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आधारकार्ड न जुड़ने से अटका गरीबों का राशन
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इटावा। राशनकार्ड से आधारकार्ड न जुड़ने की वजह से तमाम गरीब परिवारों को निर्धारित मात्रा में गेहूं व चावल मुहैया नहीं हो पा रहा है। जिले में अब तक पात्र गृहस्थी श्रेणी के लाभार्थी परिवारों के 55236 सदस्यों के आधारकार्ड जुड़ना बाकी हैं। इनमें से काफी परिवारों के सदस्यों के नाम सूची से कटे हुए हैं।
पात्र गृहस्थी परिवार को सदस्यों की संख्या के हिसाब से गेहूं और चावल मिलता है। परिवार के एक सदस्य को सरकार से दो रुपये किलो के भाव से साढ़े तीन किलो गेहूं और तीन रुपये किलो में डेढ़ किलो चावल मिलता है। अब अगर किसी गरीब के परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें से किसी सदस्य के नाम के साथ आधारकार्ड नंबर नहीं जुड़ा है तो ऐसे ताम लोगों के नाम कट गए हैं। नाम कटने से राशन की मात्रा कम हो गई है। लिहाजा गरीब परिवारों को निर्धारित मात्रा में गेहूं व चावल नहीं मिल पा रहा है।
खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम के लागू होने के बाद सरकार ने अंत्योदय और पात्र गृहस्थी के तौर पर गरीबों को चिह्नित करके सस्ती दरों पर गेहूं व चावल देने की व्यवस्था शुरू की।
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जिले में करीब पांच साल पहले इस व्यवस्था के तहत अंत्योदय राशनकार्ड धारकों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ। अलबत्ता पात्र गृहस्थी श्रेणी में परिवारों के चयन की प्रक्रिया अपनाई गई थी। आननफानन में लाभार्थियों का चयन हुआ था। नतीजतन तमाम अपात्र परिवार भी लाभ से जुड़ गए।
बाद में शासन के निर्देश पर मुखिया व परिवार के सदस्यों के आधारकार्ड जुड़ना शुरू हुए। जो अब तक शत प्रतिशत नहीं जुड़ पाए हैं। मौजूदा समय में अंत्योदय व पात्र गृहस्थी के कुल 3,03,216 परिवार के 10 लाख 57 हजार 951 सदस्य लाभार्थी सूची में शामिल हैं। इनमें से 55236 सदस्यों के आधारकार्ड नहीं जुड़े हैं। इन्हीं में से तमाम लोगों के नाम सूची से कट चुके हैं। जिससे लाभार्थी परिवार को निर्धारित मात्रा में गेहूं व चावल नहीं मिल पा रहा है।
इनसेट
करीब 10 हजार हैं फर्जी नाम
जिन लोगों के आधारकार्ड जमा नहीं हुए हैं। उनमें करीब 10 हजार लोगों के नाम फर्जी माने जा रहे हैं। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि काफी समय से आधारकार्ड मांगे जा रहे हैं। राशनडीलरों से भी कहा गया है कि वह लाभार्थियों से आधारकार्ड एकत्रित करके पूर्ति निरीक्षक को उपलब्ध करा दें। उन्होंने कहा कि इनमें से कितने लोगों के नाम सही नहीं हैं। यह कहना मुश्किल है। लेकिन आधार जमा न होने पर उनके नाम सूची से काटे जा सकते हैं।
कई बार जमा कर चुके आधारकार्ड
पूर्ति विभाग के चक्कर काटते लोगों की मानें तो वह कई बार आधारकार्ड जमा कर चुके हैं। लेकिन हर बार मालूम करने पर कह दिया जाता है कि आधारकार्ड लेकर आओ। यहीं बात राशनडीलर यूनियन के जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर प्रजापति ने कही। बोले डीलर कई बार लाभार्थियों से आधार लेकर दफ्तर में दे चुके हैं। अब मांगने पर लाभार्थी झुंझलाने लगे हैं। पता नहीं दफ्तर से आधारकार्ड कहां चले जाते हैं। यह काम विभाग का है। डीलरों पर थोपा जा रहा है।
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पात्र गृहस्थी परिवार को सदस्यों की संख्या के हिसाब से गेहूं और चावल मिलता है। परिवार के एक सदस्य को सरकार से दो रुपये किलो के भाव से साढ़े तीन किलो गेहूं और तीन रुपये किलो में डेढ़ किलो चावल मिलता है। अब अगर किसी गरीब के परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें से किसी सदस्य के नाम के साथ आधारकार्ड नंबर नहीं जुड़ा है तो ऐसे ताम लोगों के नाम कट गए हैं। नाम कटने से राशन की मात्रा कम हो गई है। लिहाजा गरीब परिवारों को निर्धारित मात्रा में गेहूं व चावल नहीं मिल पा रहा है।
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खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम के लागू होने के बाद सरकार ने अंत्योदय और पात्र गृहस्थी के तौर पर गरीबों को चिह्नित करके सस्ती दरों पर गेहूं व चावल देने की व्यवस्था शुरू की।
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जिले में करीब पांच साल पहले इस व्यवस्था के तहत अंत्योदय राशनकार्ड धारकों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ। अलबत्ता पात्र गृहस्थी श्रेणी में परिवारों के चयन की प्रक्रिया अपनाई गई थी। आननफानन में लाभार्थियों का चयन हुआ था। नतीजतन तमाम अपात्र परिवार भी लाभ से जुड़ गए।
बाद में शासन के निर्देश पर मुखिया व परिवार के सदस्यों के आधारकार्ड जुड़ना शुरू हुए। जो अब तक शत प्रतिशत नहीं जुड़ पाए हैं। मौजूदा समय में अंत्योदय व पात्र गृहस्थी के कुल 3,03,216 परिवार के 10 लाख 57 हजार 951 सदस्य लाभार्थी सूची में शामिल हैं। इनमें से 55236 सदस्यों के आधारकार्ड नहीं जुड़े हैं। इन्हीं में से तमाम लोगों के नाम सूची से कट चुके हैं। जिससे लाभार्थी परिवार को निर्धारित मात्रा में गेहूं व चावल नहीं मिल पा रहा है।
इनसेट
करीब 10 हजार हैं फर्जी नाम
जिन लोगों के आधारकार्ड जमा नहीं हुए हैं। उनमें करीब 10 हजार लोगों के नाम फर्जी माने जा रहे हैं। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि काफी समय से आधारकार्ड मांगे जा रहे हैं। राशनडीलरों से भी कहा गया है कि वह लाभार्थियों से आधारकार्ड एकत्रित करके पूर्ति निरीक्षक को उपलब्ध करा दें। उन्होंने कहा कि इनमें से कितने लोगों के नाम सही नहीं हैं। यह कहना मुश्किल है। लेकिन आधार जमा न होने पर उनके नाम सूची से काटे जा सकते हैं।
कई बार जमा कर चुके आधारकार्ड
पूर्ति विभाग के चक्कर काटते लोगों की मानें तो वह कई बार आधारकार्ड जमा कर चुके हैं। लेकिन हर बार मालूम करने पर कह दिया जाता है कि आधारकार्ड लेकर आओ। यहीं बात राशनडीलर यूनियन के जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर प्रजापति ने कही। बोले डीलर कई बार लाभार्थियों से आधार लेकर दफ्तर में दे चुके हैं। अब मांगने पर लाभार्थी झुंझलाने लगे हैं। पता नहीं दफ्तर से आधारकार्ड कहां चले जाते हैं। यह काम विभाग का है। डीलरों पर थोपा जा रहा है।