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पौधरोपण के नाम पर 12.56 लाख घोटाले की डीएम से शिकायत

Sun, 01 Nov 2020 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2020 11:03 PM IST
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Complaint with DM for 12.56 lakh scam in the name of plantation
संवाद न्यूज एजेंसी
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ऊसराहार। ताखा की 17 ग्राम पंचायतों में पौधरोपण के नाम पर 12.56 लाख रुपये हड़पने का घोटाला सामने आया है। इन ग्राम पंचायतों में कागजों पर किए गए पौधरोपण का खुलासा होने के बाद प्रशासन मामले की जांच में जुट गया है। ग्राम पंचायत सचिवों ने भी जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर घोटाले की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में बताया गया है कि ताखा की सभी ग्राम पंचायतों में निशुल्क पौधरोपण कराया जाना था। ब्लॉक पर तैनात लेखाकार ने 17 ग्राम पंचायतों में फर्जी बिल लगाकर एटा की एक कंपनी को 11 लाख 53 हजार 242 रुपये का भुगतान करा दिया, जबकि केशोपुर ग्राम पंचायत में पौधरोपण के नाम पर 91 हजार 590 रुपये का भुगतान बिल्डिंग मैटेरियल का काम करने वाली फर्म को कर दिया। इसकी भनक 17 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान और सचिवों तक को नहीं हुई। पूरा मामला तब उजागर हुआ जब कुछ सचिवों ने मनरेगा की साइट पर पड़े इन बिलों के भुगतान को देखा।
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बताया जाता है कि ताखा में तैनात एक लेखाकार ने इस घोटाले का चक्रव्यूह रचा। पौधरोपण घोटाले में उसने एटा की कंपनी को चुना और फर्जी बिल के सहारे 12.56 लाख रुपये की धनराशि खातों में हस्तांतरित कर हड़प ली। इसके बाद मनरेगा के रुपये का बंदरबांट कर डाला गया। सूत्र बताते हैं कि 12.56 लाख रुपये में से 11 लाख 53 हजार 242 रुपये एटा की कंपनी द्वारा भुगतान करके निकाला भी जा चुका है। इसमें से उसने आठ लाख रुपये लेखाकार को दे भी दिए हैं।
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फर्मों के खातों के भुगतान पर लगी रोक
जब पूरे मामले की जानकारी बीडीओ ताखा पीएन यादव को हुई तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने अन्य खातों सहित एटा की कंपनी के खातों को भी खंगाला है और जांच होने तक उसके खाते पर रोक लगा दी है। वहीं बिल्डिंग मैटेरियल की कंपनी के खाते में भेज गए 91 हजार 590 को होल्ड करा दिया है। उन्होंने बताया कि पूरा भुगतान लिपिक ने फर्जी बिल लगाकर किया। इसके लिए उसने पहले अपने डोंगल का इस्तेमाल किया, जबकि चैकर की जिम्मेदारी लिपिक की होती है। बीडीओ का डोंगल लिपक के डोंगल को लगाने के बाद ही लगाया जाता है।

इस तरह किया जाना चाहिए था पौधरोपण
नियमानुसार किसी भी पंचायत में पौधरोपण के लिए पहले उस पंचायत के सचिव व प्रधान प्रस्ताव बनाकर काम करते हैं जिसके बाद बिल वाउचर को सहायक लेखा के पास भेजा जाता है। चूंकि सहायक के पद पर संविदा कर्मचारी ही तैनात है इसलिए सहायक लेखा इनको आगे लेखाकार के पास भेज देता है। लेखाकार को ही चैकर माना जाता है इसलिए पूरी जांच के बाद ही लेखाकार अपने डोंगल का प्रयोग कर उसे अंतिम भुगतान के लिए बीडीओ को भेजता है। चूंकि पीछे के पटल पर पूरी छानबीन के बाद बीडीओ के पटल पर भेजा जाता है। प्रधान व सचिवों को भनक तक नहीं थी इसीलिए लगभग सभी सचिवों ने जिलाधिकारी श्रुति सिंह से भी इस फर्जी पौधरोपण की शिकायत कर दी है।
इन 17 ग्राम पंचायतों में हुआ फर्जी पौधरोपण
ग्राम पंचायत धनराशि
आढरपुरा 40000
अघीनी 50000
बछरोही 30000
शाहपुर 25000
बकौली 40000
बम्हनीपुर 40000
बेलाहार 85000
भरतिया 25000
रुद्रपुर 25000
दीग 90000
हरकुंजलपुर 88980
ककराही 143000
केशोपुर 131590
खनांबांध 76650
पुरैला 88980
रतहरी 50000
शेखपुरा पचार 181590
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