{"_id":"587faf734f1c1b700df008aa","slug":"mining-at-yamuna-in-century-area","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेंचुरी क्षेत्र में यमुना का सीना चीर रहे माफिया ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सेंचुरी क्षेत्र में यमुना का सीना चीर रहे माफिया
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Wed, 18 Jan 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
यमुना नदी में रेत का खनन करता ट्रैक्टर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यमुना सेंचुरी के पास दिलीपनगर एरिया में इन दिनों रेत का अवैध खनन हो रहा है। खुलेआम हो रहे खनन के बावजूद सेंचुरी विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा।
बकेवर थाना क्षेत्र के दिलीपनगर क्षेत्र में अवैध रेत खनन कर माफिया यमुना नदी का सीना चीर रहे हैं। बालू से एक ही दिन में लाखों की कमाई का मोटा खेल चल रहा है। दिलीपनगर एरिया में दिन भर नदी किनारे रेत भरने के लिए ट्रैक्टर ट्रालियों और डंपरों की लाइनें लगी रहती हैं। एक ट्रैक्टर चालक ने बताया कि एक ट्राली रेत 2100 रुपये में बिक जाती है। लेकिन सब कुछ पता होने के बावजूद अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि यमुना सेंचुरी क्षेत्र में खनन की कोई शिकायत नहीं है। अवैध खनन से यमुना की रेत में आशियाना बनाए कछुओं के जीवन पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
माफिया कई बार यमुना किनारे खेतों में भी खनन करने लगते हैं। फसल बर्बाद होने पर किसान विरोध करते हैं तो उन्हें डराकर धमकाकर भगा दिया जाता है। चंबल की लाल रेत पर छाई महंगाई के चलते अब सरकारी निर्माण कार्य में ठेकेदार व कार्यदायी संस्थाएं यमुना की रेत का ही प्रयोग कर रहीं हैं। यमुना नदी का दिलीपनगर घाट इसलिए गुणवत्ता पूर्ण माना जाता है क्योंकि चंबल नदी का जुड़ाव इस क्षेत्र से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है।
खनन माफियाओं ने तोड़ा खड़ंजा
दिलीपनगर समृद्धिशाली गांव के रूप में पहचान रखता है। कामाख्या देवी मंदिर के सेवादार महंत बाबा बांकेलाल ने बताया कि रेत माफियाओं के खनन कार्य में लगे ट्रैक्टरों ने मंदिर तक जाने वाला पूरा खड़ंजा तोड़ दिया है। जब मंदिर के सेवादार इसका विरोध करते हैं तो रेत माफिया झगड़ा करने पर आमादा हो जाते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
खनन का मामला उनके संज्ञान में आया है। जांच टीम भेजी गई है, अभी रिपोर्ट नहीं आई है ।
अनिल पटेल, चंबल सेंचुरी डीएफओ
विज्ञापन
बकेवर थाना क्षेत्र के दिलीपनगर क्षेत्र में अवैध रेत खनन कर माफिया यमुना नदी का सीना चीर रहे हैं। बालू से एक ही दिन में लाखों की कमाई का मोटा खेल चल रहा है। दिलीपनगर एरिया में दिन भर नदी किनारे रेत भरने के लिए ट्रैक्टर ट्रालियों और डंपरों की लाइनें लगी रहती हैं। एक ट्रैक्टर चालक ने बताया कि एक ट्राली रेत 2100 रुपये में बिक जाती है। लेकिन सब कुछ पता होने के बावजूद अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि यमुना सेंचुरी क्षेत्र में खनन की कोई शिकायत नहीं है। अवैध खनन से यमुना की रेत में आशियाना बनाए कछुओं के जीवन पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
माफिया कई बार यमुना किनारे खेतों में भी खनन करने लगते हैं। फसल बर्बाद होने पर किसान विरोध करते हैं तो उन्हें डराकर धमकाकर भगा दिया जाता है। चंबल की लाल रेत पर छाई महंगाई के चलते अब सरकारी निर्माण कार्य में ठेकेदार व कार्यदायी संस्थाएं यमुना की रेत का ही प्रयोग कर रहीं हैं। यमुना नदी का दिलीपनगर घाट इसलिए गुणवत्ता पूर्ण माना जाता है क्योंकि चंबल नदी का जुड़ाव इस क्षेत्र से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है।
विज्ञापन
खनन माफियाओं ने तोड़ा खड़ंजा
दिलीपनगर समृद्धिशाली गांव के रूप में पहचान रखता है। कामाख्या देवी मंदिर के सेवादार महंत बाबा बांकेलाल ने बताया कि रेत माफियाओं के खनन कार्य में लगे ट्रैक्टरों ने मंदिर तक जाने वाला पूरा खड़ंजा तोड़ दिया है। जब मंदिर के सेवादार इसका विरोध करते हैं तो रेत माफिया झगड़ा करने पर आमादा हो जाते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
खनन का मामला उनके संज्ञान में आया है। जांच टीम भेजी गई है, अभी रिपोर्ट नहीं आई है ।
अनिल पटेल, चंबल सेंचुरी डीएफओ