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उर्स में चादरपोशी, कव्वाली भी
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बाइस ख्वाजा में उर्स के दौरान नात पढ़ते जायरीन
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। हजरत अरशद अली और माशूक अली बाइस ख्वाजागान का तीन दिवसीय उर्स फतेहपुर सीकरी के सज्जादा नशीन सूफी हजरत कमरउददीन लियाकती की सरपरस्ती में हुआ।
उर्स के दूसरे दिन बाद नमाज फजर कुरान ख्वानी संदल शरीफ चादर पोशी गागर शरीफ पेश की गई। देर शाम महफिल ए कव्वाली का आयोजन किया गया।
उर्स कमेटी के संयोजक जुनेद तैमूरी व रईस अहमद ने बताया उर्स की शुरुआत 23 फरवरी को बाद नमाज फजर कुरान खानी से करने के बाद अकीदतमंदों ने मजार शरीफ पर चादर पेशी का सिलसिला चलता रहा।
नमाज ईशा मिलाद शरीफ का आयोजन किया गया जिसमें मौलाना एवं उलेमाओं ने शिरकत की। फिरोजाबाद की दुलारे एवं अनीश कव्वाल ने अपने कलाम पेश किए।
देर रात तक चले उर्स के तीसरे व अंतिम दिन बाद नमाज फजर कुरान ख्वानी सुबह 9 बजे हजरत अरशद अली उर्फ माशूक अली 22 ख्वाजागान का गुसल शरीफ किया गया।
कुल शरीफ का आयोजन में सुफी कमर उददीन शमसी लियाकती ने देश व प्रदेश में अमन चैन सुख शांति के लिए दुआ की। कहा मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है, प्रेम और भाईचारा से ही भारत का कल्याण संभव है। हम सब लोगों को प्रेम सद्भाव का संदेश घर-घर पहुंचाना चाहिए।
इसी से देश व समाज की उन्नति व प्रगति हो सकती है। इसके बाद रंगे महफिल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीएफओ तबारक हुसैन ने भी दरगाह पर पहुंच कर चादर पेश की और दुआ मांगी।
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सूफी सत्तार सूफी मेहंदी हसन, सूफी परवेज, डा. आदिल खादिम अब्बास, मसूद तैमूरी, लईक अहमद, इरशाद खान, तैसीन अहमद, चांद राइन उपस्थित रहे।
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उर्स के दूसरे दिन बाद नमाज फजर कुरान ख्वानी संदल शरीफ चादर पोशी गागर शरीफ पेश की गई। देर शाम महफिल ए कव्वाली का आयोजन किया गया।
उर्स कमेटी के संयोजक जुनेद तैमूरी व रईस अहमद ने बताया उर्स की शुरुआत 23 फरवरी को बाद नमाज फजर कुरान खानी से करने के बाद अकीदतमंदों ने मजार शरीफ पर चादर पेशी का सिलसिला चलता रहा।
नमाज ईशा मिलाद शरीफ का आयोजन किया गया जिसमें मौलाना एवं उलेमाओं ने शिरकत की। फिरोजाबाद की दुलारे एवं अनीश कव्वाल ने अपने कलाम पेश किए।
देर रात तक चले उर्स के तीसरे व अंतिम दिन बाद नमाज फजर कुरान ख्वानी सुबह 9 बजे हजरत अरशद अली उर्फ माशूक अली 22 ख्वाजागान का गुसल शरीफ किया गया।
कुल शरीफ का आयोजन में सुफी कमर उददीन शमसी लियाकती ने देश व प्रदेश में अमन चैन सुख शांति के लिए दुआ की। कहा मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है, प्रेम और भाईचारा से ही भारत का कल्याण संभव है। हम सब लोगों को प्रेम सद्भाव का संदेश घर-घर पहुंचाना चाहिए।
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इसी से देश व समाज की उन्नति व प्रगति हो सकती है। इसके बाद रंगे महफिल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीएफओ तबारक हुसैन ने भी दरगाह पर पहुंच कर चादर पेश की और दुआ मांगी।
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सूफी सत्तार सूफी मेहंदी हसन, सूफी परवेज, डा. आदिल खादिम अब्बास, मसूद तैमूरी, लईक अहमद, इरशाद खान, तैसीन अहमद, चांद राइन उपस्थित रहे।