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Etawah News: काम के तनाव से बढ़ रहा युवाओं का ब्लड प्रेशर, पड़ रहा ब्रेन स्ट्रोक
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इटावा/सैफई। प्रतिस्पर्धा की होड़ और काम का तनाव युवाओं में भी बीपी, शुगर और माइग्रेन की समस्या पैदा कर रहा है। तनाव के कारण बीपी बढ़ने से ब्रेन स्ट्रोक और ब्लाकेज के मामले बढ़ रहे हैं। सैफई मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में करीब 300 मरीज आ रहे हैं। इनमें 30 फीसदी मरीज युवा हैं।
सैफई मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग की ओपीडी सप्ताह में दो दिन चलती है। इसमें आ रहे युवा मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक और नसें ब्लॉकेज होने की समस्या सामने आ रही है। इसका कारण युवाओं में तनाव की वजह से बीपी, शुगर और माइग्रेन की दिक्कत होना है।
प्रति कुलपति व न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर रमाकांत यादव ने बताया कि स्ट्रोक के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। यदि सभी नियमित बीपी की जांच करवाएं तो काफी हद तक इस समस्या से बच सकते हैं। ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद मरीज को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचा दिया जाता है तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। साथ ही धमनी में रक्त के जमाव को हटाकर विकलांगता को भी रोका जा सकता है। बताया कि प्रतिस्पर्धा की होड़ में युवाओं में तनाव बढ़ रहा है और वह ऐसी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। युवाओं में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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ब्रेन स्ट्रोक व ब्लॉकेज के लक्षण
न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप यादव ने बताया कि मरीज में इस तरह की दिक्कत आने से पहले कुछ लक्षण आते हैं। उन्हें पहचानकर तत्काल उपचार लेना बहुत आवश्यक है। बताया कि आंखें के सामने अंधेरा छाना, चेहरा टेढ़ा होना, हाथ में जान न रहे, आधे सिर में लगातार दर्द रहना, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लॉकेज के लक्षण हैं।
इस तरह करें बचाव
तनाव नहीं लेना चाहिए। बीपी और शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए। तली चीजें खाने से बचना चाहिए। नमक का सेवन भी कम करें। प्रतिदिन टहलने के लिए जाएं। धूम्रपान व नशा न करके भी इस तरह की बीमारी से बचा जा सकता है।
युवतियां माइग्रेन की सबसे ज्यादा शिकार
डॉ. संदीप यादव ने बताया कि सैफई मेडिकल में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या में युवतियां भी हैं। इनमें सबसे ज्यादा माइग्रेन से पीड़ित हैं।
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सैफई मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग की ओपीडी सप्ताह में दो दिन चलती है। इसमें आ रहे युवा मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक और नसें ब्लॉकेज होने की समस्या सामने आ रही है। इसका कारण युवाओं में तनाव की वजह से बीपी, शुगर और माइग्रेन की दिक्कत होना है।
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प्रति कुलपति व न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर रमाकांत यादव ने बताया कि स्ट्रोक के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। यदि सभी नियमित बीपी की जांच करवाएं तो काफी हद तक इस समस्या से बच सकते हैं। ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद मरीज को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचा दिया जाता है तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। साथ ही धमनी में रक्त के जमाव को हटाकर विकलांगता को भी रोका जा सकता है। बताया कि प्रतिस्पर्धा की होड़ में युवाओं में तनाव बढ़ रहा है और वह ऐसी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। युवाओं में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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ब्रेन स्ट्रोक व ब्लॉकेज के लक्षण
न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप यादव ने बताया कि मरीज में इस तरह की दिक्कत आने से पहले कुछ लक्षण आते हैं। उन्हें पहचानकर तत्काल उपचार लेना बहुत आवश्यक है। बताया कि आंखें के सामने अंधेरा छाना, चेहरा टेढ़ा होना, हाथ में जान न रहे, आधे सिर में लगातार दर्द रहना, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लॉकेज के लक्षण हैं।
इस तरह करें बचाव
तनाव नहीं लेना चाहिए। बीपी और शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए। तली चीजें खाने से बचना चाहिए। नमक का सेवन भी कम करें। प्रतिदिन टहलने के लिए जाएं। धूम्रपान व नशा न करके भी इस तरह की बीमारी से बचा जा सकता है।
युवतियां माइग्रेन की सबसे ज्यादा शिकार
डॉ. संदीप यादव ने बताया कि सैफई मेडिकल में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या में युवतियां भी हैं। इनमें सबसे ज्यादा माइग्रेन से पीड़ित हैं।