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मोहे बिटिया न कीजो

Tue, 09 Dec 2014 05:30 AM IST
Etawah
Etawah Updated Tue, 09 Dec 2014 05:30 AM IST
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घर के भीतर हो या घर के बाहर महिलाओं पर जिले में साल-दर-साल अपराध बढ़ते जा रहे हैं। कभी हवस मिटाने के लिए महिलाओं को शिकार बनाया जा रहा है तो कभी एक तरफा प्यार में किसी पर तेजाब उड़ेला जा रहा है। सीएम के जिले में महिलाओं के साथ अपराधों की फेहरिस्त काफी लंबी है। स्थिति यह है कि महिलाएं घर से अकेले निकलने में घबराती हैं। असुरक्षा की भावना उनके दिलोदिमाग में इस तरह घुसी है कि उन्हें अपने महिला होने पर ही कोफ्त होने लगा है। अगर कभी पीड़ित महिला की किसी ने चीख सुनी होगी तो शायद उसे यहीं सुनाई देता होगा कि हे भगवान अगले जनम मोहे बिटिया न कीजौ।
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इटावा। मुख्यमंत्री के जिले में महिला उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कभी महिला की आबरू लूटी जा रही है तो कभी उसे बेइज्जत किया जाता है। पुलिस पर से विश्वास उठ चुका है। क्योंकि कहीं न कहीं बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस भी जिम्मेदार है। वारदात के बाद पुलिस कार्रवाई करने में ढिलाई बरतती है। दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्याओं का भी ग्राफ कम नहीं है। बीते तीन वर्षों में जिले में बलात्कार के 55 मामले सरकारी फाइलों में दर्ज हैं। छेड़छाड़ के 123 मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। वहीं दहेज की खातिर 75 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया गया।
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वैसे तो महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में कई योजनाएं संचालित हैं। शासन ने महिला सुरक्षा के लिए वूमेन हेल्पलाइन 1090 शुरू करने के साथ ही निर्भया फंड भी स्थापित किया है। अफसोस इतनी सारी कवायद के बाद भी महिला उत्पीड़न पर अंकुश नहीं लग रहा है। समाज के बदलते चेहरे से महिलाएं बुरी तरह से सहमी हुई हैं। स्कूल कालेजों के आसपास छात्राओं के साथ छेड़छाड़ आम बात हो गई है। महिला अपनी फरियाद लेकर थाने चौकी जाती हैं तो उन्हें यहां भी पुलिसिया व्यवहार से अपमानित होना पड़ता है। महिला उत्पीड़न के कई मामलों में तो थाना पुलिस रिपोर्ट दर्ज करना तक मुनासिब नहीं समझती। इसीलिए आला अफसरों की चौखटों पर फरियादी महिलाओं की संख्या कम नहीं पड़ रही है।
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केस-1
इकदिल थाना क्षेत्र के एक गांव में 18 जुलाई 2013 को दबंगों ने एक युवती को बंधक बनाकर उसके साथ बलात्कार किया। बाद में उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। घायल युवती ने सैफई के रिम्स में दो दिन बाद दम तोड़ दिया। इस वारदात की गूंज प्रदेश की विधानसभा तक सुनाई दी थी।
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केस-2
लवेदी थाना क्षेत्र के एक गांव में 6 अप्रैल 2014 को दिनदहाड़े घर के बाहर से एक युवती का अपहरण कर लिया गया। युवती को बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद युवती के शव को गांव के बाहर खेत में ले जाकर जलाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने घटना के विरोध में लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करके अपनी आवाज को बुलंद की थी।
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केस-3
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत कांशीराम कालोनी में एकतरफा प्यार के चलते कालोनी में ही रहने वाले युवक इमरान ने खुशबू के ऊपर तेजाब उड़ेल दिया था। एसिड अटैक में खुशबू बुरी तरह से झुलस गई थी। आज भी खुशबू का इलाज चल रहा है। शरीर पर तेजाब के जख्म हर वक्त उसे युवक की हैवानियत को याद दिला रहे हैं।
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केस-4
चौबिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत 3 सितंबर को एक गांव में छेड़खानी का विरोध करने पर युवक ने किशोरी के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। इससे किशोरी बुरी तरह से झुलस गई थी। बाद में रिम्स में किशोरी ने दम तोड़ दिया था।

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यह सही है कि महिला अपराध बढ़ रहे हैं, पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करके जेल भी भेज रही है। अपराधों पर अंकुश लगे यह कोशिश पूरे पुलिस विभाग की है। महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए जनजागरण अभियान के तहत उन्हें जूडो कराटे का प्रशिक्षण दिलाने जाने के साथ ही 1090 को प्रभावी बनाया गया है।
-सर्वानंद सिंह यादव, एएसपी इटावा
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