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Etawah News: पांच माह से 50 वेंटीलेटर खराब, %इलाज% की दरकार....
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सैफई। कोरोना काल में कइयों को संजीवनी देने वाले वेंटिलेटर खुद दम तोड़ते दिख रहे हैं। उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में 50 वेंटिलेटर पांच माह से खराब हैं। इन वेंटिलेटरों को सही कराने के लिए विवि प्रशासन कई पत्र लिख चुका है, लेकिन अभी तक ध्यान नहीं दिया गया।
कोविड संक्रमण की पहली लहर के दौरान ही पीएम केयर से आयुर्विज्ञान विवि को 134 वेंटिलेटर मिले थे। दूसरी लहर में इनके जरिये कई लोगों की जान बच सकी थी। एक साल पूर्व ये खराब होने लगे।
स्टाफ के अनुसार अधिकांश वेंटिलेटर में मास्क, ट्यूब समेत तकनीकी समस्याएं हैं। समय बीतने के साथ ये खस्ताहाल होते जा रहे हैं। यदि कुछ समय में इनकी मरम्मत नहीं हुई तो ये पूरी तरह खराब हो सकते हैं।
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चीन में फिर एक बार कोरोना फैलने से केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। राज्य सरकारों को सतर्कता बरने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में संसाधनों को दुरुस्त रखने की दरकार है लेकिन विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
200 वेंटिलेटर संचालित
आयुर्विज्ञान विवि में करीब 200 वेंटिलेटर संचालित हैं। विवि प्रशासन के अनुसार, सामान्य दिनों के लिए तो विवि में पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं, लेकिन कोविड-19 के संक्रमण जैसी स्थितियों में एक-एक वेंटिलेटर कीमती हो जाता है। ऐसे में सभी वेंटिलेटर सही होना जरूरी है।
पीएम केयर से खरीदे गए वेंटिलेटर की लागत लगभग चार लाख रुपये है। अस्पताल प्रशासन की ओर से खरीदे गए वेंटिलेटरों की कीमत करीब 15 लाख रुपये है। इसका कारण यह बताया गया कि कोरोना काल में जर्मनी और अमेरिका से वेंटिलेटर आयात होने की वजह से मेक इन इंडिया पर जोर दिया गया था। इससे बने वेंटिलेटर सस्ते पड़े थे।
आयुर्विज्ञान विवि के प्रभारी कुलसचिव प्रो/डॉ. चंद्रवीर ने बताया कि वेंटिलेटर सही कराने के लिए लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। अंतिम पत्र दो दिसंबर को लिखा गया है।
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कोविड संक्रमण की पहली लहर के दौरान ही पीएम केयर से आयुर्विज्ञान विवि को 134 वेंटिलेटर मिले थे। दूसरी लहर में इनके जरिये कई लोगों की जान बच सकी थी। एक साल पूर्व ये खराब होने लगे।
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स्टाफ के अनुसार अधिकांश वेंटिलेटर में मास्क, ट्यूब समेत तकनीकी समस्याएं हैं। समय बीतने के साथ ये खस्ताहाल होते जा रहे हैं। यदि कुछ समय में इनकी मरम्मत नहीं हुई तो ये पूरी तरह खराब हो सकते हैं।
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चीन में फिर एक बार कोरोना फैलने से केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। राज्य सरकारों को सतर्कता बरने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में संसाधनों को दुरुस्त रखने की दरकार है लेकिन विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
200 वेंटिलेटर संचालित
आयुर्विज्ञान विवि में करीब 200 वेंटिलेटर संचालित हैं। विवि प्रशासन के अनुसार, सामान्य दिनों के लिए तो विवि में पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं, लेकिन कोविड-19 के संक्रमण जैसी स्थितियों में एक-एक वेंटिलेटर कीमती हो जाता है। ऐसे में सभी वेंटिलेटर सही होना जरूरी है।
पीएम केयर से खरीदे गए वेंटिलेटर की लागत लगभग चार लाख रुपये है। अस्पताल प्रशासन की ओर से खरीदे गए वेंटिलेटरों की कीमत करीब 15 लाख रुपये है। इसका कारण यह बताया गया कि कोरोना काल में जर्मनी और अमेरिका से वेंटिलेटर आयात होने की वजह से मेक इन इंडिया पर जोर दिया गया था। इससे बने वेंटिलेटर सस्ते पड़े थे।
आयुर्विज्ञान विवि के प्रभारी कुलसचिव प्रो/डॉ. चंद्रवीर ने बताया कि वेंटिलेटर सही कराने के लिए लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। अंतिम पत्र दो दिसंबर को लिखा गया है।