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Etawah News: सावन में दुर्लभ संयोग, चार सोमवार संग पांच-पांच गुरुवार-शुक्रवार
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इटावा। भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले श्रावण (सावन) मास की शुरुआत इस वर्ष 30 जुलाई से होगी। इस बार सावन कई शुभ संयोग लेकर आ रहा है। पूरे महीने में चार सोमवार पड़ेंगे, जबकि गुरुवार और शुक्रवार पांच-पांच बार आएंगे। वहीं सावन का समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग शिव उपासना के साथ धर्म, समृद्धि और पारिवारिक सुख का विशेष योग बना रहा है।
आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। महिलाएं और युवतियां अच्छे वैवाहिक जीवन तथा परिवार की खुशहाली के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं। उन्होंने बताया कि सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त को पड़ेगा। दूसरा सोमवार 10 अगस्त को रहेगा, जिस दिन प्रदोष व्रत का भी संयोग बनेगा। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को होगा और इसी दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को रहेगा।
आचार्य पंडित कपिलदेव त्रिपाठी ने बताया कि इस बार सावन में गुरुवार और शुक्रवार पांच-पांच बार पड़ना भी विशेष शुभ माना जा रहा है। गुरुवार देवगुरु बृहस्पति का दिन है, जो धर्म, ज्ञान, भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है। वहीं, शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन होने से ऐश्वर्य, सुख-संपन्नता और धन लाभ के योग मजबूत होते हैं। ऐसे में शिव आराधना के साथ इन दोनों ग्रहों की शुभता का प्रभाव भी पूरे महीने देखने को मिलेगा।
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आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। महिलाएं और युवतियां अच्छे वैवाहिक जीवन तथा परिवार की खुशहाली के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं। उन्होंने बताया कि सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त को पड़ेगा। दूसरा सोमवार 10 अगस्त को रहेगा, जिस दिन प्रदोष व्रत का भी संयोग बनेगा। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को होगा और इसी दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को रहेगा।
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आचार्य पंडित कपिलदेव त्रिपाठी ने बताया कि इस बार सावन में गुरुवार और शुक्रवार पांच-पांच बार पड़ना भी विशेष शुभ माना जा रहा है। गुरुवार देवगुरु बृहस्पति का दिन है, जो धर्म, ज्ञान, भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है। वहीं, शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन होने से ऐश्वर्य, सुख-संपन्नता और धन लाभ के योग मजबूत होते हैं। ऐसे में शिव आराधना के साथ इन दोनों ग्रहों की शुभता का प्रभाव भी पूरे महीने देखने को मिलेगा।
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