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लाइलाज नहीं है कैंसर, इलाज से हो सकते स्वस्थ : डॉ. कैलाश
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इटावा। कैंसर लाइलाज बीमारी नहीं है। यदि समय रहते इसका इलाज किया जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है। सैफई में रोजाना 15 से 20 कैंसर रोगी आ रहे हैं। इनमें गले और फेफड़ों के अलावा गर्भाशय व स्तन कैंसर के मरीज ज्यादा हैं।
सैफई विश्वविद्यालय के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. कैलाश मित्तल ने बताया कि कैंसर शरीर में हर तरफ हो सकता है। इनमें छिद्र वाले स्थान जैसे नाक, कान, मुंह, पेशाब और शौच क्रिया के रास्ते से यदि रक्तस्राव हो तो इन लक्षणों को नजरअंदाज कतई न करें। तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें। इसके अलावा शरीर में कोई गांठ या आवाज में परिवर्तन गले के कैंसर होने का लक्षण हैं। गले का कैंसर ध्रूमपान और गुटखा खाने की वजह से, फेफड़े का कैंसर स्मोकिंग करने व खदान फैक्ट्री में काम करने की वजह से होता है।
जबकि महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर एचपीवी (ह्यूमन पापीलोमा वायरस) की वजह से होता है। जबकि स्तन कैंसर हार्माेन की वजह के अलावा कई और वजह से होता है। बचाव के लिए वजन को कंट्रोल करें, सुस्त जीवन जीने से बचें, व्यसन से दूर रहें, नींद अच्छी लें, कम से कम छह से आठ घंटे की नींद जरूर लें। तनाव से दूर रहकर मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ रखें।
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बताया इस मौके पर सुपर स्पेशयलिटी कैंसर क्लीनिक में आयोजित कार्यक्रम में करीब पांच ऐसे कैंसर रोगियों को बुलाकर सम्मानित किया, जिनका छह से लेकर पांच साल पुराना कैंसर ठीक हो चुका है। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. रमाकांत ने उपहार देकर उन्हें सम्मानित किया।
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सैफई विश्वविद्यालय के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. कैलाश मित्तल ने बताया कि कैंसर शरीर में हर तरफ हो सकता है। इनमें छिद्र वाले स्थान जैसे नाक, कान, मुंह, पेशाब और शौच क्रिया के रास्ते से यदि रक्तस्राव हो तो इन लक्षणों को नजरअंदाज कतई न करें। तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें। इसके अलावा शरीर में कोई गांठ या आवाज में परिवर्तन गले के कैंसर होने का लक्षण हैं। गले का कैंसर ध्रूमपान और गुटखा खाने की वजह से, फेफड़े का कैंसर स्मोकिंग करने व खदान फैक्ट्री में काम करने की वजह से होता है।
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जबकि महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर एचपीवी (ह्यूमन पापीलोमा वायरस) की वजह से होता है। जबकि स्तन कैंसर हार्माेन की वजह के अलावा कई और वजह से होता है। बचाव के लिए वजन को कंट्रोल करें, सुस्त जीवन जीने से बचें, व्यसन से दूर रहें, नींद अच्छी लें, कम से कम छह से आठ घंटे की नींद जरूर लें। तनाव से दूर रहकर मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ रखें।
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बताया इस मौके पर सुपर स्पेशयलिटी कैंसर क्लीनिक में आयोजित कार्यक्रम में करीब पांच ऐसे कैंसर रोगियों को बुलाकर सम्मानित किया, जिनका छह से लेकर पांच साल पुराना कैंसर ठीक हो चुका है। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. रमाकांत ने उपहार देकर उन्हें सम्मानित किया।