मुर्दे भी ले रहे पेंशन

Etawah Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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केस हिस्ट्री- 1
भरथना ब्लाक के कछपुरा गांव निवासी श्रीदेवी विधवा पेंशन के साथ-साथ महामाया पेंशन भी ले रही थीं। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से सहकारी बैंक में उनकी पेंशन नियमित रूप से भेजी गई।
केस हिस्ट्री- 2
मुगलपुर नरैनी की किशोरी देवी और सब्दलपुर की कमलेश कुमारी आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं लेकिन बीते कई सालों से विधवा पेंशन का भी लाभ ले रही हैं। यहां भी विभागीय कर्मचारियों और भौतिक सत्यापन करने वालों की मिलीभगत सामने आई।
केस हिस्ट्री-3
लुधियानी गांव की मीना देवी ने दूसरी शादी कर ली पर विधवा पेंशन का लालच नहीं गया। कई बार भौतिक सत्यापन हुआ लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि शादीशुदा को पेंशन का लाभ क्यों।
इटावा। कछपुरा की श्रीदेवी और मुगलपुर की किशोरी देवी तो चंद उदाहरण हैं लेकिन जिले में विभिन्न योजनाओं में पेंशन के नाम पर खूब खेल हुआ है। बसपा शासन काल में तो कई बार भौतिक सत्यापन भी हुए लेकिन ऐसे अपात्रों का कोई बाल भी बांका नहीं कर सका। जाहिर सी बात है विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से पेंशन के नाम की रेवड़ियां खूब बांटी गईं। सरकार बदली तो अपात्रों को चिह्नित करने का काम शुरू हुआ तो यह संख्या दो हजार से ज्यादा का आंकड़ा पार कर गई। अभी यह संख्या और बढ़ सकती है। गरीबों की योजनाओं में अपात्रों की घुसपैठ ने पात्रों के हक डकारा। विधवावस्था, वृद्धावस्था एवं विकलांग पेंशन धारकों के सत्यापन से यह बात साबित हो रही है। चौंकाने वाले तथ्य हैं कि 2203 पेंशन गलत हाथों तक पहुंच रही थी। इनमें 1676 पेंशनधारकों की मौत हो चुकी है जबकि बाकी अपात्र बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे अव्वल समाज कल्याण विभाग रहा।
समाज कल्याण विभाग
पेंशनधारकों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पाएंगे कि समाज कल्याण विभाग से वृद्धावस्था पेंशन पाने वालों की संख्या 39,755 है। सत्यापन हुआ तो इस संख्या में 1262 पेंशनधारक मृतक पाए गए। 338 ऐसे लोग पेंशन का लाभ लेते मिले जो अन्य कारणों से अपात्र हैं। यानि कोई पेंशनधारक डबल पेंशन पा रहा था। किसी का बालिग बेटा पेंशन पा रहा था।
प्रोबेशन विभाग
जिला प्रोबेशन कार्यालय से विधवा पेंशन मिलती है। विभाग से 17,131 विधवाओं को पेंशन मुहैया होती है। इस पेंशन में भी गड़बड़झाला सामने आया है। 304 विधवाओं की मौत के बाद भी पेंशन का खाता चलता रहा। 153 ऐसे महिलाएं पेंशन प्राप्त करती रहीं, जिन्होंने या तो दूसरी शादी कर ली है या फिर आंगनबाड़ी कार्यकत्री बन चुकी हैं या फिर रोजगार का कोई दूसरा साधन अपना लिया है। विभाग में 800 आवेदन धनभाव के चलते लंबित हैं।
विकलांग विभाग
अब बात तीसरी पेंशन अर्थात विकलांग विभाग की। यहां से 8,892 विकलांगों को पेंशन मिल रही है। सत्यापन में साफ हुआ कि 110 पेंशनधारक मर चुके हैं। इनकी पेंशन कोई और खा रहा था। 36 ऐसे लोग पेंशन का लाभ ले रहे थे, जो नौकरी से जुड़ चुके हैं। कुछ विकलांग महिलाओं की शादी हो चुकी है। इस विभाग में 1132 विकलांगों के फार्म अपनी बारी के आने की बाट जोह रहे हैं।
धनराशि भेजने से पूर्व होता है सत्यापन
जिला प्रोबेशन अधिकारी आकांक्षा अग्रवाल के पास समाज कल्याण अधिकारी का भी चार्ज है। उन्होंने बताया कि पेंशन का भुगतान वर्ष में दो बार जून व नवंबर माह में होता है। पेंशनधारकों के बैंक खाते में धनराशि पहुंचाने से पूर्व सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन का यह कार्य ग्राम पंचायत सेक्रेटरी आदि के जिम्मे रहता है। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी रजनीश पांडेय के अनुसार ऐसे अपात्र लोगों को नोटिस भेजने की कार्रवाई की गई है। उनसे वसूली की जाएगी। इस काम के दोषियों पर कार्रवाई होगी।
फर्जी कागजातों से की नौकरी, रिपोर्ट
इटावा। बढ़पुरा थाने के पूठन गांव निवासी खजाम सिंह पुत्र उम्मेद सिंह ने गांव के ही रामलखन पुत्र तेजपाल व उसके दो साथियों के खिलाफ फर्जी तरीके से कागजात तैयार कर सेना में भर्ती होने का मामला दर्ज कराया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों पक्षों में पार्टी बंदी चलती है। खजाम सिंह के हाथ ऐसे तथ्य लगे जिसे लेकर वह कोर्ट चले गए। कोर्ट के आदेश पर रामलखन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। रामलखन नौकरी से रिटायर्ड हो चुके हैं।

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