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रकम मिल गई फिर भी नहीं बनवाए इंदिरा आवास

Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
Etawah
Etawah Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
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इटावा। सरकार ने गरीबों को घर बनाने के लिए रकम मुहैया कराई, लेकिन तमाम लाभार्थियों ने घर न बना कर यह रकम या तो अपने अन्य कामों में खर्च कर ली या फिर खाते से ही नहीं निकाली है। अब जब इसकी जानकारी प्रशासन को हुई तो डीएम के निर्देश पर सभी लाभार्थियों के घर निर्माण की जांच की जा रही है। अधिकारी देख रहे है कि उनके द्वारा घर बनवाए गए या नहीं।
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जिले में बीपीएल की स्थाई पात्रता सूची के जरिए कुल 2427 गरीबों को घर बनवाने के लिए पहली किस्त 33,750 रुपए और दूसरी किस्त में 11250 रुपए मिलाकर कुल 45 हजार रुपए मुहैया कराए गए। यह धनराशि मार्च में उनके खातों में पहुंचा दी गई। नियमानुसार राशि प्राप्त होने के 45 दिन में एक कमरा और एक बरामदा बनवा लेना चाहिए। चाहे महंगाई का असर रहा हो या उनकी निर्धनता आड़े आई हो। तमाम लाभार्थियों ने रकम मिलने के बाद भी घर नहीं बनवाए। जानकारी के अनुसार ऐसे कई लाभार्थी हैं जिन्होंने उक्त रकम घर बनवाने के बजाय अपने अन्य कामों में लगा ली। ऐसे शासन की मंशा फलीभूत होती नहीं दिखाई दे रही।
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कितने घर बने यह पता नहीं
-कुल 2427 गरीबों को 45-45 हजार रुपए मुहैया कराए गए है। इनमें महेवा ब्लाक के 589 लाभार्थी, भरथना के 387, जसवंतनगर के 300, बसरेहर के 281, ताखा के 242, चकरनगर के 237, बढ़पुरा के 226 और सैफई के 165 लाभार्थी शामिल हैं। फिलहाल प्रशासन को यह जानकारी नहीं है कि कितने लाभार्थियों ने घर नहीं बनवाए। इस संबंध में डीआरडीए के परियोजना निदेशक जेपी रस्तोगी का कहना है कि इसी की जांच हो रही है कि कितने लोगों ने घर नहीं बनवाए हैं। यह जांच ब्लाक स्तर पर बीडीओ कर रहे हैं।
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अनुबंध पत्र न लेने हुई समस्या
-इंदिरा आवास की योजना 1985 से शुरू हुई है। वर्ष 2006 से लाभार्थियों का चयन बीपीएल की स्थाई पात्रता सूची से किया जा रहा है। पहले लाभार्थियों से आवेदन पत्र व अनुबंध पत्र भी लिया जाता था। इसमें लाभार्थी से लिखवा कर लिया जाता था कि वह 45 दिन के अंदर घर बनवा लेगा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस अनुबंध पत्र की अनिवार्यता नहीं रखी गई। इससे तमाम लाभार्थियों को बगैर अनुबंध पत्र के धनराशि मिल गई। अब सत्यापन के तहत लाभार्थी से अनुबंध पत्र भी लिया जा रहा है। इससे उस पर घर बनाने का दबाव बनाया जा सके। विभागीय कर्मियों की माने तो इस सत्यापन कार्य से यह भी स्पष्ट होगा कि कितने लाभार्थियों से अनुबंध पत्र नहीं लिए गए।
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