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Etawah News: नीलामी की नहीं मिली स्वीकृति, दौड़ती रहेंगी बूढ़ी बसें

Tue, 06 Feb 2024 03:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Feb 2024 03:03 AM IST
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Approval for auction not received, old buses will continue running
इटावा। मियाद पूरी कर चुकीं 13 बसों की नीलाम करने की स्वीकृति इस बार भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में बूढ़ी बसें अभी सवारियां ढोती रहेंगी। दरअसल, पुरानी बसों के नीलाम होने के बाद ही 13 नई बसें जिले को मिलेंगी। ऐसे में इन बसों के मिलने में भी अड़ंगा लगा है।
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इटावा डिपो के पास वर्तमान में कुल 77 बसें हैं। इनमें से 13 बसें ऐसी हैं, जो दस साल अथवा 11 लाख किलोमीटर की मियाद पूरी कर चुकीं है। यह बसें नीलामी प्रक्रिया में हैं। एक साल से पुरानी बसों को हटाने की कवायद चल रही है। नीलामी के लिए छह बार स्थानीय अधिकारी पत्र लिख चुके हैं लेकिन अभी तक मुख्यालय ने नीलामी के लिए स्वीकृति नहीं दी गई है।
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उम्मीद थी कि नए साल में बसों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और नई बसें मिल जाएंगी, लेकिन मुख्यालय ने इस बार भी स्वीकृति जारी नहीं की। कोई स्पष्ट कारण भी न बताए जाने से अधिकारी परेशान हैं। बसों की नीलामी न हो पाने की वजह से बूढ़ी बसों को ही डेंटिंग-पेंटिंग कराकर दौड़ाया जा रहा है। कई बार यह बसें बीच रास्ते खराब भी हो चुकी हैं। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी।
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दिल्ली नहीं जा पा रहीं पुरानी बसें

इटावा डिपो को अगस्त 2022 में दो नई बसें मिलीं थीं। इसके बाद से नई बसें मिलने की आस ही लगी हुई है। एक नवंबर 2023 से दिल्ली में सिर्फ बीएस सिक्स बसों को प्रवेश मिलने की वजह से डिपो की 13 बसें ही दिल्ली में प्रवेश कर पा रहीं हैं। जबकि 31 अक्तूबर तक करीब 22 बसें दिल्ली जातीं थीं। इस वजह से आय घटने से निगम के अधिकारी परेशान हैं।

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इन रूटों पर दौड़ाई जा रही पुरानी बसें
कानपुर, आगरा और मैनपुरी के रूट पर तीन से चार पुरानी बसें दौड़ाई जा रही हैं। ऐसे में किराया पूरा देने के बावजूद यात्री फटी सीटों, आवाज अधिक करने वाली बसों में यात्रा करने के लिए मजबूर हैं। कई बार बसें खराब होने पर यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है।



वर्जन ---
राज्य मुख्यालय से बसों की नीलामी नहीं किए जाने से नई बसें मिलने में देरी हो रही है। 13 बसों की नीलामी होने पर करीब 15 नई बसें मिल सकती हैं। बसों की नीलामी के लिए गत अप्रैल- मई में मुख्यालय को पत्र भेजा गया। जून के अलावा जनवरी में भी बसों की नीलामी नहीं हो सकीं। उम्मीद नहीं छोड़ी है, शायद फरवरी में कुछ बसें मिल जाएं।
- डीएम सक्सेना, एआरएम।
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