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आखिर कैसे होगा नमामि गंगा का मिशन पूरा
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Thu, 14 May 2015 11:42 PM IST
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गंगा तेरा पानी अमृत झर-झर बहता जाए, युग- युग से इस देश की धरती तुझ से
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जीवन पाएं। यह पंक्तियां साफ गंगा की महत्वता को बता रही है। पंक्तियों क
सार में जाया जाए तो गंगा तेरा पानी अमृत के समान है और युग-युग से इस देश
की धरती के बासी तुझ से जीवन पा रहे है लेकिन आज ये धरती के बासी इतने
स्वार्थी कैसे हो गए। गंगा से आस्था के नाम पर खिलवाड़ क्यूं किया जा रहा।
आस्था के नाम पर गंगा में किए जा रहे प्रदुषण से न तो प्रशासन अनभिज्ञ है
और न शासन न ही श्रद्धालु लेकिन कोई भी इस प्रदुषण को रोकने के लिए तत्पर
नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गंगा की स्वच्छता के
लिए शुरू किया गया नमामि गंगे मिशन कितना लोगों को जागरूक कर पाएगा यह
देखना बाकी है।
कछला, सोरो, लहरा, कादरगंज आदि गंगा घाटों पर प्रतिदिन ही सैकड़ो श्रद्धालु स्नान को जाते है। किसी बड़े स्नान पर्व पर यह संख्या लाखों पर पहुंच जाती है। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था सिर चढ़कर बोलती है लेकिन स्नान के दौरान ही श्रद्धालु गंगा में ही प्रदुषण करते हुए दिख जाते है।
आस्थ के नाम पर घर से लाई हुई पुरानी मूर्तियों, पॉलीथिन में भरी जली हुई सामग्री की राख को खुलेआम गंगा में प्रवाहित किया जाता है। वहीं कई श्रद्धालु अपने वाहनों को गंगा में खड़ा कर धोते है लेकिन स्थानीय प्रशासन ऐसे श्रद्धालुओ को रोकना टोकना भी मुनासिब नहीं समझता। शव जलाने के बाद भी शव के साथ लाए गए लकड़ी, कपड़े व अन्य सामान को भी गंगा किनारे डाल दिया जाता है। बड़े गंगा स्नान पर्वो के बाद बड़ी संख्या में घाट के किनारे कई कुंटल कूड़ा एकत्रित हो जाता है। जिसे साफ नहीं किया जाता बल्कि गंगा में बहा दिया जाता है।
गंगा को निर्मल व अविरल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया नमामि गंगे मिशन बहुत ही सराहनीय है। लेकिन गंगा की सफाई के लिए पहले लोगों में जागरूकता जरूरी है। जिससे आस्था के नाम पर गंगा को प्रदुषित करने से बचाया जा सके
- ज्योतिषाचार्य- राधाकृष्ण दीक्षित
कछला, सोरो, लहरा, कादरगंज आदि गंगा घाटों पर प्रतिदिन ही सैकड़ो श्रद्धालु स्नान को जाते है। किसी बड़े स्नान पर्व पर यह संख्या लाखों पर पहुंच जाती है। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था सिर चढ़कर बोलती है लेकिन स्नान के दौरान ही श्रद्धालु गंगा में ही प्रदुषण करते हुए दिख जाते है।
आस्थ के नाम पर घर से लाई हुई पुरानी मूर्तियों, पॉलीथिन में भरी जली हुई सामग्री की राख को खुलेआम गंगा में प्रवाहित किया जाता है। वहीं कई श्रद्धालु अपने वाहनों को गंगा में खड़ा कर धोते है लेकिन स्थानीय प्रशासन ऐसे श्रद्धालुओ को रोकना टोकना भी मुनासिब नहीं समझता। शव जलाने के बाद भी शव के साथ लाए गए लकड़ी, कपड़े व अन्य सामान को भी गंगा किनारे डाल दिया जाता है। बड़े गंगा स्नान पर्वो के बाद बड़ी संख्या में घाट के किनारे कई कुंटल कूड़ा एकत्रित हो जाता है। जिसे साफ नहीं किया जाता बल्कि गंगा में बहा दिया जाता है।
गंगा को निर्मल व अविरल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया नमामि गंगे मिशन बहुत ही सराहनीय है। लेकिन गंगा की सफाई के लिए पहले लोगों में जागरूकता जरूरी है। जिससे आस्था के नाम पर गंगा को प्रदुषित करने से बचाया जा सके
- ज्योतिषाचार्य- राधाकृष्ण दीक्षित