने चले जाते हैं। हो सकता है इन्हीं खेतों में कीटनाशक दवाएं डाली गईं हों, जिन्हें खाकर पक्षी बेहोश होकर मर गए हों। एसडीएम ने खेती करने वाले किसानों को कीटनाशक दवाएं न डालने की चेतावनी दी। कहा जिन किसानों ने खेतों में सिंघाडे़ की फसल की है। वह खेते पर स्वयं मौजूद रहकर रखवाली करें। झील से आने वाले पक्षियों को वापस झील में भेज दें।
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झील के निरीक्षण करने के दौरान बगल के ही खेतों में तालाब बनाकर सिंघाड़े की खेती देख एसडीएम का माथा ठनक गया। उन्होंने कहा कि आखिर झील क्षेत्र मे पट्टे किस आधार पर कर दिए गए हैं। मौके पर मौजूद जनहित कल्याण समिति के अध्यक्ष तिलक सिंह शाक्य ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट का साफ आदेश है। यदि झील के आसपास पट्टे किए गए तो उन्हें निरस्त कर दिया जाए। सरसईनावर झील मे सौ बीघा से अधिक जमीन पर फर्जी पट्टे हैं। इसकी वह शिकायत भी कर चुके हैं। लगातार अवैध कब्जों के चलते झील सिकुड़ती जा रही है। एसडीएम ने पत्रावली तलब कर जांच का आश्वासन दिया है।
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सोमवार को भारी संख्या में मृत मिले पक्षियों में सात का पोस्टमार्टम कराया गया है। वन विभाग के रेंजर प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि बुधवार को रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके बाद ही मौत का कारण ज्ञात होगा। झील के आसपास सिंघाडे़ की खेती करने वाले ही अपने तालाबों मे कीटनाशक दवाएं डालते हैं। पक्षी सिंघाड़े खाने के शौकीन होते हैं। अनुमान यह भी है कि शायद उन पक्षियों ने कीटनाशक दवाओं से युक्त सिंघाड़े खा लिए हों, जिससे उनकी मौत हो गई हो।
इस समय भारी संख्या में विदेशी पक्षियों का सरसईनावर में आगमन हो गया है। उनकी चहलकदमी से पूरे झील में पक्षी कलरव कर रहे हैं। झील का पानी भी सही लग रहा है। आसपास में की खेती करने वाले किसानों को खेतों पर रहकर रखवाली करने के निर्देश दिए हैं। ताकि सिंघाडे़ के तालाबों में जाने से पक्षियों को रोका जा सके।
सत्यप्रकाश, ताखा, एसडीएम