{"_id":"33-148358","slug":"Etawah-148358-33","type":"story","status":"publish","title_hn":"महीने भर से खाली है एआरटीओ की कुर्सी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महीने भर से खाली है एआरटीओ की कुर्सी
Etawah
Updated Fri, 30 Aug 2013 05:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। डग्गामार वाहनों के खिलाफ कमर कस कर बैठी रोडवेज को अब एआरटीओ प्रवर्तन की कमी खल रही है। जिले में एआरटीओ प्रवर्तन की कुर्सी खाली पड़ी होने के कारण रोडवेज अफसर डग्गामारी के खिलाफ अभियान नहीं चला पा रहे हैं। डग्गामारी से रोडवेज को हर रोज 50 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।
मौजूदा समय में जिले में एआरटीओ प्रवर्तन का पद खाली पड़ा हुआ है। एक महीने पहले एआरटीओ (प्रवर्तन) एके सिंह का यहां से हापुड़ तबादला हो गया था। तब से यह कुर्सी यहां खाली पड़ी हुई है। एआरटीओ प्रवर्तन की खाली कुर्सी रोडवेज को खल रही है। क्योंकि रोडवेज को आय बढ़ाने के निर्देश मुख्यालय से लगातार मिल रहे हैं। ऐसे में रोडवेज को नुकसान पहुंचाने वाले डग्गामार वाहनों पर अफसर अंकुश लगाना चाहते हैं। लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन के ना होने के कारण रोडवेज को एआरटीओ विभाग से सहयोग नहीं मिल पा रहा है और अफसर चाहकर भी डग्गामारी के खिलाफ अभियान नहीं चला पा रहे हैं।
डग्गामारी के कारण रोडवेज को हर महीने 15 से 20 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ता है। अगर डग्गामारी पर अंकुश लगता है तो इसका सीधा फायदा रोडवेज को मिलेगा और रोडवेज की आय बढ़ जाएगी। एआरएम इटावा डिपो एके जैन का कहना है कि डग्गामारी के खिलाफ अभियान चलाना चाह रहे हैं। लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन की तैनाती न होने के कारण अभियान नहीं चल पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौजूदा समय में जिले में एआरटीओ प्रवर्तन का पद खाली पड़ा हुआ है। एक महीने पहले एआरटीओ (प्रवर्तन) एके सिंह का यहां से हापुड़ तबादला हो गया था। तब से यह कुर्सी यहां खाली पड़ी हुई है। एआरटीओ प्रवर्तन की खाली कुर्सी रोडवेज को खल रही है। क्योंकि रोडवेज को आय बढ़ाने के निर्देश मुख्यालय से लगातार मिल रहे हैं। ऐसे में रोडवेज को नुकसान पहुंचाने वाले डग्गामार वाहनों पर अफसर अंकुश लगाना चाहते हैं। लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन के ना होने के कारण रोडवेज को एआरटीओ विभाग से सहयोग नहीं मिल पा रहा है और अफसर चाहकर भी डग्गामारी के खिलाफ अभियान नहीं चला पा रहे हैं।
विज्ञापन
डग्गामारी के कारण रोडवेज को हर महीने 15 से 20 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ता है। अगर डग्गामारी पर अंकुश लगता है तो इसका सीधा फायदा रोडवेज को मिलेगा और रोडवेज की आय बढ़ जाएगी। एआरएम इटावा डिपो एके जैन का कहना है कि डग्गामारी के खिलाफ अभियान चलाना चाह रहे हैं। लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन की तैनाती न होने के कारण अभियान नहीं चल पा रहा है।
विज्ञापन