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500 बेड के अस्पताल को 70 करोड़ की दरकार
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सैफई। शासन से 25 करोड़ रुपये जारी होने के बाद अब फिर से उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गई है।
अब तक अस्पताल का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन जल्द ही 30 फीसदी कार्य भी पूरा होने के आसार हैं। इसके लिए अभी भी 70 करोड़ रुपये की दरकार है।
सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत वर्ष 2014 में 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का फैसला लिया गया था। उस समय इसकी लागत 333.56 करोड़ थी, जो 2016 में बढ़कर 463.28 करोड़ रुपये हो गई थी।
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वर्ष 2018 में इस योजना की लागत 537.26 करोड़ रुपये बढ़कर हो गई। यह संशोधित लागत काफी अधिक थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद सैफई में विकास कार्य रोक दिए गए।
बाद में इसकी लागत को कम करने के लिए 25 मार्च 2019 को शासन स्तर पर एक समिति का गठन किया गया। समिति की रिपोर्ट और संस्तुति के आधार पर योजना का फिर परीक्षण किया गया। इसके बाद योजना की लागत घटकर 489.88 करोड़ रह गई थी।
शासन ने अभी 29 नवंबर को 25 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, जिसको मिलाकर अब तक कुल 420 करोड़ रुपये इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए मिल चुके हैं। अब करीब 70 करोड़ की और जरूरत है।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दिवाली पर त्योहार मनाने के लिए अपने पैतृक गांव सैफई आए थे। उन्होंने भी सुपर स्पेशियलिटी 500 बेड के अस्पताल को लेकर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर हमला बोला था।
इसके बाद सरकार ने फिर से परियोजना पर ध्यान देना शुरू किया।
अब फिर काम परवान चढ़ने लगा
राज्य सरकार ने पुनरीक्षित योजना के लिए 20 जुलाई को 489.88 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत कर दिया है। इसके सापेक्ष पिछले माह 25 करोड़ जारी भी हो चुके हैं। शासन से बजट मिलने के बाद अब एक बार फिर परियोजना का काम परवान चढ़ने लगा है।
अब तक अस्पताल के निर्माण में लगभग 420 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यदि बाकी का 70 करोड़ रुपये समय पर मिल जाए तो एक साल के अंदर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सुविधा का लाभ जनता को मिलना शुरू हो जाएगा।
बजट के अभाव में यह महत्वपूर्ण परियोजना सात साल में भी पूरी नहीं हो सकी है।
ये रहेंगी सुविधा
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू होने से यहां पर 14 विभागों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग संचालित किए जाएंगे। जिनमें अंकोलाजी, कार्डियोलाजी, गैस्ट्रो, पलमोनरी, नेफ्रोलाजी, यूरोलाजी, मेडिसिन सर्जरी, पीडियाट्रिक वार्ड, एंडेफिनोलाजी वार्ड, क्लीनिकल हीमोटोलाजी, कैंसर आदि प्रमुख हैं।
सैफई में 950 बेड, 620 मरीज भर्ती
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में कुल 950 बेड है। इनमें इस समय इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर और जनरल वार्ड में 620 मरीज भर्ती हैं। इनका अलग-अलग बीमारियों का उपचार चल र
हा है। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में इस वक्त आठ विभागों में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल संचालित है। पांच सौ बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनकर तैयार होने के बाद यहां उपचार को आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
कोरोनाकाल में फुल हो गए थे बेड
कोरोनाकाल में बड़ी संख्या में मरीज उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में उपचार के लिए आए थे। तब यहां से पूरे बेड फुल हो गए थे। हालत यह हो गए थे कि मरीजों को वार्ड के बाहर बरामदे में लिटाया गया था।
पांच सौ बेड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने के बाद आपात स्थिति में मरीजों को यहां भर्ती करके उपचार किया जा सकेगा।
मंत्री भी कर चुके दौरा
जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना निर्माणाधीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। दोनों मंत्रियों ने सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय के अफसरों को शासन से निर्माणाधीन अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए बजट आवंटित कराने का भरोसा भी दिया था।
कई जिलों के आते हैं मरीज
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में इटावा ही नहीं कानपुर देहात, औरैया, मैनपुरी, जालौन, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद विश्वविद्यालय की महत्ता और बढ़ गई है। इटावा और आसपास के जिलों से गुजरे एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में घायल होने वाले लोगों को यहीं पर उपचार के लिए लाया जाता है।
70 फीसदी काम हो चुका है पूरा
लगभग 70 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य मेडिकल और बिजली से संबंधित बाकी है। अगर शासन से अवशेष बजट समय पर मिल जाता है तो एक साल में अस्पताल पूरी तरह से तैयार कर दिया जाएगा।
