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मुलायम के गढ़ में सपा को लगा तगड़ा झटका
Etawah
Updated Sun, 06 Apr 2014 05:30 AM IST
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इटावा। मुलायम के गढ़ में समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक जयवीर सिंह ने सपा का दामन छोड़ दिया है। पूर्व विधायक सैफई के मुकाबले पारपट्टी क्षेत्र में विकास कराने में भेदभाव करने पर सपा से खफा हैं। उन्होंने सपा नेताओं पर वादाखिलाफी और धोखेबाजी का भी आरोप लगाया है। उनके इस्तीफे से जिले की सियासत गरमाने लगी है।
वर्ष 1988 में ब्लाक प्रमुख और 1993 में विधायक बनने वाले एवं ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र पारपट्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सपा नेता जयवीर सिंह भदौरिया ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को इस्तीफा भेजने की बात कही। उन्होंने सपा पर कई गंभीर आरोप लगाए। बोले, सपा सरकार में पारपट्टी क्षेत्र की विकास को लेकर उपेक्षा की गई है। सारा विकास सिर्फ सैफई में ही कराया गया है। सपा में निष्ठा और ईमानदारी की कोई कद्र नहीं है। सिर्फ धोखा, झूठ और फरेबी आश्वासन देकर पार्टी के वरिष्ठ नेता अपना काम निकालते हैं। काम निकल जाने के बाद पार्टी अपने ही वफादारों को हाशिये पर कर देती है। कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह को विकास की, रोजगार देने और जनसमस्याओं की चिंता नहीं है। उन्हें सिर्फ चिंता इस बात की रहती है कि कैसे सैफई राजघराने के सदस्य संसद और विधानसभा में पहुंचें। वे दूसरी जातियों के उत्थान की सिर्फ बातें करते हैं। एकाध मजबूरी भरी स्थितियाें को छोड़कर किसी अन्य जाति के नेता को राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान नहीं देना चाहते। नेता जी सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध होने तक के लिए ही अपने साथ रखते हैं। उन्होंने तल्ख लहजे में कहाकि सपा नेतृत्व पारपट्टी क्षेत्र की जनता को धोखेबाज कहती है। जनता भी अच्छी तरह से जानती है कि धोखेबाज कौन है। लोकसभा चुनाव में जनता इसका जवाब सपा को देगी।
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-भाजपा का थाम सकते हैं दामन
ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र में जयवीर सिंह भदौरिया की पकड़ अच्छी मानी जाती है। ऐसे में सपा को उनके जाने से सीधे तौर पर झटका लगा है। वहीं चर्चा इस बात की है कि चुनाव से पहले ही भदौरिया समर्थकों के साथ भाजपा का थामन थाम लेंगे।
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-सभी दलों के काट चुके चक्कर
जयवीर सिंह भदौरिया सपा से पहले सभी दलाें में चक्कर काट चुके हैं। 1988 में बढ़पुरा ब्लाक प्रमुख बनने के बाद वह सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। वर्ष 1993 में वह सपा के टिकट पर सदर विधायक चुने गए। वर्ष 1996 में उन्होंने सपा का दामन छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए। 2005 में भाजपा छोड़कर वह कांग्रेस में चले गए। वर्ष 2007 में वह कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए। 2012 में विधानसभा चुनाव से पूर्व वह बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी ने शामिल हुए।
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वर्ष 1988 में ब्लाक प्रमुख और 1993 में विधायक बनने वाले एवं ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र पारपट्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सपा नेता जयवीर सिंह भदौरिया ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को इस्तीफा भेजने की बात कही। उन्होंने सपा पर कई गंभीर आरोप लगाए। बोले, सपा सरकार में पारपट्टी क्षेत्र की विकास को लेकर उपेक्षा की गई है। सारा विकास सिर्फ सैफई में ही कराया गया है। सपा में निष्ठा और ईमानदारी की कोई कद्र नहीं है। सिर्फ धोखा, झूठ और फरेबी आश्वासन देकर पार्टी के वरिष्ठ नेता अपना काम निकालते हैं। काम निकल जाने के बाद पार्टी अपने ही वफादारों को हाशिये पर कर देती है। कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह को विकास की, रोजगार देने और जनसमस्याओं की चिंता नहीं है। उन्हें सिर्फ चिंता इस बात की रहती है कि कैसे सैफई राजघराने के सदस्य संसद और विधानसभा में पहुंचें। वे दूसरी जातियों के उत्थान की सिर्फ बातें करते हैं। एकाध मजबूरी भरी स्थितियाें को छोड़कर किसी अन्य जाति के नेता को राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान नहीं देना चाहते। नेता जी सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध होने तक के लिए ही अपने साथ रखते हैं। उन्होंने तल्ख लहजे में कहाकि सपा नेतृत्व पारपट्टी क्षेत्र की जनता को धोखेबाज कहती है। जनता भी अच्छी तरह से जानती है कि धोखेबाज कौन है। लोकसभा चुनाव में जनता इसका जवाब सपा को देगी।
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-भाजपा का थाम सकते हैं दामन
ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र में जयवीर सिंह भदौरिया की पकड़ अच्छी मानी जाती है। ऐसे में सपा को उनके जाने से सीधे तौर पर झटका लगा है। वहीं चर्चा इस बात की है कि चुनाव से पहले ही भदौरिया समर्थकों के साथ भाजपा का थामन थाम लेंगे।
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-सभी दलों के काट चुके चक्कर
जयवीर सिंह भदौरिया सपा से पहले सभी दलाें में चक्कर काट चुके हैं। 1988 में बढ़पुरा ब्लाक प्रमुख बनने के बाद वह सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। वर्ष 1993 में वह सपा के टिकट पर सदर विधायक चुने गए। वर्ष 1996 में उन्होंने सपा का दामन छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए। 2005 में भाजपा छोड़कर वह कांग्रेस में चले गए। वर्ष 2007 में वह कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए। 2012 में विधानसभा चुनाव से पूर्व वह बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी ने शामिल हुए।