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ओएसडी जेएस कलसी की नियुक्ति नियम सम्मत है: कुलपति
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संवाद न्यूज एजेंसी
सैफई।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति डॉ. राजकुमार ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) के पक्ष में उतर आए हैं। एक दिन पहले शासनादेश के बाद हटाए गए ओएसडी जेएस कलसी की नियुक्ति को उन्होंने नियम सम्मत बताया है।
मंगलवार को उन्होंने बताया कि सैफई विश्वविद्यालय के अधिनियम की धारा-48 में उल्लेख है कि जब तक उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की नियमावली नहीं बन जाती तब तक संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ की नियमावली लागू रहेगी।
संजय गांधी संस्थान की नियमावली के नियम-97 के अनुसार यदि संस्थान को किसी संकाय के सदस्य या किसी अन्य संकाय से भिन्न अधिकारी की सेवाओं की आवश्यकता हो तो सेवानिवृत्ति के बाद नियोजक ऐसे व्यक्ति को संविदा पर पुन: नियोजित कर सकता है। नियमावली का पालन करते हुए ही जीएस कलसी की नियुक्ति की गई।
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कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में 31 अगस्त, 2020 से निदेशक वित्त का पद खाली है। शासन से बार-बार अधिकारी की मांग की गई। दो बार जिन अधिकारियों की नियुक्ति की गई उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं गया था। डॉ. राजकुमार ने कहा कि कुछ तत्व विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने में लगे हैं। कुछ लोगों ने शासन में गलत सूचनाएं भेजकर ओएसडी को हटाए जाने का आदेश पारित कराया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में शासन को वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है।
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सैफई।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति डॉ. राजकुमार ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) के पक्ष में उतर आए हैं। एक दिन पहले शासनादेश के बाद हटाए गए ओएसडी जेएस कलसी की नियुक्ति को उन्होंने नियम सम्मत बताया है।
मंगलवार को उन्होंने बताया कि सैफई विश्वविद्यालय के अधिनियम की धारा-48 में उल्लेख है कि जब तक उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की नियमावली नहीं बन जाती तब तक संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ की नियमावली लागू रहेगी।
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संजय गांधी संस्थान की नियमावली के नियम-97 के अनुसार यदि संस्थान को किसी संकाय के सदस्य या किसी अन्य संकाय से भिन्न अधिकारी की सेवाओं की आवश्यकता हो तो सेवानिवृत्ति के बाद नियोजक ऐसे व्यक्ति को संविदा पर पुन: नियोजित कर सकता है। नियमावली का पालन करते हुए ही जीएस कलसी की नियुक्ति की गई।
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कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में 31 अगस्त, 2020 से निदेशक वित्त का पद खाली है। शासन से बार-बार अधिकारी की मांग की गई। दो बार जिन अधिकारियों की नियुक्ति की गई उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं गया था। डॉ. राजकुमार ने कहा कि कुछ तत्व विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने में लगे हैं। कुछ लोगों ने शासन में गलत सूचनाएं भेजकर ओएसडी को हटाए जाने का आदेश पारित कराया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में शासन को वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है।