- एके सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, राजकीय निर्माण निगम
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अब तक अस्पताल का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन जल्द ही 30 फीसदी कार्य भी पूरा होने के आसार हैं। इसके लिए अभी भी 70 करोड़ रुपये की दरकार है।
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सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत वर्ष 2014 में 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का फैसला लिया गया था। उस समय इसकी लागत 333.56 करोड़ थी, जो 2016 में बढ़कर 463.28 करोड़ रुपये हो गई थी।
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वर्ष 2018 में इस योजना की लागत 537.26 करोड़ रुपये बढ़कर हो गई। यह संशोधित लागत काफी अधिक थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद सैफई में विकास कार्य रोक दिए गए।
बाद में इसकी लागत को कम करने के लिए 25 मार्च 2019 को शासन स्तर पर एक समिति का गठन किया गया। समिति की रिपोर्ट और संस्तुति के आधार पर योजना का फिर परीक्षण किया गया। इसके बाद योजना की लागत घटकर 489.88 करोड़ रह गई थी।
शासन ने अभी 29 नवंबर को 25 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, जिसको मिलाकर अब तक कुल 420 करोड़ रुपये इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए मिल चुके हैं। अब करीब 70 करोड़ की और जरूरत है।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दिवाली पर त्योहार मनाने के लिए अपने पैतृक गांव सैफई आए थे। उन्होंने भी सुपर स्पेशियलिटी 500 बेड के अस्पताल को लेकर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर हमला बोला था।
इसके बाद सरकार ने फिर से परियोजना पर ध्यान देना शुरू किया।
अब फिर काम परवान चढ़ने लगा
राज्य सरकार ने पुनरीक्षित योजना के लिए 20 जुलाई को 489.88 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत कर दिया है। इसके सापेक्ष पिछले माह 25 करोड़ जारी भी हो चुके हैं। शासन से बजट मिलने के बाद अब एक बार फिर परियोजना का काम परवान चढ़ने लगा है।
अब तक अस्पताल के निर्माण में लगभग 420 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यदि बाकी का 70 करोड़ रुपये समय पर मिल जाए तो एक साल के अंदर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सुविधा का लाभ जनता को मिलना शुरू हो जाएगा।
बजट के अभाव में यह महत्वपूर्ण परियोजना सात साल में भी पूरी नहीं हो सकी है।
ये रहेंगी सुविधा
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू होने से यहां पर 14 विभागों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग संचालित किए जाएंगे। जिनमें अंकोलाजी, कार्डियोलाजी, गैस्ट्रो, पलमोनरी, नेफ्रोलाजी, यूरोलाजी, मेडिसिन सर्जरी, पीडियाट्रिक वार्ड, एंडेफिनोलाजी वार्ड, क्लीनिकल हीमोटोलाजी, कैंसर आदि प्रमुख हैं।
सैफई में 950 बेड, 620 मरीज भर्ती
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में कुल 950 बेड है। इनमें इस समय इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर और जनरल वार्ड में 620 मरीज भर्ती हैं। इनका अलग-अलग बीमारियों का उपचार चल र
हा है। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में इस वक्त आठ विभागों में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल संचालित है। पांच सौ बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनकर तैयार होने के बाद यहां उपचार को आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
कोरोनाकाल में फुल हो गए थे बेड
कोरोनाकाल में बड़ी संख्या में मरीज उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में उपचार के लिए आए थे। तब यहां से पूरे बेड फुल हो गए थे। हालत यह हो गए थे कि मरीजों को वार्ड के बाहर बरामदे में लिटाया गया था।
पांच सौ बेड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने के बाद आपात स्थिति में मरीजों को यहां भर्ती करके उपचार किया जा सकेगा।
मंत्री भी कर चुके दौरा
जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना निर्माणाधीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। दोनों मंत्रियों ने सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय के अफसरों को शासन से निर्माणाधीन अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए बजट आवंटित कराने का भरोसा भी दिया था।
कई जिलों के आते हैं मरीज
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में इटावा ही नहीं कानपुर देहात, औरैया, मैनपुरी, जालौन, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद विश्वविद्यालय की महत्ता और बढ़ गई है। इटावा और आसपास के जिलों से गुजरे एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में घायल होने वाले लोगों को यहीं पर उपचार के लिए लाया जाता है।
70 फीसदी काम हो चुका है पूरा
लगभग 70 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य मेडिकल और बिजली से संबंधित बाकी है। अगर शासन से अवशेष बजट समय पर मिल जाता है तो एक साल में अस्पताल पूरी तरह से तैयार कर दिया जाएगा।
- एके सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, राजकीय निर्माण निगम