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पने बगीचे की ताजी सब्जियां खाएंगे परिषदीय स्कूलों के बच्चे
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फोटो संख्या 09 व 10 हर्बल गार्डन
- फोटो : ETAWHA
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को रसायन मुक्त पौष्टिक सब्जियां खिलाने के लिए शुरू हुई हर्बल गार्डन योजना ने रफ्तार पकड़ ली।
मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर ने बताया कि जिले के 1740 प्राथमिक और 537 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 400 को योजना के लिए चुना गया था। इसमें 40 ग्राम पंचायतों के स्कूलों में हर्बल गार्डन बनकर तैयार हो गया है।
एक जुलाई से स्कूलों के खुलने तक करीब 50 फीसदी लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
जनपद के 1740 प्राथमिक विद्यालय और 537 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 400 विद्यालयों में हर्बल किचन गार्डन तैयार किए जाएंगे।
योजना के प्रथम चरण में जनपद के आठ विकास खंड भरथना, ताखा, महेवा, चकरनगर, बढ़पुरा, सैफई, जसवंतनगर, बसरेहर में से प्रत्येक विकास खंड में पचास विद्यालयों को चयनित किया गया है।
शासन की इस योजना में ऐसे विद्यालयों को चयन में प्राथमिकता रहेगी जहां चाहरदीवारी और सिंचाई की व्यवस्था हो।
साथ ही प्रांगण भी बड़ा हो। हर्बल किचन गार्डन को तैयार करने का उद्देश्य मध्याह्न भोजन योजना को सुदृढ़ बनाने को लेकर है।
यहां पर बिना रसायनों के प्रयोग करके सब्जियां और औषधीय गुणों से युक्त पौधे तैयार किए जाएंगे। उत्पादित सब्जियां मिड-डे में प्रयोग में लाई जाएगी।
सीडीओ ने बताया कि एक गार्डन को तैयार करने में 62 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसमें तुलसी गिलोय आदि औषधीय पौधों को लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है। औषधीय पौधों के साथ ही धनिया, लौकी, सेम, सहजन की फली व अन्य मौसमी सब्जियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
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सीडीओ ने बताया कि हर्बल गार्डन का काम मनरेगा के तहत ग्राम प्रधानों को करवाने का निर्देश दिया गया है। इससे कोरोना की वजह से पलायन करके आए प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले चरण का काम करीब पूरा हो चुका है। जुलाई तक लक्ष्य पूरा करने का प्रयास है।
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मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर ने बताया कि जिले के 1740 प्राथमिक और 537 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 400 को योजना के लिए चुना गया था। इसमें 40 ग्राम पंचायतों के स्कूलों में हर्बल गार्डन बनकर तैयार हो गया है।
एक जुलाई से स्कूलों के खुलने तक करीब 50 फीसदी लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
जनपद के 1740 प्राथमिक विद्यालय और 537 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 400 विद्यालयों में हर्बल किचन गार्डन तैयार किए जाएंगे।
योजना के प्रथम चरण में जनपद के आठ विकास खंड भरथना, ताखा, महेवा, चकरनगर, बढ़पुरा, सैफई, जसवंतनगर, बसरेहर में से प्रत्येक विकास खंड में पचास विद्यालयों को चयनित किया गया है।
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शासन की इस योजना में ऐसे विद्यालयों को चयन में प्राथमिकता रहेगी जहां चाहरदीवारी और सिंचाई की व्यवस्था हो।
साथ ही प्रांगण भी बड़ा हो। हर्बल किचन गार्डन को तैयार करने का उद्देश्य मध्याह्न भोजन योजना को सुदृढ़ बनाने को लेकर है।
यहां पर बिना रसायनों के प्रयोग करके सब्जियां और औषधीय गुणों से युक्त पौधे तैयार किए जाएंगे। उत्पादित सब्जियां मिड-डे में प्रयोग में लाई जाएगी।
सीडीओ ने बताया कि एक गार्डन को तैयार करने में 62 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसमें तुलसी गिलोय आदि औषधीय पौधों को लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है। औषधीय पौधों के साथ ही धनिया, लौकी, सेम, सहजन की फली व अन्य मौसमी सब्जियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
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सीडीओ ने बताया कि हर्बल गार्डन का काम मनरेगा के तहत ग्राम प्रधानों को करवाने का निर्देश दिया गया है। इससे कोरोना की वजह से पलायन करके आए प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले चरण का काम करीब पूरा हो चुका है। जुलाई तक लक्ष्य पूरा करने का प्रयास है।