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Etawah News: ब्लड बैंक में खून की कमी सिर्फ नौ यूनिट खून बचा
Fri, 17 Nov 2023 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Fri, 17 Nov 2023 12:08 AM IST
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इटावा। जिला अस्पताल का ब्लड बैंक लगातार पांच दिन से खून की कमी से जूझ रहा है। 600 यूनिट ब्लड की क्षमता वाले इस ब्लड बैंक में जरूरतमंदों की जान बचाने के लिए नौ यूनिट खून बचा है। मरीजों को खून देने पर दूसरा खून नहीं मिल पा रहा है।
ब्लड बैंक का उद्घाटन छह अक्तूबर 1998 को तत्कालीन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री रमापति शास्त्री ने किया था। 25 साल बाद हालात ये हैं कि ब्लड होने की स्थिति को दर्शाने वाले बोर्ड में 11 से 15 नवंबर तक ब्लड के आठों ग्रुपों के रक्त की मात्रा कम बनी हुई है। ब्लड बैंक में ए पाॅजिटिव, ए निगेटिव, बी पॉजिटिव, बी निगेटिव, एबी पॉजिटिव, एबी निगेटिव, ओ पॉजिटिव व ओ निगेटिव ब्लड की उपलब्धता रखने का दावा तो किया जाता है। लेकिन हालात बिल्कुल इसके उलट है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की काउंसलर रजनी निगम ने बताया कि 16 नबंवर को नौ यूनिट खून है। इनमें ए पॉजिटिव के दो और बी पॉजिटिव के तीन यूनिट खून हैं। जबकि ए निगेटिव, एबी पॉजिटिव,एबी निगेटिव व ओ पॉजिटिव ग्रुप का एक-एक यूनिट रिजर्व में है। लेकिन बी निगेटिव और ओ निगेटिव ग्रुप का खून शून्य है। आगामी 27 नवंबर को ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।
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इस समस्या से परेशान होने वाले गांव बिठौली चौबिया निवासी शिव कुमार ने बताया कि पत्नी की डिलीवरी होनी थी, शरीर में खून की मात्रा छह प्वाइंट थी। डॉक्टरों के खून कमी बताते हुए खून चढ़वाने की सलाह दी थी। पत्नी के ब्लड का ग्रुप ओ पॉजिटिव था। लेकिन जिला अस्पताल में बदले में ब्लड नहीं मिला।
इस पर रक्तदाता ग्रुप में फोन करके शरद तिवारी से संपर्क किया, उन्होंने एक महिला रक्तदाता को भेजा लेकिन उनका ग्रुप दूसरा था। इसके बाद इटावा में रहने वाले दोस्त शिवम को बुलवाया जिनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था। इसके बाद पत्नी को ब्लड चढ़ सका। बताया न मिलने पर प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ता।
वर्जन
रक्तदान करने के लिए समाजसेवी संस्थाओं से कैंप लगवाने के लिए संपर्क किया जा रहा है। इच्छुक रक्तदाताओं से अपील करते हैं कि वह रक्तदान करके जरूरतमंदाें की मदद करने के लिए आगे आएं। -डॉ. एमएम आर्या, सीएमएस, जिला अस्पताल
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ब्लड बैंक का उद्घाटन छह अक्तूबर 1998 को तत्कालीन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री रमापति शास्त्री ने किया था। 25 साल बाद हालात ये हैं कि ब्लड होने की स्थिति को दर्शाने वाले बोर्ड में 11 से 15 नवंबर तक ब्लड के आठों ग्रुपों के रक्त की मात्रा कम बनी हुई है। ब्लड बैंक में ए पाॅजिटिव, ए निगेटिव, बी पॉजिटिव, बी निगेटिव, एबी पॉजिटिव, एबी निगेटिव, ओ पॉजिटिव व ओ निगेटिव ब्लड की उपलब्धता रखने का दावा तो किया जाता है। लेकिन हालात बिल्कुल इसके उलट है।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की काउंसलर रजनी निगम ने बताया कि 16 नबंवर को नौ यूनिट खून है। इनमें ए पॉजिटिव के दो और बी पॉजिटिव के तीन यूनिट खून हैं। जबकि ए निगेटिव, एबी पॉजिटिव,एबी निगेटिव व ओ पॉजिटिव ग्रुप का एक-एक यूनिट रिजर्व में है। लेकिन बी निगेटिव और ओ निगेटिव ग्रुप का खून शून्य है। आगामी 27 नवंबर को ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।
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इस समस्या से परेशान होने वाले गांव बिठौली चौबिया निवासी शिव कुमार ने बताया कि पत्नी की डिलीवरी होनी थी, शरीर में खून की मात्रा छह प्वाइंट थी। डॉक्टरों के खून कमी बताते हुए खून चढ़वाने की सलाह दी थी। पत्नी के ब्लड का ग्रुप ओ पॉजिटिव था। लेकिन जिला अस्पताल में बदले में ब्लड नहीं मिला।
इस पर रक्तदाता ग्रुप में फोन करके शरद तिवारी से संपर्क किया, उन्होंने एक महिला रक्तदाता को भेजा लेकिन उनका ग्रुप दूसरा था। इसके बाद इटावा में रहने वाले दोस्त शिवम को बुलवाया जिनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था। इसके बाद पत्नी को ब्लड चढ़ सका। बताया न मिलने पर प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ता।
वर्जन
रक्तदान करने के लिए समाजसेवी संस्थाओं से कैंप लगवाने के लिए संपर्क किया जा रहा है। इच्छुक रक्तदाताओं से अपील करते हैं कि वह रक्तदान करके जरूरतमंदाें की मदद करने के लिए आगे आएं। -डॉ. एमएम आर्या, सीएमएस, जिला अस्पताल