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‘दहेज से ही बढ़ा भ्रष्टाचार’
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Tue, 14 Jul 2015 11:38 PM IST
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‘शादी में दहेज प्रथा ही भ्रष्टाचार की जड़ है। जब से शादी-विवाह में भारी-भरकम दहेज लेना-देना शुरू हुआ, तब से समाज में हर स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है। इसी से दहेज हत्याओं और उत्पीड़न की खबरें आने लगी हैं।’
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यह बात राहतपुरा स्थित श्री शंकर नेत्र चिकित्सालय में चल रही श्रीरामकथा में पांचवें दिन हरिद्वार से आए संत महामंडलेश्वर बालयोगी स्वामी श्री अजुर्नपुरी जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि शादी विवाह में राजशाही प्रदर्शन समाज के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाएं हमारे अधार्मिक होने का प्रतीक है।
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यदि हम धर्मशील होते तो ऐसी घटनाएं नहीं हो सकती थीं। हम धार्मिक होने का ढोंग करते हैं और लोगों की नजर बचाकर अधर्म में भी जुटे रहते हैं इसलिए यह घटनाएं हमारे समाज पर कलंक लगा रही हैं।
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उन्होंने कहा कि हम संकल्प लें कि न तो हम दहेज देंगे और न दहेज लेंगे। हमें इससे बचना चाहिए। बिना भ्रष्टाचार के हम दहेज दे नहीं सकते और अगर हम वही गलत धन दहेज के रूप में स्वीकार करेंगे तो वह अनीति से कमाया गया धन हमारे घर में आकर हमारे परिवार की सुख, शांति को सुरक्षित नहीं रखेगा इसलिए बेटियों पर रहम करो।
दीन-हीन पिताओं पर रहम करो। तड़क-भड़क बंद करो। खर्चीली शादियां बंद करो। बहुओं को बेटियों जैसा प्यार और सम्मान दो। उन्होंने कहा कि हम समाज का नुकसान करने में जुटी आसुरी/राक्षसी शक्तियों का नाश कर सकते हैं।
केवल अधर्म का नाश हो, का नारा लगाकर ही संतुष्ट न हों। प्रभु का कार्य करने के लिए प्रभु का प्रिय पात्र बनें। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संस्कृति स्वरूपा नारी जगत का सम्मान करके हम अपने घर को भी स्वर्ग बना सकते हैं। जहां-जहां नारी की पूजा होती है वहां-वहां देवता निवास करते हैं।