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झटका मशीन तो कहीं लकड़ियों की बाड़
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चकरनगर। किसान फसलों की रखवाली के लिए रात-दिन जतन कर रहे, वहीं, आवारा पशु फिर भी फसल को उजाड़ रहे हैं। शीतलहर के चलते छुट्टा गोवंश खेतों में फसलों को भोजन बना रहे और खाली पड़े खंडहर भवनों में आशियाना बनाए हैं।
खेतों में फसलों की रखवाली के लिए किसानों ने कहीं झटका मशीन, लकड़ियों की बाड़ तो कहीं कंटीले तार लगा रखे हैं। भूख प्यास से व्याकुल गोवंश मौका लगते ही पेट की आग बुझाने के लिए लाठी-डंडों से कुटते पिटते खेतों में घुस पड़ते हैं।
70 वर्षीय मेहरबान सिंह यादव कहते हैं सारी उम्र खेतीबाड़ी करते निकल गए। जानवरों से इतनी समस्या कभहूं नई भैई, सिगरे जतन कर हारे गैंयन गाय ने फिरहू खेत उजारे। पलक झपकते ही सफा चट कर देती है।
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मुकेश कठेरिया का कहना है कि कभी जंगली सूअर आकर फसलों को नुकसान कर देते हैं। हालात यह हो गए हैं कि जैसे गाड़ी चलाते समय निगाह हटी और दुर्घटना घटी। उसी तरीके से खेतों से जरा भी दूर जाओ तो जानवरों का फसलों पर हमला हो जाता है।
किशन लाल बताते हैं कि जानवरों से फसलों की रखवाली के लिए 24 घंटे एक आदमी मुस्तैद रहता है। पशु चिकित्सा अधिकारी चकरनगर डॉ. राहुल शंखवार ने बताया कि किसान छुट्टा गोवंश को गोआश्रय केंद्रों में संचालकों के सुपुर्द कर दें। क्षेत्र में पांच गोआश्रय केंद्र संचालित हैं।
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खेतों में फसलों की रखवाली के लिए किसानों ने कहीं झटका मशीन, लकड़ियों की बाड़ तो कहीं कंटीले तार लगा रखे हैं। भूख प्यास से व्याकुल गोवंश मौका लगते ही पेट की आग बुझाने के लिए लाठी-डंडों से कुटते पिटते खेतों में घुस पड़ते हैं।
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70 वर्षीय मेहरबान सिंह यादव कहते हैं सारी उम्र खेतीबाड़ी करते निकल गए। जानवरों से इतनी समस्या कभहूं नई भैई, सिगरे जतन कर हारे गैंयन गाय ने फिरहू खेत उजारे। पलक झपकते ही सफा चट कर देती है।
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मुकेश कठेरिया का कहना है कि कभी जंगली सूअर आकर फसलों को नुकसान कर देते हैं। हालात यह हो गए हैं कि जैसे गाड़ी चलाते समय निगाह हटी और दुर्घटना घटी। उसी तरीके से खेतों से जरा भी दूर जाओ तो जानवरों का फसलों पर हमला हो जाता है।
किशन लाल बताते हैं कि जानवरों से फसलों की रखवाली के लिए 24 घंटे एक आदमी मुस्तैद रहता है। पशु चिकित्सा अधिकारी चकरनगर डॉ. राहुल शंखवार ने बताया कि किसान छुट्टा गोवंश को गोआश्रय केंद्रों में संचालकों के सुपुर्द कर दें। क्षेत्र में पांच गोआश्रय केंद्र संचालित हैं।