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विदेशी परिंदों ने चंबल नदी किनारे डाला डेरा
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फोटो संख्या 12- चंबल किनारे प्रवासियों पक्षियों ने डाला डेरा
- फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। मौसम का रुख बदलते ही चंबल नदी का किनारा विदेशी मेहमानों से गुलजार है। साइबेरिया, रूस, मलयेशिया से हजारों मील की दूरी तय करके विदेशी पक्षी चंबल नदी सेंक्चुअरी में आना शुरू हो गए हैं। नदी तट पर इन परिंदों का कलरव लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र में विदेशी पक्षियों के आने की आहट मिलते ही सतर्कता बढ़ा दी गई है।
हर साल ठंड शुरू होते ही नवंबर के मध्य से फरवरी के आखिर तक बड़ी तादाद में चंबल नदी के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का आगमन होता है। मौसम अनुकूल होने के कारण यह काल इन पक्षियों के प्रजनन के लिए उपयुक्त होता है। नदी किनारे विदेशी मेहमान पक्षी अंडे देते हैं। गर्मी आने से पहले बच्चों सहित अपने मूल स्थान पर लौट जाते हैं। विदेशी मेहमान पक्षियों की रखवाली के लिए नदी किनारे कांबिंग बढ़ा दी गई है। लगभग चार से पांच हजार पक्षी प्रत्येक वर्ष नदी किनारे आते हैं। इन पक्षियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व सैलानी भरेह संगम पहुंचते हैं। सुनसान रेत पर घंटों बैठकर इन पक्षियों की अठखेलियों में खो जाते हैं। (संवाद)
रूस, साइबेरिया, मलयेशिया आदि देशों में ठंड के दौरान बर्फ गिरनी शुरू हो जाती है। इस अवधि में यहां रहने वाले पक्षियों के सामने प्रजनन व खाने-पीने की समस्या आती है, जिसके कारण वे यहां आकर शरण लेते हैं। इन परिंदों के लिए सेंक्चुअरी क्षेत्र की नम भूमि भोजन-पानी के साथ प्रजनन के लिहाज से अनुकूल होती है। साइबेरियन पक्षी सात समुंदर पार से लगभग 2000 किलोमीटर का सफर तय कर यहां आते हैं। इस दूरी को तय करने में उन्हें करीब एक महीने का समय लगता है।
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रूडी शेलडक, पेंटेड स्टॉर्क, विसलिंग टील, ब्लैक आइबिस, बार हेडेड गूज, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, प्लेसिस गल, टेल टिंगो, काबोर्नेट आदि पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। दिसंबर शुरू होते-होते हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी नदी किनारे डेरा जमा लेते हैं। सेंक्चुअरी वन दरोगा विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया मेहमान पक्षियों की आवक से सतर्कता बढ़ा दी गई है। पिछले वर्ष लगभग चार हजार से अधिक परिंदे आए थे। इस वर्ष इनकी संख्या बढ़ सकती है। विभाग के लिए यह खुशी बात है।
चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि दीपावली से विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। यह पक्षी हजारों किलोमीटर दूर से चंबल नदी में प्रजनन की अनुकूलता के चलते आते हैं। पक्षियों की रखवाली के लिए सहसों घाट से लेकर भरेह संगम तक निरंतर रखवाली की जा रही है। पक्षियों को रहने में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।
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हर साल ठंड शुरू होते ही नवंबर के मध्य से फरवरी के आखिर तक बड़ी तादाद में चंबल नदी के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का आगमन होता है। मौसम अनुकूल होने के कारण यह काल इन पक्षियों के प्रजनन के लिए उपयुक्त होता है। नदी किनारे विदेशी मेहमान पक्षी अंडे देते हैं। गर्मी आने से पहले बच्चों सहित अपने मूल स्थान पर लौट जाते हैं। विदेशी मेहमान पक्षियों की रखवाली के लिए नदी किनारे कांबिंग बढ़ा दी गई है। लगभग चार से पांच हजार पक्षी प्रत्येक वर्ष नदी किनारे आते हैं। इन पक्षियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व सैलानी भरेह संगम पहुंचते हैं। सुनसान रेत पर घंटों बैठकर इन पक्षियों की अठखेलियों में खो जाते हैं। (संवाद)
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रूस, साइबेरिया, मलयेशिया आदि देशों में ठंड के दौरान बर्फ गिरनी शुरू हो जाती है। इस अवधि में यहां रहने वाले पक्षियों के सामने प्रजनन व खाने-पीने की समस्या आती है, जिसके कारण वे यहां आकर शरण लेते हैं। इन परिंदों के लिए सेंक्चुअरी क्षेत्र की नम भूमि भोजन-पानी के साथ प्रजनन के लिहाज से अनुकूल होती है। साइबेरियन पक्षी सात समुंदर पार से लगभग 2000 किलोमीटर का सफर तय कर यहां आते हैं। इस दूरी को तय करने में उन्हें करीब एक महीने का समय लगता है।
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रूडी शेलडक, पेंटेड स्टॉर्क, विसलिंग टील, ब्लैक आइबिस, बार हेडेड गूज, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, प्लेसिस गल, टेल टिंगो, काबोर्नेट आदि पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। दिसंबर शुरू होते-होते हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी नदी किनारे डेरा जमा लेते हैं। सेंक्चुअरी वन दरोगा विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया मेहमान पक्षियों की आवक से सतर्कता बढ़ा दी गई है। पिछले वर्ष लगभग चार हजार से अधिक परिंदे आए थे। इस वर्ष इनकी संख्या बढ़ सकती है। विभाग के लिए यह खुशी बात है।
चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि दीपावली से विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। यह पक्षी हजारों किलोमीटर दूर से चंबल नदी में प्रजनन की अनुकूलता के चलते आते हैं। पक्षियों की रखवाली के लिए सहसों घाट से लेकर भरेह संगम तक निरंतर रखवाली की जा रही है। पक्षियों को रहने में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।