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आचार्यो की दीक्षा जयंती पर अनाथ बच्चों को कराया भोजन
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:23 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
इटावा।
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं गिरनार गौरव आचार्य श्री 108 निर्मल सागर जी महाराज का 50वां दीक्षा दिवस बुधवार को संयम स्वर्ण जयंती महोत्सव के रूप मनाया गया। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के सदस्यों ने अनाथ बच्चों को भोजन कराया।
संगठन के पदाधिकारी सुबह 10 बजे बच्चों के पास पहुंचे और आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज का स्मरण कराते हुए उनके सत्मार्ग पर चलने की शपथ ग्रहण कराई। सदस्यों को अपने बीच पाकर बच्चे प्रफुल्लित हो गए। संगठन के अध्यक्ष आकाशदीप जैन ने कहा कि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज का जन्म 10 अक्तूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगाम में हुआ था। उन्होंने आषाढ़ सुदी पंचमी विक्रम संवत 2025 को लगभग 22 वर्ष की अवस्था में संयम धर्म के परिपालन के लिए उन्होंने पिच्छी कमंडल धारण करके मुनि दीक्षा धारण की थी, जो कि समाज के लिए आश्चर्य और अद्भुत क्षण था।
महामंत्री राजीव जैन ने कहा कि आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर से दीक्षा लेने के बाद आचार्य विद्यासागर ने कन्नड़ भाषी होते हुए भी हिंदी, संस्कृत, कन्नड़, प्राकृत, बंगला और अंग्रेजी में लेखन किया है। वर्तमान में वह छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में विराजमान ंहै। इस मौके पर मनोज जैन, प्रिंशू जैन, प्रशांत जैन, नितिन जैन, आदित्य जैन, अर्पित जैन, शेखर जैन, नीरज जैन, अन्नू जैन, सुनील जैन, आदि उपस्थित रहे। आभार प्रशांत जैन ने व्यक्त किया।
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- विश्व जैन संगठन ने आचार्यों का मनाया 50वां दीक्षा स्वर्ण जयंती
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इटावा।
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं गिरनार गौरव आचार्य श्री 108 निर्मल सागर जी महाराज का 50वां दीक्षा दिवस बुधवार को संयम स्वर्ण जयंती महोत्सव के रूप मनाया गया। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के सदस्यों ने अनाथ बच्चों को भोजन कराया।
संगठन के पदाधिकारी सुबह 10 बजे बच्चों के पास पहुंचे और आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज का स्मरण कराते हुए उनके सत्मार्ग पर चलने की शपथ ग्रहण कराई। सदस्यों को अपने बीच पाकर बच्चे प्रफुल्लित हो गए। संगठन के अध्यक्ष आकाशदीप जैन ने कहा कि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज का जन्म 10 अक्तूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगाम में हुआ था। उन्होंने आषाढ़ सुदी पंचमी विक्रम संवत 2025 को लगभग 22 वर्ष की अवस्था में संयम धर्म के परिपालन के लिए उन्होंने पिच्छी कमंडल धारण करके मुनि दीक्षा धारण की थी, जो कि समाज के लिए आश्चर्य और अद्भुत क्षण था।
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महामंत्री राजीव जैन ने कहा कि आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर से दीक्षा लेने के बाद आचार्य विद्यासागर ने कन्नड़ भाषी होते हुए भी हिंदी, संस्कृत, कन्नड़, प्राकृत, बंगला और अंग्रेजी में लेखन किया है। वर्तमान में वह छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में विराजमान ंहै। इस मौके पर मनोज जैन, प्रिंशू जैन, प्रशांत जैन, नितिन जैन, आदित्य जैन, अर्पित जैन, शेखर जैन, नीरज जैन, अन्नू जैन, सुनील जैन, आदि उपस्थित रहे। आभार प्रशांत जैन ने व्यक्त किया।
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- विश्व जैन संगठन ने आचार्यों का मनाया 50वां दीक्षा स्वर्ण जयंती