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374 करोड़ की लागत से बनेगा तीसरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Fri, 12 Jun 2015 11:31 PM IST
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पतित पावनी यमुना को प्रदूषण से मुक्त दिलाने के लिए तीसरे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार हो गई है। वर्ष 2025 तक की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाई गई इस योजना की लागत 374 करोड़ रुपये होगी।
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प्रस्तावित प्लंाट की क्षमता 55.25 एमएलडी सीवेज पानी शोधित करने की होगी। डीपीआर तैयार कर शासन के पास भेजी गई है। कार्ययोजना तैयार करने के पीछे यमुना को गंदगी से मुक्त करना है।
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दरअसल वर्तमान में दो प्लांट होने के बाद भी शहर का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है। इटावा के घाटों पर पानी इतना गंदा है कि पर्वों के दौरान लोगाें की आस्थाएं आहत होती हैं।
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वर्तमान में शहर से निकलने वाले गंदे पानी का शोधित करने के लिए दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं। इनमें से एक की क्षमता 10.45 एमएलडी पानी शोधित करने की है जबकि दूसरे की क्षमता 13.50 एमएलडी पानी शोधित करने की है। पालिका के अनुसार से शहर से प्रतिदिन करीब 35 एमएलडी सीवेज पानी निकलता है।
जाहिर सी बात है कि 11.05 एमएलडी पानी बिना शोधित हुए ही सीधे यमुना में जाकर पतित पावनी को मैला कर रहा है। 374 करोड़ लागत की यह योजना वर्ष 2025 की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
तीसरे प्लांट का निर्माण उमरेन गांव के पास कराया जाएगा। योजना तैयार करने का काम सीएंडडीएस को सौंपा गया है। पालिका की योजना है कि यमुना में या तो पानी छोड़ा ही न जाए, सीवेज पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाए। और यदि पानी छोड़ा ही जाना है तो पूर्ण रूप से शोधित करके ही छोड़ा जाए।
गंगा के बाद यमुना को दूसरे स्थान पर पवित्र माना जाता है मान्यता है कि यमुुना में नहाने से पाप कट जाते हैं। साल में होने वाले विभिन्न पर्वो पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना नहाने के लिए आते हैं लेकिन इटावा से लगे घाटाें पर इतना गंदा पानी है कि लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।
यहां घाटों पर बड़ी संख्या में मंदिर बने हुए है। यमुना को गंदगी से मुक्त कराने के बाद भी इन मंदिरों का वैभव लौट सकता है।
लोनिवि मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी
एक सप्ताह पहले प्रदेश के लोनिवि मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने टिक्सी टैंपल स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्हें कई खामियां मिली थीं। गंदा पानी यमुना में जाते देख उन्होंने तीखे तेवर दिखाए थे।
उन्होंने सीवेज पानी क ा उपयोग सिंचाई के लिए उपयोग करने की योजना तैयार करने के लिए कहा था। इसके बाद से यमुना को गंदगी से मुक्त दिलाने के लिए अधिकारियों ने माथापच्ची शुरू कर दी है।
तब से तीन गुनी हो गई जनसंख्या
इटावा शहर का गंदा पानी फिल्टर करने के बाद यमुना में डालने की योजना करीब दो दशक पहले तैयार की गई थी। तब से अब तक आबादी में तीन गुने से ज्यादा इजाफा हो गया है। यही कारण है इटावा में बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस बार वर्ष 2025 तक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्लानिंग की गई है।
प्रस्तावित प्लांट की लागत- 374 करोड़
सीवेज पानी शोधन क्षमता -55.25 एमएलडी
वर्तमान प्लांट की शोधन क्षमता- 23.95 एमएलडी
शहर से निकल रहा गंदा पानी- 35 एमएलडी
यमुना में जा रहा गंदा पानी -11.05 एमएलडी