इटावा। करीब एक वर्ष तक तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चले किसानों के आंदोलन ने आखिरकार मोदी जी के घमंड को चकनाचूर करते हुए उन्हें कृषि कानून वापस लेने को मजबूर कर दिया। किसानों के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश करने वाली भाजपा को आगामी चुनावों में अपना ही अस्तित्व खतरे में नजर आने लगा था। 700 से अधिक आंदोलनकारी किसानों की शहादत का परिणाम है कि प्रधानमंत्री को अपने कदम वापस लेने पड़े हैं। यह बातें आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष संजीव शाक्य ने कही।
उन्होंने कहा कि कुंभकरण 6 महीने में जगता था, पर भारत सरकार को जगने में पूरा एक वर्ष लग गया। किसानों को सर्दी, गर्मी और बरसात के साथ पुलिस के लाठी, डंडे, पानी की बौछार, रास्ते अवरुद्ध करके, कीलें लगाकर परेशान किया गया। सत्ता के लालच में पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में हार के डर से फैसला वापस लिया गया है। इस मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई।