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बीमारी ने छीना बुढ़ापे का सहारा, संस्कार को पैसे नहीं

Thu, 19 Jun 2014 05:31 AM IST
Etawah
Etawah Updated Thu, 19 Jun 2014 05:31 AM IST
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इटावा। जिला अस्पताल में दोपहर से लेकर शाम तक एक मां अपने बेटे के अंतिम संस्कार के लिए हर किसी से मिन्नतें करती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। दोपहर के वक्त बेटे की मौत हुई, लेकिन निर्धन मां इकलौते बेटे का अंतिम संस्कार नहीं कर पाई। जीआरपी हो या अस्पताल प्रशासन सभी अंतिम संस्कार के लिए बजट न होने का रोना रोते रहे।
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जिला चंदौली के सैयदरजा निवासी वृद्ध वृंदाकुमारी अपने इकलौते बीमार बेटे को लेकर बनारस से दिल्ली के लिए रवाना हुई। रिजर्वेशन महाबोधि एक्सप्रेस में था, लेकिन वह छूट चुकी थी। मां बेटे के साथ मगध एक्सप्रेस में सवार हो ली। इटावा स्टेशन पहुंचने से पहले बेटे संतोष चौबे (30) पुत्र स्व. शिवमूरत चौबे की हालत बिगड़ गई। जीआरपी ने संतोष को ट्रेन से उतारकर दोपहर 11:40 बजे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। इलाज के दौरान करीब एक बजे युवक ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत से दुखी मां ने सभी को अपनी माली हालत के बारे में बताया। अन्य मरीजों के तीमारदारों ने उसके गांव में फोन किया तो पता चला कि वह बेहद गरीब है और मां-बेटे ही परिवार में हैं। अंतिम संस्कार के लिए पैसे न होने के कारण मां दिनभर हर किसी से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन उसकी किसी ने फरियाद नहीं सुनी।
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अस्पताल में मौजूद लोगों ने बताया कि उन्होंने सीएमएस से मृतक का अंतिम संस्कार कराने के लिए कहा तो उन्होंने बजट न होने की बात कह दी। कुछ तीमारदारों ने चंदा करके पैसे जुटाने की कोशिश की, लेकिन यमुना घाट तक लाने और ले जाने की समस्या पैदा हो गई। महिला सुबह से लेकर देर रात तक गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसकी मदद को कोई आगे नहीं आया। अस्पताल प्रशासन ने सिटी मजिस्ट्रेट को सूचना दी। वहा से भी देर शाम तक जवाब नहीं आया। जीआरपी का तर्क था कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को तो बजट मिलता है, लेकिन वारिस वाले शवों के अंतिम संस्कार के लिए बजट नहीं मिलता। एसआई जीआरपी सुशील शर्मा ने निजी तौर पर अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद की बात कही। जिले में संचालित सैकड़ों समाजसेवी संगठनों में से किसी को इस मां की चीख और दर्द भरी पुकार नहीं सुनाई दी।
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देर शाम पूरे मामले में पत्रकारों ने दखल दिया तो मामला डीएम तक पहुंचा। सीएमएस डॉ. वीएस अग्निहोत्री ने बताया कि शव के संस्कार के लिए सरकारी तौर पर कोई बजट नहीं है। स्वयं व कुछ डाक्टरों ने आपस में चंदा करके अंतिम संस्कार के लिए पैसों का इंतजाम कर लिया है। गुरुवार को मृतक युवक के शव का अंतिम संस्कार करा दिया जाएगा।
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