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नहीं थम रहा है गोशाला में गोवंश के मरने का सिलसिला
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इटावा। बसरेहर ब्लाक की ग्राम पंचायत परौली रामायन गोशाला में गोवंश के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले तीन महीनों में यहां करीब आधा सैकड़ा गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोवंशों की मौत होने पर हर बार अफसर यहां आते हैं और व्यवस्था बेहतर बनाने के निर्देश देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। लेकिन गोशाला की हालत में सुधार नहीं हो रहा है।
परौली रमायन की गोशाला में इस समय 800 गोवंश हैं। इतनी बड़ी गोशाला में गोंवंश के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। जरा सी बारिश हो जाने के बाद पूरे गोशाला में दलदल हो जाता है। यही कारण है कि बीमार और ज्यादा उम्र के गोवंश बीमार पड़कर दम तोड़ देते हैं। गोशाला में गोवंश को हरा चारा भी नहीं मिल पा रहा है। गोशाला के पास जो जमीन है उसमें हरा चारा पैदा नहीं हो पा रहा है। गोवंश को
सूखा भूसा ही दिया जा रहा है। प्रति गोवंश 30 रुपया भूसा के लिए मिलता है। इसमें हरा चारा और दलिया आदि देना संभव नहीं है। गोशाला का संचालन पहले जय बालाजी समिति कटैयापुर करती थी। अब उसका एक साल का अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद अगस्त से गोशाला का संचालन ग्राम पंचायत कर रही है। ग्राम पंचायत ने गोवंश की देखरेख के लिए 14 कर्मचारी हैं। इसके बाद भी गोवंशों की हालत में सुधार नहीं हो रहा है।
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गोवंशों की देखरेख करने व उनका इलाज करने के लिए ब्लाक के दो पशु चिकित्सकों की तैनाती है। ये पशु चिकित्सक कभी कभार ही आते है। ऐसे में देखरेख के अभाव में गोवंश बीमार पड़ रहे हैं। ग्रामीण राजाराम, कल्लू, श्यामजी आदि का कहना है कि चिकित्सकों की अनदेखी से गोवंश बीमार पड़ कर मर रहे हैं। ग्राम पंचायत भी इसकी देखरेख नहीं कर पा रही है।
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परौली रमायन की गोशाला में इस समय 800 गोवंश हैं। इतनी बड़ी गोशाला में गोंवंश के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। जरा सी बारिश हो जाने के बाद पूरे गोशाला में दलदल हो जाता है। यही कारण है कि बीमार और ज्यादा उम्र के गोवंश बीमार पड़कर दम तोड़ देते हैं। गोशाला में गोवंश को हरा चारा भी नहीं मिल पा रहा है। गोशाला के पास जो जमीन है उसमें हरा चारा पैदा नहीं हो पा रहा है। गोवंश को
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सूखा भूसा ही दिया जा रहा है। प्रति गोवंश 30 रुपया भूसा के लिए मिलता है। इसमें हरा चारा और दलिया आदि देना संभव नहीं है। गोशाला का संचालन पहले जय बालाजी समिति कटैयापुर करती थी। अब उसका एक साल का अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद अगस्त से गोशाला का संचालन ग्राम पंचायत कर रही है। ग्राम पंचायत ने गोवंश की देखरेख के लिए 14 कर्मचारी हैं। इसके बाद भी गोवंशों की हालत में सुधार नहीं हो रहा है।
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गोवंशों की देखरेख करने व उनका इलाज करने के लिए ब्लाक के दो पशु चिकित्सकों की तैनाती है। ये पशु चिकित्सक कभी कभार ही आते है। ऐसे में देखरेख के अभाव में गोवंश बीमार पड़ रहे हैं। ग्रामीण राजाराम, कल्लू, श्यामजी आदि का कहना है कि चिकित्सकों की अनदेखी से गोवंश बीमार पड़ कर मर रहे हैं। ग्राम पंचायत भी इसकी देखरेख नहीं कर पा रही है।