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तेंदुआ और भालू लाने को चाहिए सीजेडए की मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 06 Dec 2016 11:36 PM IST
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भालू
- फोटो : प्रतीकात्मक
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इटावा सफारी पार्क में मृग, तेंदुआ और भालू सफारी भी बनकर तैयार हैं। सफारी प्रशासन इन सफारियों में भी जानवर लाने की तैयारी में है लेकिन अभी तक सीजेडए (सेंट्रल जू अथॉरिटी) की अनुमति नहीं मिली है। जानवर कहां से और कितने लाए जाएंगे इसक ा होमवर्क भी सफारी प्रशासन ने पूरा कर लिया है।
इटावा सफारी पार्क को जू के रूप में जनता के लिए खोले जाने की अनुमति मिलने के बाद सफारी प्रशासन ने तेंदुआ, भालू और काले मृग सफारी में लाने के प्रयास तेजी से शुरू कर दिए हैं। सफारी प्रशासन ने सीजेडए को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जिसमें सफारी में 20 काले मृग लाने के साथ भालू और तेंदुआ लाने की बात कही गई है। इनकी संख्या अभी तय नहीं हो सकी है। सफारी प्रशासन को ये जानवर तब मिलेंगे जब उस स्थान के लिए सफारी दूसरे जानवर उपलब्ध करा दे। जल्द ही सीजेडए इस मामले पर बैठक करेगा और उसमें सफारी के इस प्रस्ताव पर विचार विमर्श किया जाएगा।
शेडयूल 1 और 2 में रखे जाते जानवर
इटावा। सीजेडए ने वन्यजीवों को अलग-अलग शेडयूल में बांट रखा है। उनकी इसी नियमों के अनुसार देखरेख होती है। बब्बर शेर, तेंदुआ, चीता, भालू, काले मृग के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण जानवरों को शेडयूल 1 में रखा गया है। वहीं हिरन और अन्य जानवरों को शेडयूल 2 में रखा गया है। शेडयूल 1 के जानवरों पर सीजेडए पैनी नजर रखती है और एक-एक जानवर के रहने का स्थान व गिनती रहती है। यही नहीं इन जानवरों की देखरेख कहां और कौन कर रहा है या जानवर जंगली क्षेत्र में रह रहे हैं इसका लेखाजोखा भी सीजेडए के पास रहता है। ऐसे में इन जानवरों को किसी जंगल या जू से इधर से उधर करने पर सीजेडए की अनुमति आवश्यक होती है। वहीं शेडयूल 2 के जानवरों का ब्यौरा तो सीजेडए के पास होता है लेकिन इस शेडयूल में आने वाले जानवर बहुतायत में पाए जाते हैं और इनकी प्रजातियों के विलुप्त होने का भी कहीं खतरा नहीं है। ये सरलता से एक स्थान से दूसरे स्थान में पहुंचकर वहां के वातावरण में घुल मिल जाते हैं। ऐसे में उन पर सीजेडए सिर्फ सरसरी नजर ही रखता है।
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इटावा सफारी पार्क को जू के रूप में जनता के लिए खोले जाने की अनुमति मिलने के बाद सफारी प्रशासन ने तेंदुआ, भालू और काले मृग सफारी में लाने के प्रयास तेजी से शुरू कर दिए हैं। सफारी प्रशासन ने सीजेडए को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जिसमें सफारी में 20 काले मृग लाने के साथ भालू और तेंदुआ लाने की बात कही गई है। इनकी संख्या अभी तय नहीं हो सकी है। सफारी प्रशासन को ये जानवर तब मिलेंगे जब उस स्थान के लिए सफारी दूसरे जानवर उपलब्ध करा दे। जल्द ही सीजेडए इस मामले पर बैठक करेगा और उसमें सफारी के इस प्रस्ताव पर विचार विमर्श किया जाएगा।
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शेडयूल 1 और 2 में रखे जाते जानवर
इटावा। सीजेडए ने वन्यजीवों को अलग-अलग शेडयूल में बांट रखा है। उनकी इसी नियमों के अनुसार देखरेख होती है। बब्बर शेर, तेंदुआ, चीता, भालू, काले मृग के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण जानवरों को शेडयूल 1 में रखा गया है। वहीं हिरन और अन्य जानवरों को शेडयूल 2 में रखा गया है। शेडयूल 1 के जानवरों पर सीजेडए पैनी नजर रखती है और एक-एक जानवर के रहने का स्थान व गिनती रहती है। यही नहीं इन जानवरों की देखरेख कहां और कौन कर रहा है या जानवर जंगली क्षेत्र में रह रहे हैं इसका लेखाजोखा भी सीजेडए के पास रहता है। ऐसे में इन जानवरों को किसी जंगल या जू से इधर से उधर करने पर सीजेडए की अनुमति आवश्यक होती है। वहीं शेडयूल 2 के जानवरों का ब्यौरा तो सीजेडए के पास होता है लेकिन इस शेडयूल में आने वाले जानवर बहुतायत में पाए जाते हैं और इनकी प्रजातियों के विलुप्त होने का भी कहीं खतरा नहीं है। ये सरलता से एक स्थान से दूसरे स्थान में पहुंचकर वहां के वातावरण में घुल मिल जाते हैं। ऐसे में उन पर सीजेडए सिर्फ सरसरी नजर ही रखता है।
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