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लैप्स हो गए सांसद निधि के 10 करोड़ रुपये
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मोदी लहर में सपा के गढ़ से चुनाव जीते भाजपा सांसद अशोक दोहरे अपनी विकास निधि खर्च करने में फिसड्डी साबित हुए हैं। पांच करोड़ रुपये सालाना के हिसाब से संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च होने थे और हुए महज 15 करोड़।
निधि के 10 करोड़ रुपये लैप्स हो गए। इस रकम से विकास से जुड़े कई काम हो सकते थे। मसलन- गोशालाओं की सूरत बदल सकती थी लेकिन सांसद की बेरुखी जिले के विकास पर भारी पड़ गई।
पिछले लोकसभा चुनाव में जिले की सुरक्षित सीट से भाजपा सांसद बनने पर लोगों को उम्मीद थी कि सपा के गढ़ में जीत हासिल होने से बीजेपी अपनी पैठ बढ़ाएगी लेकिन सांसद का कार्यकाल पूरा हो रहा और आंकड़े गवाह है कि निधि के उपयोग में वह फिसड्डी साबित हुए हैं।
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गौर करें तो पाएंगे कि 2014-15 में जिले को शुरुआत में ही ढाई करोड़ रुपये मिले लेकिन सांसद के प्रस्ताव पर इटावा जिले की जगह विकास निधि औरैया जिले ट्रांसफर हो गई। जो ढाई करोड़ रुपये इटावा जिले को प्राप्त हुए थे, वे भी औरैया ट्रांसफर हो गए।
सांसद के पहले वर्ष 2014-15 में एक धेला भी इटावा के विकास पर खर्च नहीं हुआ। इसके बाद 2015-16 और 2016-17 में एक एक करोड़ रुपया जिले को मिला।
2017-18 में तीन करोड़ रुपये और 2018-19 में सवा करोड़ रुपये उपलब्ध हुए। इस तरह पांच वर्षों में कुल सवा छह करोड़ रुपये जिले में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए।
2014-15 व 2015-16 में सड़क निर्माण आदि से जुड़े 102.35 लाख रुपये के प्रस्तावित कुल सात कार्य लंबित बने रहे। इन पर 2016-17 में काम शुरु हो सका। इसी वर्ष सांसद ने जिले के लिए 342.82 लाख रुपये के 18 कार्य प्रस्तावित किए।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 182.48 लाख रुपये के चार कार्य प्रस्तावित किए हैं। जिले में सांसद के प्रस्तावित कुल 29 कार्यों में से 23 पूर्ण हो पाए हैं। छह कार्य लंबित हैं।
यह आंकड़ा सिर्फ इटावा जिले का है। जबकि संसदीय क्षेत्र में इटावा के अलावा औरैया व कानपुर देहात जिलों के चार विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं।
इटावा जिले को उपलब्ध सवा छह करोड़ रुपये मिलाकर पूरे संसदीय क्षेत्र के लिए सिर्फ 15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। विकास निधि के 10 करोड़ रुपये समय पर प्रस्ताव न भेजने और कार्य पूर्ण न होने के चलते प्राप्त नहीं हुए।
सांसद अपनी निर्धारित निधि का सिर्फ 60 फीसदी का उपयोग कर पाए। जिसका सीधा खामियाजा संसदीय क्षेत्र के लोगों को हुआ है।
विकास निधि के दस करोड़ रुपये लैप्स नहीं हुए हैं। उक्त रकम के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। जिसमें यमुना पुल समेत कई सड़कें प्रस्तावित हैं। रकम मिलने पर यह कार्य भी शुरू हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के शुरुआती दो साल तक शासन प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। यूपी में सपा की सरकार होने से उनके प्रस्तावों पर गौर नहीं किया गया। भाजपा सरकार आने के बाद वह अपनी निधि से विकास कार्य करा पाए। - अशोक दोहरे, सांसद, इटावा
लैप्स हो गए सांसद निधि के 10 करोड़ रुपये
सांसद की बेरुखी जिले के विकास पर पड़ी भारी, सफाई : सपा सरकार में सहयोग नहीं मिला
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निधि के 10 करोड़ रुपये लैप्स हो गए। इस रकम से विकास से जुड़े कई काम हो सकते थे। मसलन- गोशालाओं की सूरत बदल सकती थी लेकिन सांसद की बेरुखी जिले के विकास पर भारी पड़ गई।
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पिछले लोकसभा चुनाव में जिले की सुरक्षित सीट से भाजपा सांसद बनने पर लोगों को उम्मीद थी कि सपा के गढ़ में जीत हासिल होने से बीजेपी अपनी पैठ बढ़ाएगी लेकिन सांसद का कार्यकाल पूरा हो रहा और आंकड़े गवाह है कि निधि के उपयोग में वह फिसड्डी साबित हुए हैं।
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गौर करें तो पाएंगे कि 2014-15 में जिले को शुरुआत में ही ढाई करोड़ रुपये मिले लेकिन सांसद के प्रस्ताव पर इटावा जिले की जगह विकास निधि औरैया जिले ट्रांसफर हो गई। जो ढाई करोड़ रुपये इटावा जिले को प्राप्त हुए थे, वे भी औरैया ट्रांसफर हो गए।
सांसद के पहले वर्ष 2014-15 में एक धेला भी इटावा के विकास पर खर्च नहीं हुआ। इसके बाद 2015-16 और 2016-17 में एक एक करोड़ रुपया जिले को मिला।
2017-18 में तीन करोड़ रुपये और 2018-19 में सवा करोड़ रुपये उपलब्ध हुए। इस तरह पांच वर्षों में कुल सवा छह करोड़ रुपये जिले में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए।
2014-15 व 2015-16 में सड़क निर्माण आदि से जुड़े 102.35 लाख रुपये के प्रस्तावित कुल सात कार्य लंबित बने रहे। इन पर 2016-17 में काम शुरु हो सका। इसी वर्ष सांसद ने जिले के लिए 342.82 लाख रुपये के 18 कार्य प्रस्तावित किए।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 182.48 लाख रुपये के चार कार्य प्रस्तावित किए हैं। जिले में सांसद के प्रस्तावित कुल 29 कार्यों में से 23 पूर्ण हो पाए हैं। छह कार्य लंबित हैं।
यह आंकड़ा सिर्फ इटावा जिले का है। जबकि संसदीय क्षेत्र में इटावा के अलावा औरैया व कानपुर देहात जिलों के चार विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं।
इटावा जिले को उपलब्ध सवा छह करोड़ रुपये मिलाकर पूरे संसदीय क्षेत्र के लिए सिर्फ 15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। विकास निधि के 10 करोड़ रुपये समय पर प्रस्ताव न भेजने और कार्य पूर्ण न होने के चलते प्राप्त नहीं हुए।
सांसद अपनी निर्धारित निधि का सिर्फ 60 फीसदी का उपयोग कर पाए। जिसका सीधा खामियाजा संसदीय क्षेत्र के लोगों को हुआ है।
विकास निधि के दस करोड़ रुपये लैप्स नहीं हुए हैं। उक्त रकम के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। जिसमें यमुना पुल समेत कई सड़कें प्रस्तावित हैं। रकम मिलने पर यह कार्य भी शुरू हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के शुरुआती दो साल तक शासन प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। यूपी में सपा की सरकार होने से उनके प्रस्तावों पर गौर नहीं किया गया। भाजपा सरकार आने के बाद वह अपनी निधि से विकास कार्य करा पाए। - अशोक दोहरे, सांसद, इटावा
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