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आलू को झुलसा से बचाने पर ध्यान दें किसान
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इटावा। सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में पाला गिरने की भी आशंका है। ऐसे में आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने पर किसान ध्यान रखें। गुरुवार को गोष्ठी के दौरान राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी बृजेंद्र सिंह ने यह बात कही।
उन्होंने बताया कि आलू को झुलसा से बचाने के लिए पर्याप्त दवाइयां मौजूद हैं। किसानों को समय रहते इनका उपयोग कर लेना चाहिए। महेवा में करीब 28 सौ हेक्टेयर के करीब आलू की फसल होती है। इस बार आलू का बीज महंगा होने के कारण कम किसानों ने आलू की फसल की है। नया आलू भी बाजार में आने के बाद बहुत सस्ता नहीं रह पाएगा।
एडीओ कृषि राजेश चौबे ने बताया कि झुलसा का प्रकोप होने पर पत्तियों पर गहरे भूरे काले रंग के कुंडलाकार धब्बे बनते हैं। निचली पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं। रोग से पत्तियां सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं जो तीव्र गति से फैलती हैं।
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राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी बृजेंद्र सिंह ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैग्नीज कारवां मेट 2 से 2.5 किलोग्राम को 800 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। आलू की बुवाई के 30 से 45 दिन बाद छिड़काव जरूरी है। रोग नियंत्रण के लिए दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कापर ऑक्सिक्लोराइड 2.5 से 3 किलोग्राम अथवा जिनकी मैग्नीज कारवां मेट 2 से 2.5 किलोग्राम में से किसी एक रसायन का चयन कर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10 से 12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें।
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उन्होंने बताया कि आलू को झुलसा से बचाने के लिए पर्याप्त दवाइयां मौजूद हैं। किसानों को समय रहते इनका उपयोग कर लेना चाहिए। महेवा में करीब 28 सौ हेक्टेयर के करीब आलू की फसल होती है। इस बार आलू का बीज महंगा होने के कारण कम किसानों ने आलू की फसल की है। नया आलू भी बाजार में आने के बाद बहुत सस्ता नहीं रह पाएगा।
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एडीओ कृषि राजेश चौबे ने बताया कि झुलसा का प्रकोप होने पर पत्तियों पर गहरे भूरे काले रंग के कुंडलाकार धब्बे बनते हैं। निचली पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं। रोग से पत्तियां सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं जो तीव्र गति से फैलती हैं।
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राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी बृजेंद्र सिंह ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैग्नीज कारवां मेट 2 से 2.5 किलोग्राम को 800 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। आलू की बुवाई के 30 से 45 दिन बाद छिड़काव जरूरी है। रोग नियंत्रण के लिए दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कापर ऑक्सिक्लोराइड 2.5 से 3 किलोग्राम अथवा जिनकी मैग्नीज कारवां मेट 2 से 2.5 किलोग्राम में से किसी एक रसायन का चयन कर 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10 से 12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें।